Menu
blogid : 321 postid : 1385480

गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव पर सभी की निगाहें, दो दशक से ऐसा रहा इन सीटों का हाल

देश में चु‍नावी सरगर्मियां तेज हैं। एक ओर जहां पूर्वोत्‍तर के तीन राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं दूसरी ओर उत्‍तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की भी घोषणा हो चुकी है। गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों के लिए 11 मार्च को वोटिंग होगी और नतीजे 14 मार्च को आएंगे। गोरखपुर सीट से योगी आदित्यनाथ और फूलपुर सीट से केशव प्रसाद मौर्य सांसद थे। योगी के यूपी का सीएम और केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद ये दोनों सीटें खाली हो गईं थीं। ये दोनों लोकसभा सीटें हाईप्रोफाइल हैं। इन पर जीत दर्ज कर भाजपा अपनी लोकप्रियता बरकरार रहने का संदेश देना चाहेगी, तो विरोधी खेमा भाजपा को हराकर इसके उलट संदेश देने की जुगत में है। सीएम और डिप्‍टी सीएम की सीट होने के कारण यहां के चुनाव परिणाम पर सियासी गलियारों की नजर बनी हुई है। आइये आपको बताते हैं पिछले दो दशक से क्‍या रहा है इन दोनों सीटों का गणित।


cover



फूलपुर सीट का इतिहास बेहद खास

फूलपुर में 2014 में बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की थी, वहीं गोरखपुर में 1991 के बाद से बीजेपी का परचम लहराता रहा है। फूलपुर सीट का इतिहास अपने आप में बेहद खास है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू समेत कई बड़े दिग्गजों ने इस सीट का नेतृत्व किया है। वहीं, बीजेपी-बीएसपी के लिए भी ये सीट अहमियत रखती है। साल 1952,1957 और 1962 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस सीट का प्रतिनिधित्‍व किया था। 1962 में नेहरू को टक्कर देने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया उतरे, लेकिन करीब 55 हजार वोटों से हार गए।

gorakhpur


1996 से 2014 तक तीन पार्टियों के पास रही फूलपुर सीट

पिछले 5 लोकसभा चुनाव की बात करें, तो साल 2014 में बीजेपी को जहां 52 % वोट मिले। वहीं, कांग्रेस, बीएसपी, एसपी के कुल वोटों की संख्या महज 43 % ही रह गई। 2014 लोकसभा चुनाव की मोदी ‘लहर’ से पहले बीजेपी एक बार भी ये सीट जीत नहीं सकी। 2014 में केशव प्रसाद मौर्य ने 5 लाख से भी ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। अटकलें यह भी लगाई जा रही थीं कि इस सीट से बसपा अध्यक्ष मायावती चुनाव लड़ सकती हैं। ये वही सीट है जहां से सन् 1996 के लोकसभा चुनावों में बसपा के संस्थापक कांशीराम चुनाव हार गए थे। कांशीराम को समाजवादी पार्टी उम्मीदवार जंग बहादुर पटेल ने 16 हजार वोटों से हराया था। बसपा ने इस सीट पर अपना खाता 2009 के चुनाव में खोला, जब कपिल मुनि करवरिया ने 30 फीसदी वोट हासिल किए थे। इससे पहले 1996, 98, 99 और 2004 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्‍जा था।


2018_2$largeimg09_Friday_2018_144612281


29 साल से गोरखपुर सीट पर गोरक्षपीठ का दबदबा

पिछले 29 साल से गोरखपुर सीट पर लगातार गोरक्षपीठ का दबदबा रहा है। साल 1989 में पीठ के महंत अवैद्यनाथ ने हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़ा और 10 फीसदी वोट शेयर के अंतर से जनता दल के उम्मीदवार रामपाल सिंह को मात दी थी। 1991 और 1996 के चुनाव में महंत अवैद्यनाथ ने भाजपा के टिकट से जीत हासिल की। इसके बाद 1998 से लगातार 2 दशक तक यानी अभी तक इस सीट पर भाजपा के टिकट पर योगी आदित्यनाथ काबिज हैं। पिछले 5 लोकसभा चुनाव परिणाम पर नजर डाले, तो 1998, 1999 में इस सीट पर भाजपा को समाजवादी पार्टी से टक्कर मिलती दिखी थी। मगर 2004 के बाद से भाजपा ने यहां एकतरफा जीत हासिल की है।…Next


Read More:

चुनाव प्रचार के लिए बढ़ी सीएम योगी की डिमांड, जानें क्‍या है वजह

केजरीवाल के मोबाइल पर आई वो एक कॉल, जिसने बना दिया उन्‍हें मुख्‍यमंत्री

मेघालय में इटली, अर्जेन्टीना और स्वीडन चुनेंगे विधायक! जानें क्‍यों होगा ऐसा

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *