Menu
blogid : 321 postid : 1390691

दिल्ली से जुड़ा है देश की कुर्सी का 21 सालों का दिलचस्प संयोग, जानें अब तक कैसे रहे हैं आंकड़े

Pratima Jaiswal

25 Apr, 2019

2019 लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के बाद जैसे-जैसे समय बीत रहा है, नेताओं के साथ जनता को 23 मई का इंतजार है। 23 मई को चुनाव के फैसले के बाद भी साबित हो पाएगा कि किस पार्टी की रणनीति ने जनता का वोट जीता। बहरहाल, बात करें दिल्ली की, तो बीजेपी समेत कांग्रेस और आप ने भी सातों सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली का दिल कौन-सी पार्टी जीतेगी।  राजधानी दिल्ली में भले ही लोकसभा की सिर्फ 7 सीटें हैं लेकिन देश की कुर्सी के साथ इन 7 सीटों का अजब सा संयोग जुड़ा हुआ है। पिछले 21 साल का चुनावी इतिहास ये बताता है कि इन 7 सीटों के दंगल में जिसने भी दिल्ली फतेह की है, केंद्र में सरकार उसी की बनी है। दिल्ली की सभी सातों सीटों पर एक साथ 12 मई को छठे चरण में वोट डाले जाएंगे।

 

 

त्रिकोणीय है मुकाबला
दिल्ली में आम तौर पर मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होता रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय है। राजधानी में लोकसभा की 7 सीटें ये हैं- नई दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, चांदनी चौक और दक्षिण दिल्ली। 2014 में इन सातों सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई थी। बीजेपी को 46.4% वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस को 15.1 और आम आदमी पार्टी को 32.9% वोट मिले।

 

अब तक क्या रहे हैं आंकड़े
1951 में जब देश में पहला चुनाव हुआ तो दिल्ली में लोकसभा की 4 सीटें थीं। 1967 में सीटें 7 हो गईं। लेकिन दिल्ली की सियासत में असली टर्निंग प्वाइंट 21 साल पहले 1998 में आया जब 7 में से 6 सीटें बीजेपी ने जीती। केवल एक सीट कांग्रेस के खाते में गई। दिल्ली का रण जीती बीजेपी की केंद्र में भी सरकार बनी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। 1999 में फिर से देश में चुनाव हुए। 13वीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में फिर बीजेपी ने सभी सातों सीटें जीत लीं। केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की फिर सरकार बनी। इसके बाद 2004 के चुनाव में कांग्रेस 6 सीट जीतने में कामयाब रही और बीजेपी के खाते में सिर्फ एक सीट आई। केंद्र की कुर्सी पर भी बदलाव हुआ। अटल सरकार की जगह केंद्र में डॉ। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार बनी। 2009 के चुनाव में दोबारा कांग्रेस को सफलता हाथ लगी और सभी 7 सीटें जीतने में वह कामयाब रही। इसी के साथ केंद्र में भी यूपीए-2 सरकार बनी। लेकिन 2014 में दिल्ली के मतदाताओं ने अपना जनाधार बदला और सभी सातों सीटें बीजेपी की झोली में डाल दिए।
अब देखना यह है कि लोकसभा चुनाव 2019 में यह समीकरण कितना बदलते हैं।…Next

 

Read More :

कौन हैं टॉम वडक्कन जो कांग्रेस छोड़ भाजपा में हुए शामिल, कभी कांग्रेस ज्वाइन करने के लिए छोड़ी थी नौकरी

जेल में कैदियों को भगवत गीता पढ़कर सुनाते थे जॉर्ज फर्नांडीस, मजदूर यूनियन और टैक्सी ड्राइवर्स के थे पोस्टर बॉय

जिन चंदन की लकड़ियों को महात्मा गांधी की चिता के लिए लाए थे अंग्रेज, उनसे ही किया गया था कस्तूरबा गांधी का अंतिम संस्कार

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *