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Manik Sarkar – त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार

manik sarkarमानिक सरकार की जीवनी

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) की पोलित ब्यूरो के सदस्य मानिक सरकार का जन्म 22 जनवरी, 1949 को राधाकिशोरपुर, दक्षिण त्रिपुरा के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. विद्यार्थी जीवन में मानिक सरकार सीपीआई(एम) की छात्र शाखा स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के एक प्रतिष्ठित नेता भी रह चुके हैं. मानिक सरकार ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध एम.बी.बी. कॉलेज से वाणिज्य विषय के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की. एसएफआई की तरफ से वह इस संस्थान की छात्र शाखा के महासचिव भी बने. वर्ष 1967 में त्रिपुरा में कांग्रेस सरकार के खिलाफ चल रहे खाद्य आंदोलन, जिसने पूरे राज्य में अशांति का वातावरण बना रखा था, में मानिक सरकार ने अपने संगठन के अन्य लोगों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राज्य स्तरीय समिति के सचिव और अखिल भारतीय समिति के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं.


मानिक सरकार की राजनैतिक उपलब्धियां

वर्ष 1972 में मानिक सरकार को सीपीआई(एम) की सदस्यता प्राप्त हो गई और 1978 में वह पार्टी के राज्य सचिवालय में शामिल किए गए. 1985 में वह पार्टी की केन्द्रीय समिति के सदस्य बनाए गए. वर्ष 1980 में अगरतला निर्वाचन क्षेत्र से मानिक सरकार ने अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता. वर्ष 1993 में मानिक सरकार सीपीआई(एम) के राज्य सचिव व वाम पंथी दल के संयोजक नियुक्त किए गए. वर्ष 1998 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद मानिक सरकार प्रदेश के मुख्यमंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य बनाए गए. वर्ष 1998 से लेकर अब तक मानिक सरकार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हैं.


मानिक सरकार का व्यक्तित्व

मानिक सरकार देश के सबसे निर्धन मुख्यमंत्री हैं जिनका बैंक बैलेंस कुल 13,920 रुपए है. वर्ष 2008 के चुनावों के दौरान उनकी संपत्ति और आय का ब्यौरा सामने आया. मानिक सरकार के पास चल-अचल संपत्ति के नाम पर केवल मुख्यमंत्री के पद पर प्राप्त होने वाली आय है, जिसे वह पार्टी के कामों के लिए खर्च कर देते हैं. इनकी पत्नी जो स्वयं एक सरकारी कर्मचारी हैं आज तक सार्वजनिक परिवहन में आती-जाती हैं. मानिक सरकार की प्रतिबद्धता और उनकी ईमानदारी इसी बात से ज्ञात हो जाती है कि अगर किसी सरकारी कार्यक्रम में मानिक सरकार और उनकी पत्नी को जाना होता है तो मानिक सरकार तो सरकारी वाहन का सहारा लेते हैं लेकिन उनकी पत्नी ऑटो या रिक्शा से ही जाती हैं. मानिक सरकार त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री नृपेन चक्रबर्ती को अपना आदर्श मानते हैं.


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