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दो देशों के बीच इस जगह के लिए छिड़ी जंग, यहां रहते हैं सिर्फ 1500 लोग

कोई एक कीमती चीज जिसपर कोई दो लोग अधिकार जमाते हैं. दोनों का कहना होता है कि वो कीमती चीज उसकी है, इसके बाद लड़ाई और छीना-झपटी का दौर शुरू हो जाता है. आपने पुरानी फिल्मों या फिर असल जिंदगी में ऐसा वाक्या जरूर देखा होगा, जिसमें किसी कीमती चीज या व्यक्ति पर दो लोग दावेदारी करते हैं और उसे पाने की हर संभव कोशिश करते हैं. ये किस्सा तो बहुत पुराना है, लेकिन अगर हम आपसे कहे कि दुनिया में एक जगह ऐसी है जिसे पाने के लिए दो देश एक-दूसरे से टक्कर ले रहे हैं, तो शायद आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन ऐसा हो रहा है एक महाद्धीप के साथ. मिजिंगो महाद्धीप, विक्टोरिया झील के बीच में है, लेकिन दो अफ्रीकन देश इस पर दावा कर रहे हैं. केन्या सरकार और यूगांडा सरकार के बीच इस महाद्धीप को लेकर टकराव हो रहा है.


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यूगांडा सरकार का दावा है कि भूखंड जिस पानी से घिरा है वो पानी यूगांडा का है. इस झील पर यूंगाडा अपना अधिकार जमा रहा है, जबकि केन्या का दावा है कि भूखंड जिस पर घर बनाए गए है, वो केन्या का हिस्सा है इसलिए उस महाद्धीप पर पूरा अधिकार केन्या का है. खास बात ये है कि इस झील में मछली पालन का व्यवसाय फल-फूल रहा है और जो देश इसका इस्तेमाल करेगा उसकी अर्थव्यवस्था को इस मछली व्यवसाय से फायदा होगा. कहा जाता है कि इस द्धीप को लेकर दोनों देशों की सेनाएं कई बार आमने-सामने आ चुकी हैं, लेकिन कई देशों की मध्यस्थता के चलते युद्ध को टाला जा चुका है. इस महाद्धीप को एक खजाने की तरह माना जाता है, क्योंकि यहां मछली पालन करके दूसरे देशों के साथ व्यापारिक सम्बध बनाए जा सकते हैं.


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2009 के आसपास जब समुद्री लुटेरों को यहां की मत्स्य संपदा के बारे में पता चला, तो उन्होंने इस महाद्धीप पर हमला करके आधी से ज्यादा मछलियों को पकड़ लिया. साथ ही वो यहां के लोगों से जहाज के इंजन, कैश और गहने चुरा लिए. यहां एक मछवारा एक दिन में 16,694 रुपए कमा लेता है. इसी बात से मत्स्य संपदा से होने वाले कारोबार का पता लगाया जा सकता है. वहीं, यहां के मछवारों का कहना है कि ‘कभी यहां पर केन्या सेना रात में रेड डालती है, तो कभी यूगांडा सेना, जिससे हमारे रोजगार पर असर पड़ता है, हमें ये समझ नहीं आता कि इस परेशानी का हल कब निकलेगा.


अब किस देश का हिस्सा हैं, अभी तक हमें इसकी जानकारी ही नहीं है.’ मछवारों की व्यथा देखकर इतनी बात तो साफ है कि दोनों अपने फायदे के लिए महाद्धीप पर अपना अधिकार करना चाहते हैं, इन्हें यहां के नागरिकों से कोई लेना-देना नहीं है. इस महाद्धीप पर 1500 लोग रहते हैं…Next


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