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पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी

somnath chatterjeeसोमनाथ चटर्जी का जीवन परिचय

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई, 1929 को तेजपुर असम के एक कुलीन बंगाली परिवार में हुआ था. सोमनाथ चटर्जी के पिता निर्मल चंद चटर्जी अपने समय के प्रतिष्ठित वकील और बौद्धिक माने जाते थे. सोमनाथ चटर्जी ने अपनी अधिकांश शिक्षा कोलकाता में ही संपन्न की. उन्होंने मित्रा एजुकेशन स्कूल, प्रेसिडेंसी कॉलेज और फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. सोमनाथ चटर्जी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय के जीसस कॉलेज में भी दाखिला लिया. उन्होंने वर्ष 1952 में लॉ विषय में स्नातक और वर्ष 1957 में स्नातकोत्तर की उपाधि ग्रहण की. वर्ष 2007 में जीसस कॉलेज द्वारा सोमनाथ चटर्जी को फेलोशिप प्रदान की गई. सोमनाथ चटर्जी को लंदन स्थित मिडल टेम्पल बार में भी शामिल किया गया. राजनीति में आने से पहले सोमनाथ चटर्जी ने काफी समय तक कोलकाता उच्च न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस की.


सोमनाथ चटर्जी का राजनैतिक सफर

सोमनाथ चटर्जी के पिता निर्मल चंद चटर्जी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थापकों में से एक थे और बाद में अध्यक्ष रहे थे. लेकिन कुछ ही समय में उनका हिंदू राष्ट्रवादियों से मन मुटाव हो गया. 1948 में जब कम्यूनिस्ट पार्टी को प्रतिबंधित कर इसके नेताओं को जेल में डाला गया तब उन्हें आजाद कराने के लिए निर्मल चंद चटर्जी ने ऑल इंडिया सिविल लिबर्टीज यूनियन नामक एक दल की शुरूआत की. इसी दौरान वह ज्योति बसु के भी नजदीक आ गए. सीपीआई(एम) के समर्थन से संसद में चुने जाने के बाद निर्मल चंद चटर्जी ने हिंदू महासभा से त्याग पत्र दे दिया. उन्होंने कीपिंग द फेथ: मेमोरीज ऑफ अ पार्लियामेंटेरियन के नाम से अपनी आत्मकथा भी लिखी थी. सोमनाथ चटर्जी ने 1968 में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. वर्ष 1971 में पिता के निधन हो जाने के कारण सोमनाथ चटर्जी को अंतरिम चुनावों के लिए पिता के निर्वाचन क्षेत्र से नामित किया गया. सीपीआई(एम) के समर्थन से वर्ष 1971 में वह पहली बार स्वतंत्र प्रभारी के रूप में लोकसभा पहुंचे. वह नौ लोकसभा चुनावों में विजयी रहे. वर्ष 1984 में वह जादवपुर निर्वाचन क्षेत्र से ममता बनर्जी से पराजित भी हुए. 1989-2004 तक वह लोकसभा में अपनी पार्टी के नेता भी रहे. चौदहवें लोकसभा चुनावों में दसवीं बार सोमनाथ चटर्जी बोलपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनावों में विजयी रहे. इस जीत के साथ ही वह लोकसभा के अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए.


सीपीआई (एम) से निष्कासन

वर्ष 2008 में जब पार्टी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था, तब पार्टी के सभी सदस्यों को अपना पद छोड़ने और अविश्वास प्रस्ताव में सरकार के विरोध में मत डालना था, लेकिन सोमनाथ चटर्जी ने ऐसा करने से मना कर दिया था. उनका कहना था कि कांग्रेस के खिलाफ वोट डालने का मतलब है बीजेपी की विचारधारा पर चलना. उन्होंने अपना स्पीकर पद छोड़ने से मना कर दिया. पार्टी के आदर्शों का उल्लंघन करने के कारण सोमनाथ चटर्जी को निष्कासित कर दिया गया.

इस निष्कासन ने सोमनाथ चटर्जी को अत्याधिक आहत किया. उनका कहना था कि भविष्य में जो भी लोकसभा का अध्यक्ष बने उसे सबसे पहले अपनी पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि वह अपनी इच्छानुसार कार्य कर सके.


सोमनाथ चटर्जी से जुड़े विवाद


  • झारखंड विधानसभा में हुए विश्वास प्रस्ताव से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर टिप्पणी करने के कारण वर्ष 2005 में सोमनाथ चटर्जी विवादों से घिर गए थे. बीजेपी, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर राजी थी, ने उनके इस कदम का भरपूर विरोध किया.
  • शांतिनिकेतन श्रीनिकेतम डेवलपमेंट अथारिटी में लाभ का पद प्राप्त होने के कारण विपक्षी दलों ने सोमनाथ चटर्जी को अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की. सोमनाथ चटर्जी ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया.

राजकोषीय अखंडता पर कायम सोमनाथ चटर्जी जब कभी अपने परिवार के किसी सदस्य को अपने साथ विदेश दौरे पर लेकर जाते थे, तो उसका खर्च वह खुद वहन करते थे. इसके अलावा स्पीकर बनने के बाद उन्होंने किसी अतिरिक्त सुविधा को भी स्वीकार नहीं किया. वर्ष 1996 में सोमनाथ चटर्जी को उत्कृष्ट सांसद का सम्मान भी प्रदान किया गया था.


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