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मायावती ने उपचुनावों में सपा से दूरी बनाकर चला बड़ा सियासी दांव!

उत्‍तर प्रदेश में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान सपा-बसपा का साथ आना अभी तक सुर्खियों में है। इन दोनों सीटों पर सपा के जीत दर्ज करने के बाद यूपी की 10 राज्‍यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए। इसमें बसपा प्रत्‍याशी की हार के बाद ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि सपा-बसपा का गठबंधन समाप्‍त हो सकता है। मगर बसपा सुप्रीमो मायावती व सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने इन कयासों पर विराम लगाते हुए स्‍पष्‍ट किया कि दोनों पार्टियों का गठबंधन बना हुआ है। इसके बाद मायावती ने सपा को झटका देते हुए बयान दिया कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में तो सपा के साथ लड़ेगी, लेकिन उपचुनावों में बसपा काडर उस तरह से सक्रिय नहीं रहेगा जैसा वह गोरखपुर-फूलपुर उपचुनावों में था। बता दें कि मायावती का इशारा कैराना लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर था। वहीं, सियासी पंडित इसे मायावती का बड़ा सियासी दांव मान रहे हैं। आइये आपको इसके बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

 

 

सीट बंटवारे को लेकर झुकने के मूड में नहीं मायावती

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बसपा के समर्थन से फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में जीत हासिल कर चुकी सपा के लिए महागठबंधन का रास्ता आसान नहीं होगा। 2019 में भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए बसपा सुप्रीमो इस महागठबंधन में कुछ शर्तें भी रख सकती हैं। खबरों की मानें, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर मायावती झुकने के मूड में नहीं हैं। बता दें कि मायावती उपचुनाव से पहले ही इस बात का इशारा दे चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि वे सपा के साथ गठबंधन में तभी आएंगी, जब उन्हें सम्माजनक सीटों का बंटवारा ऑफर किया जाएगा।

 

 

सपा के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है सीटों का बंटवारा

राज्यसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मायावती ने बयान दिया था कि वे अखिलेश यादव से वरिष्ठ नेता और ज्यादा अनुभवी हैं। मायावती के बयान से साफ था कि वे इस गठबंधन में एक तरह से बड़ी भूमिका की मांग कर रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के लिए सीटों का बंटवारा भी 2017 विधानसभा चुनाव और 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा-सपा के तुलनात्मक प्रदर्शन के आधार पर करना थोड़ा मुश्किल होगा।

 

 

सांसदों और विधायकों के मामले में सपा भारी

अगर नजर डालें 2014 लोकसभा चुनाव के परिणाम पर, तो सपा को पांच सीटें मिली थीं, जबकि बसपा के पास एक भी सीट नहीं आई। प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 31 सीटों पर सपा और 33 सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही। जिन लोकसभा सीटों पर सपा दूसरे स्थान पर थी, उनमें गोरखपुर और फूलपुर में बसपा के समर्थन से सपा ने हाल ही में जीत हासिल की है। वहीं, बसपा के पास 19 विधायक और सपा के पास 47 विधायक हैं। इसके अलावा फूलपुर और गोरखपुर में जीत दर्ज करने के बाद सपा के पास सात लोकसभा सांसद भी हैं, जबकि इस मामले में मायावती का हाथ खाली है। सियासी पंडितों का मानना है कि सीट बंटवारे में इस समीकरण का भी असर पड़ेगा…Next

 

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