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प्रणब मुखर्जी के लिए बहन ने जो कहा वो 43 साल बाद सच हुआ, पहली बार सांसद बनने पर बहन से ​मुलाकात का रोचक किस्सा पढ़ें

Rizwan Noor Khan

31 Aug, 2020

देश के सबसे सफल वित्तमंत्री के रूप में दुनियाभर में ख्याति हासिल करने वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस दुनिया को अलविदा कह गए। जब वह पहली बार राज्यसभा सांसद बने थे तो उनसे दिल्ली मिलने आई बहन अन्नपूर्णा ने उनसे एक ऐसी बात कही थी जो 43 साल बाद सच साबित हुई।

Image courtesy : REUTERS

देश में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित
पश्चिम बंगाल की धरती पर 11 दिसंबर 1935 को जन्मे प्रणब मुखर्जी दिल्ली में 31 अगस्त 2020 को अंतिम सांस ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 84 साल के थे और कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन से भारतीय राजनीति ने अपने एक दिग्गज स्तंभ और जनता ने अपने प्यारे नेता को खो दिया है। केंद्र सरकार ने देश में 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक ​घोषित किया है।

पहली बार सांसद बने तो बहन मिलने आईं
प्रणब मुखर्जी 1969 में कांग्रेस की टिकट राज्यसभा सांसद चुने गए। जब वह पहली बार सांसद बने तो उनकी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी पैतृक निवास बीरभूम से दिल्ली उनसे मिलने आईं थीं। अन्नपूर्णा ने 2012 में आईएनएस को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि प्रणब मुखर्जी को सांसद बनने के बाद साउथ एवेन्यू में आवास दिया गया था। यहां से राष्ट्रपति भवन का अस्तबल और घोड़े दिखाई देते थे। वहां घोड़ों की खूब खातिरदारी होती थी।

राष्ट्रपति के घोड़ों के रौब से प्रभावित थे प्रणब दा
आवास के गार्डन में बैठे प्रणब मुखर्जी और उनकी बहन अन्नपूर्णा पुरानी और भविष्य की बातें साझा कर रहे थे। बातचीत का सिलसिला चल रहा था कि प्रणब दा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें राष्ट्रपति के घोड़े बहुत पसंद हैं। उनकी क्या रौबदार तरीके से देखभाल की जाती है, पूरे ठाठबाट तो इन घोड़ों के हैं। उन्होंने कहा कि काश वह इतने शानदार घोड़ों के रूप में अगला जन्म लें। उनकी यह बात सुनकर बहन अन्नपूर्णा ने कहा कि राष्ट्रपति का घोड़ा क्यों तुम इसी जन्म में राष्ट्रपति बनोगे, और दोनो भाई बहन जोर जोर से हंसने लगे।

Image courtesy : PTI

बहन ने कहा राष्ट्रपति का घोड़ा नहीं राष्ट्रपति बनोगे
उस वक्त मजाक में कही गई बहन की बात के सच होने की उम्मीद प्रणब दा को कभी नहीं थी। उस बात के 43 साल बाद 2012 में प्रणब मुखर्जी सच में देश के 13वें राष्ट्रपति बन गए। उनकी बहन की बात सच हो गई। हालांकि, प्रणब मुखर्जी जब बड़े लीडर बन चुके थे और कांग्रेस में उनका कद काफी बड़ा हो गया था तो कई बार मीडिया में वह प्रधानमंत्री के संकेत दे चुके थे, लेकिन राष्ट्रपति बनने पर शायद ही उन्होंने कभी सोचा था।

अगस्त 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न प्रदान करते हुए। Image courtesy : PTI

देश का सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित
प्रणब मुखर्जी को 2019 में देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इससे पहले वह इंदिरा गांधी की सरकार में 1982 से 1984 तक वित्तमंत्री रहे तो ब्रिटेन की मशहूर बिजनेस मैग्जीन यूरोमनी ने अपने सर्वे के बाद उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ फाइनेंस मिनिस्टर का खिताब दिया। 2010 में इ​मर्जिंग मार्केट न्यूजपेपर ने अपने सर्वे में प्रणब मुखर्जी को एशिया का बेस्ट फाइनेंस मिनिस्टर बताया और प्रसिद्ध बिजनेस वेबसाइट द बैंकर ने उन्हें फाइनेंस मिनिस्टर आफ द ईयर घोषित किया।

1998 में तत्कालीन गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवानी से मुलाकात के दौरान प्रणब मुखर्जी और अन्य वरिष्ठ नेता। Image courtesy : PTI

सियासत में लंबी और सफल पारी खेली
पहली बार 1969 में राज्‍यसभा सदस्‍य बने प्रणब मुखर्जी इसके बाद लगातार 4 बार राज्यसभा सांसद रहे। वह पीवी नरसिम्‍हा राव की सरकार में फरवरी 1995 से मई 1996 तक विदेश मंत्री रहे। मनमोहन सिंह की सरकार में मई 2004 से अक्‍टूबर 2006 तक डिफेंस मिनिस्टर और दूसरी बार विदेश मंत्री बने। इंदिरा गांधी की सरकार में 1982 से 1984 तक और मनमोहन सिंह की सरकार में जनवरी 2009 से जुलाई 2012 तक वित्‍त मंत्री रहे। 25 जुलाई 2012 को देश के 13वें राष्‍ट्रपति बने।…NEXT

 

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