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लोकसभा चुनाव 2014 – क्या राहुल और मोदी के बीच होगा मुकाबला ?

अपने विवादास्पद बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाले केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं. जहां एक ओर बढ़ती महंगाई ने आम जनता की नींद तक उड़ा दी है वहीं बेनी प्रसाद वर्मा का कहना है कि वह दिनोंदिन बढ़ती महंगाई से बेहद खुश हैं. अपने इस बयान को आधार देने के लिए उन्होंने अपनी समझ के अनुसार विभिन्न तर्क भी दिए हैं लेकिन वह जनता के घावों पर मरहम नहीं बल्कि नमक ही सबित हुए हैं. अब आम जनता के दर्द को देखकर बेनी प्रसाद वर्मा को कौन सी खुशी मिल रही है यह तो वह स्वयं ही जानें लेकिन बेनी प्रसाद वर्मा जी के बयानों का सिलसिला यहीं नहीं थमा. उन्होंने अपने साक्षात्कार में एक ऐसा वक्तव्य दे डाला जिसने पिछले काफी समय से चली आ रहे कयासों को और गर्मा दिया है.


rahul and modiवर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होने वाले हैं और बेनी प्रसाद वर्मा ने यह भविष्यवाणी की है कि आगामी लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी ही एक दूसरे को टक्कर देंगे. बेनी प्रसाद वर्मा का कहना है कि यदि 2014 के चुनावों में राहुल गांधी कांग्रेस के उम्मीदवार हुए तो प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच ही मुकाबला होगा.


नाचाहते हुए भी राजनीति में क्यों आए थे राजीव गांधी ?


बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस पार्टी में बेहद अहमियत रखते हैं. उनके इस बयान को उनका व्यक्तिगत बयान समझकर नजरअंदाज तो नहीं किया जा सकता. तो क्या अगले लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी जैसे युवा, जिन्हें अभी राजनीति का कुछ खास अनुभव भी प्राप्त नहीं है और राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी नरेंद्र मोदी आमने-सामने होंगे?


लेकिन यहां एक बात गौर करने वाली है कि गांधी परिवार से संबंद्ध होने के कारण राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवारी पर तो कोई सवाल नहीं उठता लेकिन क्या व्यक्तिगत तौर पर सशक्त नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी अपना प्रतिनिधि बनाएगी?


नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें भले ही पार्टी की ओर से सर्वसम्मति के साथ प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार ना बनाया जाए लेकिन व्यक्तिगत तौर पर वह एक सशक्त और पूरी तरह सक्षम राजनेता हैं. कई बार विवादों से घिरने और उबरने वाले नरेंद्र मोदी पर तानाशाही करने जैसे आरोप भी लगे हैं. लेकिन हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते कि जब से उन्होंने गुजरात की बागडोर संभाली है तब से गुजरात दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है. शाइनिंग गुजरात के कर्ता-धर्ता नरेंद्र मोदी एक अनुभवी और परिपक्व नेता सिद्ध हुए हैं.


वहीं दूसरी ओर कथित तौर पर उन्हें टक्कर देने वाले राहुल गांधी परिपक्वता और अनुभव से कोसों दूर हैं. यह एक निश्चित सत्य है कि अगर राहुल गांधी कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनते हैं तो उन्हें सर्वसम्मति के साथ मैदान में उतारा जाएगा. लेकिन ‘गांधी’ सरनेम को अपनी ताकत समझने वाले राहुल अभी भी जमीनी हकीकतों से पूरी तरह अनजान हैं. गरीब और दलित लोगों के घर खाना खाने का चुनावी पैंतरा भी हर बार असफल ही साबित होता नजर आया है. कांग्रेस की घटती साख और निरंतर बढ़ते विवादों को देखते हुए राहुल गांधी की सशक्त उम्मीदवारी पर अभी भी प्रश्न चिह्न ही लगा हुआ है.


पराधीनता के ताबूत में आखिरी कील


लेकिन यह भी सच है कि जहां एक ओर नरेंद्र मोदी का तानाशाही स्वभाव उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है वहीं पार्टी के भीतर उनके राजनैतिक प्रतिद्वंदियों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है जबकि युवाओं के भीतर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी का क्रेज बढ़ता जा रहा है.


वर्तमान हालातों को देखते हुए किसी भी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता क्योंकि राजनीति का यह ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो समय ही बताएगा.


अधर में पाकिस्तानी हिंदुओं की तकदीर


Please post your comment  – क्या आपको लगता है अनुभव विहीन राहुल गांधी, राजनीति में मंझे हुए खिलाड़ी नरेंद्र मोदी को एक स्वस्थ चुनौती दे पाने में सक्षम हैं या फिर अपने चार्म और सरनेम के सहारे ही वह देश का प्रधानमंत्री बनने के सपने सजा रहे हैं?



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