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कारीगरों की स्वतंत्रता के लिए उत्थान ने शुरू किया अभियान

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भारत में सिर्फ विविध भाषाएँ और संस्कृति नहीं पाई जाती बल्कि अलग अलग संस्कृतियों के साथ अलग अलग कारीगरी भी पाई जाती है। कारीगर द्वारा की गयी कारीगरी के जरिये उस जगह की संस्कृति का पता चलता है। जिस तरह दो कदम की दूरी पर पानी बदलता है वैसे ही थोड़ी दूर पर संस्कृति बदल जाती है। कारीगर समाज का वो तबका है जिसने इस संस्कृतियों को अपने कारीगरी के जरिये संजो कर रखा है। इस समय देश कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है। किसी हद तक वो कोरोना को हरा भी चुका है लेकिन इस कोरोना ने लोगों के रहन सहन को बदल दिया है। वो आज न सिर्फ आर्थिक बल्कि समाजिक समस्या से भी लड़ रहे हैं।

 

सबसे ज्यादा समस्याओं का सामना कारीगरों व मजदूरों को करना पड़ रहा है क्योकि आज इनके पास रोजमर्रा के लिए भी पैसे नही है। वो कारीगर जो अपनी कलाकृतियों के जरिये देश की संस्कृति को एक सपने की तरह बचा कर रखते आए हैं आज उनकी आँखें सपने देखने से डरती है। वो समझ नही पा रहे है की सामाजिक दूरी का पालन करते हुए कैसे अपने बच्चो को पेट भर खाना खिला सकें। कितने मजबूर वो कारीगर जो आज तक अपनी कलाकृतियों में रंग भरते आए थे और आज उनकी जिंदगी बेरंग हो गयी है।

 

उनकी जिंदगी में रंग वापस से एक बार रंग भरने के लिए उत्थान ने एक अनोखी पहल शुरू की है। उत्थान कारीगर अपनाओ संस्कृति बचाओ के तहत कारीगरों तक उनकी जरुरतो का सामान लोगों से इकट्ठा करके उन तक पहुंचाएगा। हम सब बचपन से पढ़ते आए है की बूँद बूँद से सागर बनता है। आज आपकी एक छोटी सी मदद किसी के घर की रौनक वापस ला सकती है। उत्थान आपसे किसी आर्थिक मदद को न लेते हुए किसी भी तरह का कच्चा माल या औज़ार लेगा, जिसकी वजह से इन कारीगरों का काम रुका पड़ा है। आप लोग इस अभियान के तहत दवाइयां, कच्चा माल, बीमा, शिक्षा, कम पैसो के स्मार्ट फ़ोन, लैपटॉप, कपडे आदि दे सकते हैं।

 

हमारे भारत में किसी को खाना खिलाना बहुत पुण्य का काम होता है। अगर आप चाहे तो ऑनलाइन फ़ूड एप के जरिये किसी एक कारीगर परिवार को एक समय का खाना दिला कर इस अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। आपके द्वारा की गयी एक छोटी सी मदद न जाने कितने चेहरों पर खुशियाँ ला सकती है। आपको सिर्फ इतना करना है की आपको उत्थान की वेबसाइट (https://uthhan.gergstore.com/Home/campaign) पर फॉर्म को फिल करना है।

 

आप वालंटियर के तौर पर भी इसमें खुद को पंजीकृत करवा क्र इस अभियान को सफल बनाने में योगदान दे सकते हैं। आपको फॉर्म फिल करते वक़्त उसमे बताना है की आप किस तरह से उनकी मदद करना चाहते हैं। हम भारतीयों के लिए ये बात प्रसिद्ध है की हम अजनबियों की मदद भी करते है ये तो हमारे अपने लोग हैं। इन कारीगरों को किसी की भीख की जरूरत नहीं है आपके सहयोग की जरूरत है। उत्थान ने इससे पहले लॉक डाउन के समय में करीब 2000 से ज्यादा परिवारों को उनकी मेहनत का पैसा दिया है। उत्थान में कोई भी बिचौलिया न होने के कारण कारीगर अपने उत्पादों का मूल्य खुद तय करते हैं।

 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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