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फैंस की डिमांड पर बाउंड्री लगाने वाला भारतीय क्रिकेटर, पीएम के समर्थन पर भी चुनाव नहीं जीत सका

क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने वाले मंसूर अली खान पटौदी राजनीतिक पारी सफल नहीं रही। वह दो बार चुनाव में हार गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने उनके समर्थन में रैली भी की लेकिन फिर भी उन्हें जीत नसीब नहीं हुई। क्रिकेट में मंसूर अली खान फैंस की डिमांड पर बाउंड्री लगाने के लिए मशहूर रहे। उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके जीवन के रोचक किस्से।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 22 Sep, 2020


भोपाल के नवाबी खानदान में पैदा हुए मंसूर
क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचाने वाले मंसूर अली खान पटौदी का जन्‍म 5 जनवरी 1941 को भोपाल के नवाबी खानदान में हुआ था। चांदी का चम्‍मच लेकर पैदा होने की कहावत मंसूर अली खान पर सटीक बैठती है। तमाम सुख सुविधाओं से लैस और आलीशान जिंदगी के हकदार मंसूर अली खान बेहद प्रतिभाशाली और महत्‍वाकांक्षी थे। देहरादून और इंग्‍लैंड से शिक्षा हासिल करने के बाद जब वह इंग्‍लैंड से भारत लौटे तो अपने साथ क्रिकेट का जुनून लेकर आए। इस दौरान उन्‍हें पटौदी स्‍टेट का नवाब बना दिया गया।

फैंस की डिमांड पर लगाते थे बाउंड्री
आजादी के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्‍सा बने मंसूर अली खान को मात्र 21 वर्ष की उम्र में कप्‍तानी मिल गई। तेजतर्रार बल्‍लेबाज के तौर पर मशहूर रहे नवाब पटौदी जहां चाहते थे वहां बाउंड्री मारते थे। कहा जाता है कि उनमें इतनी काबिलियत थी कि वह दर्शकों की डिमांड पर और उनकी ही दिशा में छक्‍का जड़ देते थे। 46 टेस्‍ट मैच खेलने वाले मंसूर अली खान के नाम विदेशी धरती पर पहली बार भारत को जीत दिलाने का कीर्तिमान दर्ज है।

लोकप्रियता को चुनाव में लगा झटका
क्रिकेट में शोहरत हासिल करने वाले नवाब पटौदी जनता में काफी लोकप्रिय थे और वह अपने क्षेत्र में बेहद सम्‍मानित व्‍यक्ति थे। अपने करीबी मित्रों की सलाह पर मंसूर अली खान ने राजनीति में उतरने का मन बनाया। वह पहली बार 1971 में विधानसभा चुनाव में पटौदी स्‍टेट चुनाव क्षेत्र से मैदान में उतरे। लेकिन इस चुनाव में नजीदीकी अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इस हार से उनके सम्‍मान को काफी धक्‍का पहुंचा और उन्‍होंने राजनीति में नहीं रहने का मन बना लिया।


पीएम के प्रचार के बाद भी नहीं जीत सके चुनाव
पहला चुनाव हारने के बाद लंबे समय तक राजनीति से दूरी रखने के वाले मंसूर अली खान को भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने संपर्क किया और 1991 के लोकसभा चुनाव में अपना प्रत्‍याशी बनाने का प्रस्‍ताव दिया। काफी मान मनौव्‍वल के बाद मंसूर अली खान इस बात पर राजी हुए कि उनके समर्थन में प्रधानमंत्री राजीव गांधी को रैली करनी होगी। राजीव गांधी के रैली के बाद भी चुनाव नतीजे मंसूर अली खान के पक्ष में नहीं आए और वह भाजपा प्रत्‍याशी से हार गए।

शादी, सम्मान और अंतिम यात्रा
टाइगर नवाब पटौदी के नाम से चर्चित मंसूर अली खान ने बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से 1969 में शादी की। वह पहले क्रिकेटर थे जिसने बॉलीवुड हिरोइन से शादी की थी। इसके बाद तो कई क्रिकेटर्स ने अभिनेत्रियों से विवाह रचाया। मंसूर और शर्मिला के दो बच्चे सुपरस्टार सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान हुए। मंसूर अली खान पटौदी को खेल पुरस्कार अर्जुन अवॉर्ड और नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। फेंफड़ों में इंफेक्शन की वजह से दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में 22 सितंबर 2011 को नवाब पटौदी ने आखिरी सांस ली।…NEXT

 

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