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फिल्मी कॅरियर को अलविदा कहकर राजनीति में उतरी थीं जया प्रदा, आजम खान के साथ दुश्मनी की आज भी होती है चर्चा

Pratima Jaiswal

3 Apr, 2019

राजनीति में कब आपका दोस्त दुश्मन बन जाए या जिसके साथ खड़े हुए हैं उसके साथ ही लड़ना पड़ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में राजनीति की गलियारों से होते हुए कई किस्से अखबारों की सुर्खियां बन जाते हैं। इसके बाद यह खबरें सोशल मीडिया पर भी पहुंचने लगती है।
अभिनेत्री से नेता बनी जया प्रदा भी इन दिनों सुर्खियों में है। लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले बीजेपी में शामिल होने पर जया की राजनीतिक पारी एक बार फिर से शुरू हो गई है। पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। आज जया का जन्मदिन है ऐसे में जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।

 

 

उभरता हुआ कॅरियर और श्रीदेवी बनीं प्रतिद्वंदी
तेलुगू सिनेमा में जया प्रदा ने अपने करियर की शुरुआत 1975-76 के आसपास की। साल 1979 में के। विश्वनाथ के निर्देशन में बनी फ़िल्म सरगम से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली। ये फ़िल्म काफ़ी हिट रही लेकिन इसने उनके करियर को कोई फायदा नहीं दिया। उनके बॉलीवुड करियर के लिए सबसे बड़ा साल रहा 1984। इस साल जितेंद्र और श्रीदेवी के साथ उनकी फ़िल्म ‘तोहफ़ा’ आई। इस फ़िल्म में उनकी को-स्टार रहीं श्रीदेवी आगे चल कर उनकी बड़ी प्रतिद्वंदी बनीं। जया प्रदा का बॉलीवुड कॅरियर चार साल का ही रहा। साल 1984 से लेकर 1988 तक वे बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार रहीं। 1984 में उनकी अमिताभ बच्चन के साथ एक फ़िल्म आई ‘शराबी’। शराबी ने जया प्रदा के बॉलीवुड के करियर को ऊपर उठाने का काम किया। वो बड़े स्टार्स के साथ काम करती थीं। उन्होंने अमिताभ बच्चन, जितेंद्र जैसे उस वक़्त के स्टार्स के साथ काम किया। लेकिन साल 1988 से उनके फ़िल्मी करियर का ढलान शुरू हुआ। 1990 में आज का अर्जुन फ़िल्म उनके करियर की आखिरी मुख्य भूमिका वाली फिल्म रही।

 

 

राजनीति में एंट्री लेने का फैसला
1994 में वो एनटी रामा राव (एनटीआर) के बुलावे पर आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी में शामिल हुईं। एनटीआर और जया प्रदा ने कई तेलुगू फ़िल्मों में एक साथ काम किया था और यही वजह रही कि उन्होंने ये प्रस्ताव स्वीकार भी किया, लेकिन राजनीतिक महत्वकांक्षाओं ने जया प्रदा को दक्षिण की राजनीति से उत्तर भारत की राजनीति का रास्ता दिखाया। जयाप्रदा कई इंटरव्यू में यह कह चुकी है कि टीडीपी में चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें साइड लाइन किया। हालांकि ये भी सच है कि जब टीडीपी की कमान के लिए चंद्रबाबू नायडू ने विद्रोह किया था तो जयाप्रदा उनके साथ खड़ी रहीं।
साल 2004 में जया प्रदा सपा में शामिल हो गईं और रामपुर से उन्होंने सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उनके आज के प्रतिद्वंदी और सपा के दिग्गज नेता आज़म खान ने साथ दिया। जया प्रदा साल 2004 से लेकर 2014 तक सपा के टिकट पर रामपुर से सांसद रहीं।

 

 

तनावभरी शादी और विवाद
साल 1986 में जया प्रदा ने फिल्म निर्माता श्रीकांत नहाटा से शादी की। शादी से पहले जया प्रदा और श्रीकांत नहाटा के रिश्तों की मीडिया में खूब चर्चा होती थी। उस वक़्त की कई मैगज़ीन में इन दोनों के अफ़ेयर की खबरें छपती थीं। जयाप्रदा इस तरह की खबरों का खंडन ये कहकर करती थीं कि श्रीकांत और वे अच्छे दोस्त थे। हालांकि, उनकी शादी की तस्वीरें सामने आईं और उन्होंने शादी की बात मानी। श्रीकांत शादीशुदा थे इस वजह से जया को पत्नी का दर्जा नहीं मिल पाया और आगे जाकर दोनों अलग हो गए। जया ने अपनी बहन का बच्चा गोद ले लिया और उसके साथ रहने लगी।

 

 

अमर सिंह से दोस्ती और आजम खान से दुश्मनी का दौर
जयाप्रदा ने उत्तर भारत में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही अमर सिंह का साथ बनाए रखा। अमर सिंह जहां जिस दल के साथ जुड़े जयाप्रदा भी वहीं गईं। सपा में जयाप्रदा को लाने का श्रेय भी अमर सिंह को ही दिया जाता है। साल 2010 में जब समाजवादी पार्टी ने अमर सिंह और जयाप्रदा को पार्टी से निकाला तो अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोक मंच बनाया। जयाप्रदा इसका अहम हिस्सा रहीं। जब अमर सिंह आरएलडी पार्टी में शामिल हुए तो जयाप्रदा ने भी आरएलडी जॉइन कर लिया और 2014 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर से उम्मीदवारी पेश की। हालांकि, वो इस सीट से जीत नहीं पाईं।

 

 

आजम खान की निचली हरकतों से आहत हुई जया
मई, 2009 में जयाप्रदा ने सपा नेता और विधायक आज़म खान पर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप लगाया था। उस वक्त उन्होंने एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा था, ”वो मेरे बड़े भाई जैसे हैं लेकिन वह मेरे ख़िलाफ़ सस्ते प्रचार अभियान में शामिल होकर मेरी छवि खराब कर रहे हैं वो मेरी मार्फ़्ड तस्वीरें वायरल कर रहे हैं। जयाप्रदा ने ये भी कहा था कि आज़म खान और उनके समर्थकों ने मेरे कुछ पोस्टर और एक सीडी जारी की है। लोकसभा चुनाव 2019 में उनकी दावेदारी सपा के उम्मीदवार आज़म खान के खिलाफ है। एक वक्त वो भी था जब आजम खान उनके लिए रामपुर की जनता से वोट मांगा करते थे, लेकिन अब दोनों एक दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आएंगे।….Next

 

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