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49 की उम्र, 23 साल की नौकरी और 45 तबादले, आखिर कसूर क्या है इस आईएएस ऑफिसर का?

ईमानदारी, सच्चाई और कर्तव्यनिष्ठा….ये वे शब्द हैं, जो हम सब बचपन से सुनते आएं है और इनका पालन करने की सीख भी हमें घर और स्कूल से मिलती रही है, पर वास्तविक दुनिया और किताबी दुनिया के मूल्यों में कितना फर्क होता है, ये हम सभी जानते हैं. फिर भी ये दुनिया टिकी है, क्यो? क्योंकि इसी दुनिया में कुछ ऐसे विरले भी हैं, जो इन मूल्यों को अपने जीवन का सिद्धांत बनाकर चलते हैं, फिर चाहें रास्तें मे कितनी ही कठिनाईयां क्यों न आए.


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ऐसे ही विरलों में से एक है ‘आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका’. ये नाम अक्सर मीडिया की सुर्खियां बटोरता रहता है, इसलिए नहीं कि अशोक खेमका खुद ऐसा चाहते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी ईमानदारी उन्हें सुर्खियों में ला खड़ा कर देती है. जरा सोचिए एक ईमानदार शख्स के दिल पर क्या बीतती होगी, जब उसे 23 साल की नौकरी में 45  बार तबादला सहना पड़े. गौरतलब है कि आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका सबसे पहले सुर्खियों में तब आए, जब नवंबर 2012 में उन्होंने दिल्ली के पास गुडगांव में 3.5 एकड़ की जमीन का सौदा रॉबर्ट-वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी और रियल स्टेट की जानी मानी कंपनी डीएलएफ के बीच 58 करोड में हुआ था. इसके  बाद उन्हें परिवहन – विभाग में तबादला दे दिया गया. आखिर हुड्डा सरकार अपनी आलाकमान के दामाद पर उंगली कैसे उठने देती और खुद अपने गिरेबान को बचाने के लिए एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अफसर को तबादले की सूली पर चढ़ा दिया गया.


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कहते हैं परिवर्तन सृष्टि का नियम है, पर लगता है आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका की जिंदगी में ये परिवर्तन होकर भी नहीं हो रहा. 23 साल की नौकरी में बार-बार लगातार उन्हें तबादलों का सामना करना पड़ रहा है. परिवर्तन उनके स्थान और ओहदों में हो रहा है, मगर उनके सिद्धांतों में नहीं, जिनकी कीमत हर बार अशोक खेमका को चुकानी पड़ रही है.

साल बदला, सरकार बदली और अब हरियाणा में है बीजेपी की सरकार. मगर इस बार भी उनका तबादला कर दिया गया यानि खेमका की जिंदगी में कुछ नहीं बदला. गौरतलब है, पिछले साल मनोहर लाल खट्टर सरकार ने उन्हें ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया था. अब फिर से उन्हें पुरातत्व एंव संग्रहालय विभाग के सचिव और महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है. इसे विडबंना ही कहिए कि 49 वर्षीय खेमका को फिर उसी विभाग में भेजा गया है, जहां से उनका तबादला ट्रांसपोर्ट विभाग में किया गया था. अपने इस 45वें तबादले पर अशोक खेमका का दर्द उनके ट्वीट में उजागर हो ही गया “तमाम कमियों और चुनौतियों के बावजूद परिवहन-विभाग में भ्रष्टाचार को रोकने और बदलाव लाने की कोशिश की. ये पल बहुत तकलीफ देय है क्योंकि ये कदम उस पार्टी के द्वारा उठाया गया है, जिसने मुझे उस वक्त सपोर्ट किया था, जब मैनें रॉबर्ट- वाड्रा की विवादास्पद लैंड डील का खुलासा करते हुए कांग्रेस पर उंगली उठाई थी .


Haryana Govt.


इसका तो सीधा सा मतलब ये ही हुआ कि चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस सब एक ही थाली के चट्टे – बट्टे हैं. एक ईमानदार आईएएस ऑफिसर की ईमानदारी से डरकर उसे बार-बार लगातार निचले स्तर के एक विभाग से दूसरे विभाग में तबादलें दिए जा रहे हैं, फिर बात की जा रही है देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की. अब तो लगने लगा है कि सरकार कोई भी आ जाएं, पर इन राजनेताओं की मुहिम है देश को ईमानदार युक्त ऑफिसरों से बचाने की और जितना संभव हो, देश को और इसकी राजनीति को भ्रष्टाचार युक्त बनाने की.


इस मुद्दे पर हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज जरूर आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका के समर्थन में सामने आएं हैं. अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि “मैं खेमका के साथ हूं. मैं तबादले पर मुख्यमंत्री जी से बात करुंगा. खेमका ने कांग्रेस के राज में भ्रष्टाचार मिटाने की मुहिम चलाई थी, खेमका एक बहुत ईमानदार ऑफिसर हैं”.


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इस मुद्दे पर ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर राम विलास शर्मा ने कहा कि ये जो कुछ भी हुआ वो मात्र एक रूटीन ट्रांसफर हैं. “ ट्रांसफर कोई सजा या पदावनति नहीं है. ये एक प्रशासनिक निर्णय है. “जबकि सूत्रों से पता चला है कि अशोक खेमका और ट्रांसपोर्ट विभाग के मिनिस्टर के बीच बहुत मतभेद थे. दिसंबर में खेमका ने सभी ऑफिसर्स को आदेश दिया था कि सीमा से अधिक सामान ले जाने वाले वाहनों पर दंड लगाया जाए, उनके इस कदम ने पॉलिटिकल लॉबी को फिर से उनका दुश्मन बना दिया.


अशोक खेमका के एक बार फिर तबादले के मुद्दे पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक सिब्बल ने कहा कि ‘बीजेपी को जवाब देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने पहले खेमका के तबादले को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था. न तो मैं उनके साथ हूं और न ही उनके खिलाफ हूं. मगर बीजेपी का ये कदम उनके दोहरे मापदंडों को जरूर दिखाता हैं’.

खैर, सवाल तो बहुत है कि आखिर हमेशा जो मोदी सरकार भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कटिबद्ध खुद को दिखाती रही है, उसने आखिर खुद क्यों ईमानदार आईएएस ऑफिसर अशोक खेमका का तबादला और भी निचले स्तर पर कर दिया? क्यों जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंंद केजरीवाल गृहमंत्री को पत्र लिखकर अशोक खेमका को डेपुटेशन पर दिल्ली तबादला करने की गुहार लगाते रहे, तो उन्होंने अनसुना कर दिया और अब खुद उनकी सरकार ने खेमका की अवनति कर दी. इन सवालों का जवाब हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को देना तो होगा, पर अगर नहीं भी दें तो जनता-जनार्दन सब जानती है कि ईमानदार अशोक खेमका को उनकी ईमानदारी का ये इनाम दिया गया है. Next


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