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प्रणब मुखर्जी के लिए आशीर्वाद बने थे बहन के शब्द, 43 साल बाद भविष्यवाणी सच साबित हुई

देश के सबसे सफल वित्तमंत्री के रूप में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याद किया जाता है। वह 2012 में यूपीए सरकार में राष्ट्रपति बने और एनडीए की सरकार में भी 2017 तक राष्ट्रपति रहे। जब वह पहली बार राज्यसभा सांसद बने थे तो उनकी बहन अन्नपूर्णा ने उनके एक दिन देश के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी की थी जो 43 साल बाद सच साबित हुई। प्रणब मुखर्जी की जयंती के मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी के प्रेरणादायक किस्से।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 11 Dec, 2020
File Photo courtesy : REUTERS

बांग्ला कांग्रेस की स्थापना के साथ राजनीति में उतरे
पश्चिम बंगाल की धरती पर 11 दिसंबर 1935 को जन्मे प्रणब मुखर्जी जीवनभर स्पष्ट और मुखर वक्ता रहे। 1967 में बांग्ला कांग्रेस के संस्थापक सदस्य रहे प्रणब मुखर्जी को 1969 में राज्यसभा के लिए चुने गए। जब वह पहली बार सांसद बने तो उनकी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी पैतृक निवास बीरभूम से दिल्ली उनसे मिलने आईं थीं। अन्नपूर्णा ने 2012 में समाचार एजेंसी आईएनएस को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि प्रणब मुखर्जी को सांसद बनने के बाद साउथ एवेन्यू में आवास दिया गया था। यहां से राष्ट्रपति भवन का अस्तबल और घोड़े दिखाई देते थे। वहां घोड़ों की खूब खातिरदारी होती थी।

राष्ट्रपति के घोड़ों के रौब से प्रभावित थे प्रणब दा
आवास के गार्डन में बैठे प्रणब मुखर्जी और उनकी बहन अन्नपूर्णा पुरानी और भविष्य की बातें साझा कर रहे थे। बातचीत का सिलसिला चल रहा था कि प्रणब दा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें राष्ट्रपति के घोड़े बहुत पसंद हैं। उनकी क्या रौबदार तरीके से देखभाल की जाती है, पूरे ठाठबाट तो इन घोड़ों के हैं। उन्होंने कहा कि काश वह इतने शानदार घोड़ों के रूप में अगला जन्म लें। उनकी यह बात सुनकर बहन अन्नपूर्णा ने कहा कि राष्ट्रपति का घोड़ा क्यों तुम इसी जन्म में राष्ट्रपति बनोगे, और दोनों भाई बहन जोर जोर से हंसने लगे।

बहन ने कहा राष्ट्रपति का घोड़ा नहीं राष्ट्रपति बनोगे
उस वक्त मजाक में कही गई बहन की बात के सच होने की उम्मीद प्रणब दा को कभी नहीं थी। उस बात के 43 साल बाद 2012 में प्रणब मुखर्जी सच में देश के 13वें राष्ट्रपति बन गए। उनकी बहन की बात सच हो गई। हालांकि, प्रणब मुखर्जी जब बड़े लीडर बन चुके थे और कांग्रेस में उनका कद काफी बड़ा हो गया था तो कई बार मीडिया में वह प्रधानमंत्री बनने की इच्छा का संकेत दे चुके थे, राष्ट्रपति बनने पर शायद ही उन्होंने कभी सोचा था।

सियासत में लंबी और सफल पारी खेली
पहली बार 1969 में राज्‍यसभा सदस्‍य बने प्रणब मुखर्जी इसके बाद लगातार 4 बार राज्यसभा सांसद रहे। वह पीवी नरसिम्‍हा राव की सरकार में फरवरी 1995 से मई 1996 तक विदेश मंत्री रहे। मनमोहन सिंह की सरकार में मई 2004 से अक्‍टूबर 2006 तक डिफेंस मिनिस्टर और दूसरी बार विदेश मंत्री बने। इंदिरा गांधी की सरकार में 1982 से 1984 तक और मनमोहन सिंह की सरकार में जनवरी 2009 से जुलाई 2012 तक वित्‍त मंत्री रहे। 25 जुलाई 2012 को देश के 13वें राष्‍ट्रपति बने।

File Photo courtesy : Pranab Mukherjee Twitter

विश्व के सर्वश्रेष्ठ वित्तमंत्री का खिताब
प्रणब मुखर्जी को 2019 में देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इससे पहले वह इंदिरा गांधी की सरकार में 1982 से 1984 तक वित्तमंत्री रहे तो ब्रिटेन की मशहूर बिजनेस मैग्जीन यूरोमनी ने अपने सर्वे के बाद उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ फाइनेंस मिनिस्टर का खिताब दिया। 2010 में इ​मर्जिंग मार्केट न्यूजपेपर ने अपने सर्वे में प्रणब मुखर्जी को एशिया का बेस्ट फाइनेंस मिनिस्टर बताया और प्रसिद्ध बिजनेस वेबसाइट द बैंकर ने उन्हें फाइनेंस मिनिस्टर आफ द ईयर घोषित किया।

कोरोनाकाल में दुनिया छोड़ गए प्रणब दा
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कोरोना की चपेट में आकर लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। बाद में उनकी तबियत बिगड़ने पर आर्मी अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया, लेकिन डॉक्टर उनकी जिंदगी नहीं बचा सके। 31 अगस्त 2020 को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 84 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।…NEXT

 

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