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गुजरात में स्मृति ईरानी बन सकती हैं मुख्यमंत्री! जानें किसके हाथ में आएगा हिमाचल

गुजरात और हिमाचल में बहुमत के बाद दोनों राज्यों में मुख्यमंत्री कौन बनेगा, ये सबसे बड़ा सवाल है। हिमाचल में सीएम कैंडीडेट प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए हैं। वहीं गुजरात का हाल भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। गुजरात में 117 से 99 सीट की गिरावट के चलते विजय रूपाणी को अपनी कुर्सी खतरे में दिख रही है और पार्टी भी बड़े फैसले लेने की सोच में है। ऐेसे में चलिए एक नजर ड़ालते हैं उन उम्मीदवारों पर जिसकी चर्चा बीजेपी अपने सीएम के लिए कर सकती है।

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गुजरात में नंबर ने बिगाड़ा कुर्सी का खेल

खबरें चल रही हैं की बीजेपी को गुजरात में जितनी सीटें मिली हैं वो पार्टी को खतरे की घंटी लग रही है। ऐसे में गुजरात में विजय रूपाणी के स्थान पर किसी दूसरे व्यक्त‍ि को यह पद दिया जा सकता है। जानकारी के अनुसार पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए, जो गुजरात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कि लोकप्रियता की बराबरी भले ही ना कर पाए, पर गुजरात में बीजेपी ने जिस विकास का भरोसा दिलाया है उसे पूरा कर सके। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे और साथ ही बीजेपी नेताओं को संगठ‍ति करने में भी सक्षम हो, जो इस चुनाव में अलग-थलग होते दिखे।


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कपड़ा मंत्री से मुख्यमंत्री तक सफर तय करेंगी स्मृति ईरानी!

इस दौड़ में कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का नाम सबसे आगे हैं। मजबूत नेतृत्व में पारांगत और गुजराती भाषा की जानकार होने के साथ ही स्मृति ईरानी प्रधानमंत्री के करीबी मंत्रीओं में से एक हैं। ऐसे में सूत्रों ने यह संभावना जताई है कि स्मृति ईरानी गुजरात की अगली मुख्यमंत्री बन सकती हैं। वहीं, सीएम पद के इस दौड़ में दूसरे स्थान पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग और शिपिंग के राज्य मंत्री मनसुख मांडविया का नाम है। मांडविया पाटीदार होने के साथ-साथ किसान और जमीन से जुड़े नेताओं में शामिल हैं।


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गुजरात के रेस में इनका नाम भी शामिल

जबकि तीसरे स्थान पर वजुभाई वाला का नाम बता रहे हैं। वजुभाई क्षत्रिय समाज से आते हैं, वह कर्नाटक के वर्तमान गवर्नर हैं और गुजरात विधानसभा के पूर्व स्पीकर। वजुभाई वाला के पोर्टफोलियो में फाइनेंस, मजदूर और रोजगार जैसे अहम क्षेत्र जुड़े हुए हैं। संगठन के जानकार और सौराष्ट्र में अच्छी खासी पकड़ रखने वाले वजुभाई के नाम पर भी मुहर लग सकती है।


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हिमाचल में भी कई नाम पर संशय

हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल के हारने से संकट खड़ा हुआ है। धूमल न सिर्फ खुद हारे हैं, उनके कई करीबी भी हार गए हैं। हालांकि धूमल अभी भी अपने नाम के लिए जोर लगा रहे हैं। कुटलेहड़ से वीरेंद्र कंवर उनके लिए सीट छोड़ सकते हैं। दूसरी तरफ जेपी नड्डा का नाम भी चर्चा में है, मगर नड्डा ससंदीय बोर्ड समेत कई दूसरे अहम पदों पर हैं। इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री बनाने पर कई बार विचार किया जाएगा।…Next


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