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Kupahalli Sitaramaiya Sudarshan – पूर्व सर संघचालक कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन

sitaramiya sudarshanकुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन का जीवन परिचय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक दल के पूर्व सर संघचालक कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन का जन्म 18 जून, 1931 को रायपुर, छतीसगढ़ के एक कन्नड़ हिंदू परिवार में हुआ था. नौ वर्ष की आयु में ही सुदर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन में शामिल हो गए थे. इस दल के सक्रिय और पूर्णकालिक नेता ही प्रचारक के पद को ग्रहण कर सकते हैं. सीतारमैया सुदर्शन 1954 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक दल के प्रचारक बनाए गए. वे प्रचारक के तौर पर सबसे पहले रायगढ़ जिले में नियुक्त हुए. वर्ष 1964 में कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन मध्य-प्रदेश के प्रांत प्रचारक बने. इस पद को प्राप्त करने के बाद दल के भीतर सुदर्शन का कद बढ़ता गया. 1969 में सीतारमैया सुदर्शन अखिल भारतीय संगठन के प्रभारी नियुक्त हुए. 1979 में सीतारमैया सुदर्शन ने आरएसएस के दो मुख्य दलों (बौद्धिक सेल, शारीरिक सेल) में से बौद्धिक सेल के मुखिया का पद ग्रहण कर लिया. वर्ष 1990 में कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन आरएसएस के सहसचिव नियुक्त हुए. वर्ष 2000 में वह सर संघचालक बने. उनका यह कार्यकाल 2009 में समाप्त हुआ.


कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन की विशिष्टताएं

  • कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन को विभिन्न आयोजनों में आरएसएस के दोनों दलों (बौद्धिक सेल और शारीरिक सेल) की अध्यक्षता करने की विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त है.
  • अपनी मातृ भाषा कन्नड़ के अलावा कुपाहल्ली सीतारमैया को अन्य भाषाओं जैसे हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, छत्तीसगढ़ी और उत्तरपूर्वी राज्यों समेत बंगाल में बोली जाने वाली भाषाओं का भी ज्ञान है.

वर्ष 2008 में हैदराबाद स्थित हिंदू स्वयंसेवक संघ जो आरएसएस का अंतरराष्ट्रीय विभाग है, के सदस्यों के लिए विश्व संघ शिक्षा वर्ग शिविर लगाया गया जिसमें सीतारमैया सुदर्शन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस दौरान उन्होंने अपने जूते लंदन से आए एक स्वयंसेवक को दान कर दिए थे. वरुण भनोट नाम के युवक ने उनके जूते उनका आशीर्वाद समझ कर ग्रहण किया. कुपाहल्ली स्वभाव से बेहद विनम्र हैं. मध्य-भारत प्रांत के प्रचारक बनने और अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन करने के लिए वह पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों और तत्कालीन सर संघचालक गुरू गोलवलकर को ही श्रेय देते थे.


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