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इन कारणों की वजह से फिर सत्ता में आ सकते हैं अरविंद केजरीवाल

दिल्ली की राजनीति में दिसम्बर की कँपकँपी नहीं दिख रही है. सड़कों पर छाया कोहरा राजनीतिक पार्टियों और उसके कार्यकर्ताओं की हाड़ पर वो असर नहीं डाल पा रहा जिसके लिए वो मशहूर है. कारण यह है कि दिल्ली में विधानसभा चुनावों की तारीख़ तय हो गई है और इसने राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ जनता के चेहरे पर जल्दी ही अपनी चुनी सरकार होने की खुशी की मुस्कान बिखेर दी है.


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पिछली बार के परिणामों के आधार पर इस बार दिल्ली के विधानसभा चुनावों में मुख्य मुकाबला भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच मानी जा रही है. जहाँ आम आदमी पार्टी का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं वहीं किरण बेदी भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद की दावेदार मानी जा रही है. लेकिन किसी भी भाजपाई मुख्यमंत्री की तुलना में अरविंद केजरीवाल का पलड़ा ज्यादा भारी नजर आता है. जानिए वो कौन से कारण हैं जो अरविंद केजरीवाल के पलड़े पर ज्यादा वज़न डाल रहे हैं:-



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क). सफल सरकार-

कांग्रेस के बिन माँगे समर्थन से आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्रित्व में 49 दिनों की सरकार चलाई. इस अल्पावधि में कई तरह के नये और लीक से हटकर लिए गए उनके फैसलों ने जनता के बीच उनकी साख को मज़बूत करने का काम किया. फिर चाहे वो बिजली के बिल आधे करना हो या रैन बसेरों का बनाने का आदेश!



ख). भ्रष्टाचार और जनता के बीच अरविंद बने वॉल-

‘आप’ की सरकार के सत्ता में रहने के दौरान एक इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, दो हवलदारों और अन्य कई अधिकारियों पर रिश्वत लेने ये लेने का प्रयास करने का मामला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सामने आया. यातायात पुलिसवालों की मनमानियों पर अंकुश लगी और रेहड़ी लगाने वालों से अवैध वसूली में काफी कमी आई. इस प्रकार अरविंद भ्रष्टाचार और जनता के बीच वॉल बन गए.



ग). पानी की दरों में कमी-

हर माह मीटर युक्त घरों को 667 लीटर मुफ्त पानी देने की उनकी घोषणा ने भी आम लोगों को राहत दी. इसके साथ ही लोगों में अपने-अपने घरों में मीटर लगाने की होड़ भी लगनी शुरू हुई. दिल्ली की जनता के ज़ेहन से ये अभी उतरा भी नहीं होगा.



घ). बिजली-पानी सत्याग्रह-

सरकार बनाने से पहले अरविंद केजरीवाल और इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने दिल्ली में ‘बिजली-पानी सत्याग्रह’ की शुरूआत की और दिल्लीवासियों से यह आग्रह किया कि जब तक बढ़ी हुई दरों को वापस न ले लिया जाए तब तक बिजली पानी के शुल्क का भुगतान नहीं करें.


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ड). ईमानदार केजरीवाल-

अधिक दिनों तक सत्ता में न रहने के बावजूद जनता के बीच केजरीवाल की छवि ईमानदार नेता के रूप में बनी हुई है. उनकी ईमानदारी पर कई चुटकुले भी बने. ऐसे ही एक चुटकुले की मानें तो केजरीवाल ने शादी के समय अपने साले द्वारा उनका जूता छुपा दिया जाने पर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया था.



च). निर्भय-

केजरीवाल पर स्याही फेंकने और चाँटा मारे जाने का मामला भी खूब सुर्खियों में था. लेकिन केजरीवाल ने इन सबके बावजूद अपना काम ईमानदारी और मेहनत से जारी रखा. ऐसी ओछी हरकतों से डरकर उन्होंने अपने पाँव पीछे नहीं खींचें.


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छ). लक्ष्य ख़ास तरीका आम-

अन्य नेताओं के विपरीत केजरीवाल ने रैलियों और अन्य कई अभियानों में ऑटो से यात्राएँ की. सामान्यतया किसी और पार्टी का नेता ऑटो से यात्राएँ करते नहीं देखा जाता. सरकार बनाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने जनता के बीच रामलीला मैदान में स्वयं और अपने मंत्रियों को शपथ दिलाई. इसलिए दिल्ली जैसे क्षेत्र में कई पुरानी परंपराएँ टूटी. इससे एक और फायदा यह हुआ कि जनता और मुख्यमंत्री के बीच कई वर्षों से बढ़ रही संवाद की खाई को पाटे जाने की स्थिति आने लगी. Next….


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