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2019 में 10 करोड़ युवा तय करेंगे देश की सत्ता! जानें क्यों होगा ऐसा

पिछले कुछ समय से देश में होने वाले चुनावों को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों के चुनाव परिणाम के बाद सियासी पंडितों ने माना कि यहां भाजपा मजबूत हो रही है, जिसका लाभ 2019 के आमचुनाव में भाजपा को मिलेगा। इसके बाद कुछ ही दिनों पहले उत्‍तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि मोदी की लहर कमजोर हो रही है। खैर, इन कयासों की सच्‍चाई 2019 के चुनाव परिणाम आने के बाद ही सामने आएगी। मगर इतना जरूर है कि 2019 के आमचुनाव में युवाओं की भूमिका बड़ी होगी। करीब 10 करोड़ युवा इस स्थिति में होंगे कि वे तय करेंगे कि देश की सत्‍ता किसके पास जाएगी। आइये आपको इसके बारे में विस्‍तार से समझाते हैं।

 

 

बड़ी भूमिका निभाएंगे युवा

हाल ही में हुए तमाम चुनावों के बाद एक बात बिल्कुल साफ है कि भारतीय राजनीति में कुछ भी निश्चित नहीं है। एक तरफ जहां भाजपा ने पूर्वोत्तर के राज्यों में पहली बार जीत दर्ज की, तो दूसरी तरफ पिछले 29 सालों से गोरखपुर में भाजपा का कब्जा था, वहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर कुछ भी निश्चित तौर पर कहना बिल्कुल भी संभव नहीं है। किसी भी वक्त वोटर अपने भरोसे को एक दल से हटाकर दूसरे दल में ले जा सकता है। मगर 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के युवा एक बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं, यह निश्चित है।

 

 

2019 में होंगे 10 करोड़ नए मतदाता

2011 की जनगणना के आधार पर हर वर्ष तकरीबन 2 करोड़ युवा 18 वर्ष की उम्र को पार कर रहे हैं और मतदान में हिस्सा ले रहे हैं। यानी 2019 के लोकसभा चुनाव में तकरीबन 10 करोड़ ऐसे मतदाता होंगे, जो पहली बार आमचुनाव में मतदान करेंगे। ऐसे में ये युवा वोटर किसी भी राजनीतिक दल के लिए काफी अहम हैं। राजनीतिक दलों के लिए सत्ता पर काबिज होने के लिए इन युवाओं को नजरअंदाज करना संभव नहीं होगा। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने भी इस बात को स्‍वीकार किया है कि 4जी स्पीड इंटरनेट के साथ लोकसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। माना जा रहा है कि 2019 का आमचुनाव सड़कों की बजाए मोबाइल पर लड़ा जाएगा। युवा वोटर्स मोबाइल पर कहीं अधिक राजनीति में सक्रिय होंगे।

 

 

स्‍वतंत्र सोच रखता है युवा मतदाता

युवा मतदाता इसलिए भी बेहद खास हैं, क्योंकि ये बेहतर तरीके से जानकारी हासिल करते हैं, तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और अपनी स्वतंत्र सोच रखते हैं। ये मतदाता अपने परिवार की राजनीतिक विचारधारा के साथ जाने की बजाय एक स्वतंत्र विचारधारा पर आगे चलते हैं। लिहाजा ये वोटर आगामी आमचुनाव में काफी अहम साबित हो सकते हैं और निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 18-20 वर्ष की आयु के मतदाताओं को बड़ी संख्या में पहले ही रजिस्टर किया जा चुका है। यह संख्या 10 फरवरी तक तकरीबन 1.38 करोड़ है…Next

 

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