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‘अटल’ नहीं रहे लेकिन अमर रहेगी उनकी साथ जुड़ी ये 6 घटनाएं

Pratima Jaiswal

17 Aug, 2018

वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं
वे कल नहीं होंगे।
होने न होने का क्रम
इसी तरह चलता रहेगा
हम हैं हम रहेंगे
यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा।
अटल बिहारी वाजपेयी की इस कविता में जीवन की वो सच्चाई छुपी हुई है, जिससे एक न एक दिन सभी का सामना होना है। अटल बिहारी की जिंदगी का सफर 16 अगस्त को खत्म हो गया। एक चमत्कारी नेता और एक कवि के रूप में अटल जी हमेशा ही याद किए जाएंगे। उनके व्यक्तित्व के अलावा उनसे जुड़ी हुई ऐसी कई घटनाएं हैं, जो उनके जाने के बाद भी हमेशा याद की जाएगी। आइए, डालते हैं एक नजर…

 

 

1998  में किया गया परमाणु परीक्षण

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने 1998 में अपना दूसरा परमाणु परीक्षण कर न केवल दुनिया को चकित किया बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों को भी धता बताया। इसके बाद विदेश मंत्री जसवंत सिंह और अमेरिकी डेप्युटी स्टेट सेक्रटरी के बीच चल रही वार्ताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों का नया अध्याय खोला। अटल सरकार ने अमेरिका को सहज सहयोगी बताते हुए हाइटेक समझौतों की शुरुआत की जिसने 2005 में भारत-अमेरिका नाभिकीय समझौते का रूप लिया।

‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता

करगिल युद्ध के दौरान भारत की विजय हुई। अटल सरकार ने करगिल शहीदों के लिए मुआवजे की घोषणा की। साथ ही शहीद सैनिकों के अंतिम संस्कार को सार्वजनिक तौर पर करने का फैसला लिया। इन चीजों का अंतरराष्ट्रीय दबाव बना। तात्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को समन किया और उन्हें सेना हटाने का आदेश दिया। बाद में इस्लामाबाद की अपनी 6 घंटे की यात्रा के दौरान क्लिंटन का एक कथन काफी मशहूर हुआ। तब क्लिंटन ने कहा था कि सीमा रेखा को खून से दोबारा नहीं खींचा जा सकता।

 

 

यात्रियों को बचाने के लिए छोड़ने पड़े थे आतंकी

काठमांडु से हाइजैक कर कंधार ले जाए गए इस विमान से यात्रियों की सुरक्षित रिहाई के लिए वाजपेयी सरकार ने आतंकी मौलाना मसूद अजहर और ओमर सईद शेख को रिहा किया। आतंकी मसूद अजहर ने बाद में चलकर पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद बनाया और ओमर शेख ने 9/11 का हिस्सा रहने के साथ-साथ अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या भी की।

कश्मीर मुद्दे पर शिखर सम्मेलन  

नाभिकीय हथियारों में कटौती करने, कश्मीर विवाद और सीमा पार आतंकवाद पर बातचीत करने के लिए वाजपेयी और मुशर्रफ दो दिनों के लिए आगरा में मिले। हालांकि यह बातचीत सफल नहीं हुई। मुशर्रफ ने भारतीय संपादकों से बात करते हुए कहा कि कश्मीर अकेला मुद्दा है। भारत ने ड्राफ्ट अग्रीमेंट को खारिज कर दिया।

 

 

ससंद पर हुआ हमला

लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के 5 आतंकियों ने संसद को थर्रा दिया। भारतीय संसद पर हुए इस हमले में आतंकियों सहित कुल 12 लोगों की मौत हुई थी। वाजपेयी सरकार ने इस हमले की कड़ी प्रतिक्रिया देने का फैसला लिया। 5 लाख से अधिक सैनिकों को सीमा पर खड़ा कर दिया गया। फाइटर विमान और नेवी के जहाज कड़ा संदेश देने के लिए तैयार कर दिए है। छह महीने तक सीमा पर तनाव की स्थिति रही और एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों देश दो बार युद्ध के बिल्कुल नजदीक तक पहुंचे। बाद में अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद मुशर्रफ ने बयान जारी किया और सीमा पर से सैनिक हटाए गए।

गुजरात दंगों पर राजधर्म के पालन करने की हिदायत

वाजपेयी ने तब गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी को बर्खास्त नहीं करने का फैसला किया। गुजरात दंगों के दौरान राज्य मशीनरी पर ऐंटी मुस्लिम हिंसा में सहभागी होने के आरोप लगे थे। ऐसे में मोदी सरकार की निंदा करने में हिचकिचाहट को लेकर वाजपेयी की आलोचना हुई थी। तब अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ितों के पुनर्वास की घोषणा करते हुए वाजपेयी ने कहा था कि मोदी को राजधर्म का पालन करना चाहिए…Next

 

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