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First Loksabha Speaker Ganesh Vasudev Mavalankar – गणेश वासुदेव मावलंकर

g.v mavalankarगणेश वासुदेव मावलंकर का जीवन-परिचय

भारतीय लोकसभा के पहले स्पीकर गणेश वासुदेव मावलंकर का जन्म 27 नवंबर, 1888 को बड़ौदा, गुजरात में हुआ था. मराठी परिवार से संबंध रखने वाले जी.वी. मावलंकर का अधिकांश जीवन गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में गुजरा. इनका परिवार ब्रिटिश राज के अंतर्गत रत्नागिरी जिले में रहता था. राजागिरी और बॉम्बे प्रेसिडेंसी के अन्य छोटे-छोटे प्रांतों से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए जी.वी. मावलंकर वर्ष 1902 में अहमदाबाद स्थानांतरित हो गए थे. 1908 में गुजरात कॉलेज, अहमदाबाद से उन्होंने विज्ञान विषय के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की. गवर्मेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से कानून की पढ़ाई शुरू करने से पहले 1909 में एक वर्ष के लिए वह गुजरात कॉलेज के दक्षिण फेलो भी रहे. 1912 में प्रथम स्थान के साथ कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1913 में कानूनी पेशे में प्रदार्पण किया. जल्द ही वे सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी के संपर्क में आ गए. वर्ष 1913 में जी.वी. मावलंकर गुजरात एजुकेशन सोसाइटी के सचिव और 1916 में गुजरात सभा के सचिव नियुक्त हुए. गणेश वासुदेव मावलंकर एक लंबे समय तक (1919-22, 1925–28, 1930–33 और 1934-37) नगर निगम के सदस्य भी रहे.


गणेश वासुदेव मावलंकर का राजनैतिक सफर

असहयोग आंदोलन में भाग लेने के साथ गणेश वासुदेव मावलंकर ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरूआत की. 1921-1922 में वह गुजरात प्रांतीय कांग्रेस समिति के सचिव बने. यद्यपि गणेश वासुदेव ने अस्थायी तौर पर स्वराज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी, लेकिन वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह में शामिल होने के लिए वह गांधी जी की शरण में आ गए. 1934 में बंबई प्रांतीय विधानसभा में चयनित होने के बाद जी.वी. वासुदेव 1937 में इसके स्पीकर बनाए गए. इस पद पर वह 1946 तक रहे. वर्ष 1946 में वह केन्द्रीय विधानसभा के लिए चयनित हुए. वर्ष 1947 के 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि तक वह इस पद पर रहे. जब भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित होने के बाद केन्द्रीय विधानसभा और राज्य समितियों के अधिकारों को समाप्त कर भारतीय संविधान सभा को सशक्त किया गया तब जी.वी. मावलंकर को अपना पद छोड़ना पड़ा.


स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद 20 अगस्त, 1947 को संविधान सभा की विधायी भूमिका से अलग एक अन्य समिति बनाने की आवश्यकता से संबंधित जानकारी देने के लिए एक समिति का निर्माण किया गया. गणेश वासुदेव मावलंकर इसके अध्यक्ष बनाए गए. इनकी रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद संविधान सभा की विधायी भूमिका को मुख्य सभा से अलग कर स्पीकर को नियुक्त करने का निर्णय लिया गया जो विधायी संस्था की अध्यक्षता करेगा. 17 नवंबर, 1947 को मावलंकर इसके अध्यक्ष चुने गए. 26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान को स्वीकार करने के बाद संविधान सभा की नामपद्वति को बदलकर अंत:कालीन संसद रखा गया और मावलंकर इसके स्पीकर नियुक्त हुए. 1952 में जब लोकसभा का गठन किया गया तब पहले आम-चुनावों में जीतने के बाद गणेश वासुदेव मावलंकर लोकसभा स्पीकर नियुक्त हुए.


गणेश वासुदेव मावलंकर का निधन

जनवरी 1956 में गणेश वासुदेव मावलंकर के हृदय ने काम करना बंद कर दिया था. 27 फरवरी, 1956, अहमदाबाद में हृदय गति रुक जाने के कारण उनका निधन हो गया.


गणेश वासुदेव मावलंकर की लेखनशैली भी बहुद प्रभावी थी. 1942-1944 में जेल यात्रा के दौरान मिले कैदियों की वास्तविक परिस्थितियों पर गुजराती भाषा में लिखी गई उनकी पुस्तक मानवतन झरन बेहद लोकप्रिय रही. बाद में इस पुस्तक को अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवादित किया गया. उनकी संस्मरण नामक एक अन्य किताब भी है जो गांधी जी के साथ उनके वृतांतों पर आधारित है. उन्होंने माई लाइफ के नाम से अपने वकालत के दिनों से जुड़ी घटनाओं को भी संकलित किया है.

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