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घोड़ा-घोड़ा जपना, सारी मुसीबतों से बचना…

कटाक्ष

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satire on politics guwahati high court on cbiउनका खानदानी घोड़ा आज लड़खड़ा कर गिरने के कगार पर है. बेचारा घोड़ा जितना नहीं तड़प रहा, अपनी हर लड़ाई में जीत का भागीदार रहा अपने घोड़े के लिए बेचारा यह मालिक उससे ज्यादा तड़प रहा है. इतिहास गवाह है कि जंग जीतने के लिए एक अदद घोड़ा सबके लिए जरूरी होता है. राणा प्रताप का घोड़ा हो या रानी लक्ष्मी बाई का, जंग में जीत के लिए एक सबसे तेज दौड़ने वाला बुद्धिमान घोड़ा होना बहुत जरूरी है. कभी लड़ाई के लिए घोड़े चुनना युद्ध के लिए सिपहसलार चुनने से कम नहीं था. आज पहले की तरह न लड़ाईयां होती हैं, न घोड़ों की जरूरत पड़ती है लेकिन रईसी शान में आज भी घोड़े पालना रईसों का शौक है. बड़े खानदान की निशानी हैं ये घोड़े. ये तो फिर भी खानदानी भी हैं और इन्हें जंग भी जीतनी है.


आप सोच रहे होंगे कि आज हम घोड़े की रट क्यों लगाए बैठे हैं. दरअसल आज एक मालिक और घोड़े का अपार स्नेह देखकर हम उसपर यहां चर्चा किए बिना रह नहीं सके. ये वे मालिक हैं जिनका सबसे मजबूत और तेज दौड़ने वाला घोड़ा आज घायल हो गया है. वे आज इलजाम लगा सकते हैं कि उनके प्यारे और सबसे तेज घोड़े (सीबीआई) को साजिश के तहत घायल कर मारने की योजना बनाई जा रही है. ऐलान-ए-जंग से ठीक पहले उन्हें हराने की साजिश रची जा रही है. लेकिन इससे होता क्या है. जंग-ए-आजादी का प्रयास बेचारा यह घोड़ा छोड़ चुका है. ऐसा लग रहा है कि वह तड़प-तड़प कर अब मर ही जाएगा. बेचारा मालिक उसकी तड़प से ज्यादा उसकी मौत के बाद अपनी हार की आशंका से ज्यादा शोकाकुल दिख रहा है. भाग रहा है संजीवनी बूटी लाने हिमालय पर्वत (सुप्रीम कोर्ट) की ओर. लेकिन दिक्कत यह है कि संजीवनी बूटी इस घोड़े के लिए मिलेगी या नहीं इसकी शंका है क्योंकि आज का यह घोड़ा न लक्ष्मण है, न ही उसका मालिक हनुमान, कि सत्य की जीत के लिए संजीवनी बूटी मिल ही जाएगी उसे, कोई इसकी गारंटी ले ले.

हसीनाओं के नखरों पर लुटते ये दीवाने


अब दिक्कत यह है कि इस घोड़े के लिए कोई भी ‘शुभ कामना’ नहीं कर रहा है. मालिक को भी यही डर है कि संजीवनी पर्वत के बाबा जो बूटी देंगे, अगर उन्होंने भी संजीवनी बूटी देने से इनकार कर दिया तो इस मालिक का क्या होगा. पहले ही 2जी, 3जी, कोयला घोटाला, बोफोर्स आदि दुश्मनों से चारों तरफ से घिरा यह मालिक बेचारा इनसे निपटेगा कैसे! इसी घोड़े पर चढ़कर तो यह मार-काट मचाता, दुश्मनों से बचता आ रहा था. अपने अंगरक्षक, इस घोड़े को खोकर बेचारा मालिक अपनी जान कैसे बचा पाएगा! खैर! सब राम की लीला है. संजीवनी पर्वत के बाबा के आशीर्वाद से अगर संजीवनी बूटी मिल गई तो घोड़े के साथ मालिक की जान भी बच जाएगी. ऐसे में अगर मालिक और उनके शुभचिंतक यह मंत्र जप सकते हैं, “घोड़ा-घोड़ा जपना, सारी मुसीबतों से बचना… घोड़ा-घोड़ा जपना, सारी मुसीबतों से बचना”..अरे भाई हमारे जाने का वक्त हो रहा है. हमे विदा कर लो. फिर अकेले में मंत्र जपते रहना! अलविदा!!

Comment On Guwahati High Court Order On CBI

‘आप’ यहां आए किसलिए…

डूबते को मजबूत खंभे का सहारा चाहिए

जो आज तक किसी की नहीं हुई वो किसकी होगी

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