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मोदी बने ऐसे पहले पीएम जो बोहरा समुदाय के कार्यक्रम में हुए शामिल, जानें कौन है दाऊदी बोहरा समुदाय

Pratima Jaiswal

14 Sep, 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के इंदौर में बोहरा समुदाय के वआज (प्रवचन) में हिस्सा लिया। बोहरा समाज के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई पीएम उनके धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुआ है। बोहरा समुदाय के कार्यक्रम में अपने सम्बोधन में पीएम मोदी स्वच्छ भारत अभियान, स्किल इंडिया, रोशनी योजना जैसे अहम मुद्दों पर बातें की। ऐसे में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो इस समुदाय के बारे में ज्यादा नहीं जानते। जबकि देश की अर्थव्यवस्था में बोहरा समुदाय का भी एक अहम योगदान है। बोहरा समुदाय मुख्यत: व्यापार करने वाला समुदाय है। ‘बोहरा’ गुजराती शब्द ‘वहौराउ’, अर्थात ‘व्यापार’ का अपभ्रंश है।

 

 

कौन है दाऊदी बोहरा समुदाय
बोहरा समुदाय अपनी सफाई पसंदगी और पर्यावरण रक्षा की पहलों के लिए भी जाना जाता है। चैरिटेबल ट्रस्ट बुरहानी फाउंडेशन इंडिया 1992 से ही बर्बादी रोकने रिसाइकलिंग और प्रकृति संरक्षण के लिए काम कर रहा है। दाऊदी बोहरा समुदाय काफी समृद्ध, संभ्रांत और पढ़ा-लिखा समुदाय है।
मुस्लिमों को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है। मगर शिया और सुन्नियों के अलावा इस्लाम को मानने वाले लोग 72 फिरकों में बंटे हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं बोहरा मुस्लिम। बोहरा शिया और सुन्नी दोनों होते हैं। सुन्नी बोहरा हनफी इस्लामिक कानून को मानते हैं। वहीं दाऊदी बोहरा मान्यताओं में शियाओं के करीब होते हैं।

 

 

इन हिस्सों में सबसे ज्यादा है तादाद

दाऊदी बोहरा मुख्यत: गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, दाहोद, और महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे व नागपुर, राजस्थान के उदयपुर व भीलवाड़ा और मध्य प्रदेश के उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर, जैसे शहरों और कोलकाता व चैन्नै में बसते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन व सऊदी अरब में भी उनकी अच्छी तादाद है। मुंबई में इनका पहला आगमन करीब ढाई सौ वर्ष पहले हुआ। यहां दाऊदी बोहरों की मुख्य बसाहट मुख्यत: भेंडी बाजार, मझगांव, क्राफर्ड मार्केट, भायखला, बांद्रा, सांताक्रुज और मरोल में है। यहां तक कि भेंडी बाजार, जहां बोहरों का बोलबाला है- बोहरी मोहल्ला ही कहलाने लगा है। फोर्ट की एक सड़क भी ‘बोहरा बाजार’ के नाम से मशहूर है।

 

 

बोहरा समुदाय की महिलाएं

बोहरा समुदाय की महिलाएं काले रंग के बुर्के की जगह अक्सर गुलाबी रंग के बुर्के में दिखती हैं, इन्हें लाल, हरे या नीले रंग के बुर्के भी पहने हुए देखा जा सकता है। इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों का कहना है कि दाऊदी बोहरा महिलाओं का पारंपरिक परिधान रिदा है जो इन्हें देश के बाकी मुस्लिमों से अलग दिखाता है…Next

 

 

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