Menu
blogid : 26288 postid : 33

भारत में मानसिक स्वास्थ्य के हालात

Aatam Nirbhar Bharat

  • 4 Posts
  • 0 Comment

कोरोना संकट ने भारत में करोड़ों लोगों के जीवन को किसी न किसी प्रकार से अवश्य ही प्रभावित किया है।  कोरोना महामारी के चलते लोगो का मिलना झूलना काफी सिमित हो गया है। जिसकी वजह से बहुत से लोग मानसिक डिप्रेशन (Mental Depression) का शिकार हुए है।  मानशिक डिप्रेशन जिसके बारे आम लोग बहुत कम या ना के बराबर चर्चा करते है। इंडियन सायकाइट्री सोसाइटी (आईपीएस) ने हाल ही में एक सर्वे में पाया है कि देशव्यापी तालाबंदी के बाद भारत में मानसिक बिमारियों में 20 फीसदी वृद्धि हुई है, और हर पांच में से एक व्यक्ति मानसिक बीमारी से प्रभावित है।

आईपीएस के मुताबिक नौकरी चली जाना, भविष्य की अनिश्चिता, घरेलू मतभेद व अपनों से न मिल पाना इतियादी मानसिक बीमारियों में वर्द्धि के अहम् कारण है। हाल ही में आत्महत्या के मामलो में भी उछाल देखने को मिला है।

भारत में हालात मानसिक बिमारियों के मामले में पहले ही ठीक नहीं थे।  भारत ने 1982 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (National Mental Health Programme) की शुरुआत की, जिसे 1996 में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (District Mental Health Programme) के रूप में फिर से शुरू किया गया था । 2014 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति (National Mental Health Policy ) शुरू की गई थी और 2017 में एक अधिकार आधारित मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम (Mental Healthcare Act, 2017) लाया गया, जिसने Mental Healthcare Act, 1987 की जगह ली थी।

पिछले साल के दिसंबर में, विश्व विख्यात “Lancet Psychiatry ” नामक पत्रिका में “The burden of mental disorders across the states of India: the Global Burden of Disease Study 1990–2017″ नाम से एक शोध पत्र प्रकाशित हुआ है।  जिसमे भारत के उच्तम संश्थाओं ने मिलकर 1990 से 2017 तक भारत में बढ़ते मानसिक बिमारियों का अध्यन किया है। प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, 2017 में 197 मिलियन भारतीय मानसिक विकारों से पीड़ित थे।  जिनमें से 46 मिलियन में अवसाद (Depression) और 45 मिलियन चिंता (Anxiety) विकार थे। अवसाद और चिंता विकार सबसे आम मानसिक विकार हैं और उनका प्रचलन पूरे भारत में बढ़ रहा है और दक्षिणी राज्यों और महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक है। अवसाद की व्यापकता बुजुर्ग लोगो  में सबसे अधिक है, जिसका भारत की आबादी पर महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है। बचपन के मानसिक विकारों जैसे कि idiopathic developmental intellectual disability, conduct disorders और autism होने की व्यापकता उत्तरी राज्यों में अधिक पाई गई, लेकिन पूरे भारत में यह कम हो रही है। कुल रोग भार में मानसिक विकारों का योगदान 1990 से 2017 तक भारत में दोगुना हो गया है, जो इस बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी रणनीतियों को लागू करने की आवश्यकता को दर्शाता है। कोरोना काल में तो  मानसिक बीमारियों का दर काफी तेजी से बढ़ा है।

मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च की बात करे तो ये बहुत ही कम है। 2018 -2019 के बजट में भारत सरकार ने ” National Mental Health Programme (NMHP )” के लिए कुल 50 करोड़ रु आवंटित किये थे , जो कि 2017-2018 के मुकाबले केवल 15 करोड़ ही अधिक थे। वित्त वर्ष 2019 में, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) को आवंटित बजट को घटाकर 40 करोड़ कर दिया गया।  और बजट 2020 में NMHP के लिए आवंटन में वृद्धि नहीं की गई है, भले ही कुल स्वास्थ्य बजट में 7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

भारत जैसे देश में जहाँ 13.7 प्रतिशत लोग यानी हर सातवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक रोग से ग्रहशीत है 40 करोड़ का बजट संभवत अधिक नहीं है। डब्ल्यूएचओ (WHO ) के अनुसार, 2011 में, भारत में हर 100,000 मानसिक-विकार रोगियों के लिए 0.301 मनोचिकित्सक, 0.166 नर्स और 0.047 मनोवैज्ञानिक थे। Indian Journal of Psychiatry में प्रकाशित  ‘Cost estimation for the implementation of the Mental Healthcare Act 2017’ नामक समीक्षा लेख के मुताबिक एमएचसीए को लागू करने की वार्षिक लागत 94,073 करोड़ रु है।  NMHA 2017  हर प्रभावित व्यक्ति को यह गारंटी देता है कि वह सरकार द्वारा संचालित या फंडेड  सेवाओं में अपना उपचार करवा सकता है। आम जनता के बीच   मानसिक बिमारियों के प्रति जागरूकता की कमी व रूड़ी वादी सोच के कारण केवल 10 प्रभावित लोगों  में से 2 लोग ही सही मानसिक उपचार पाते है।  समय मि मांग है कि हम अपने लोगों को मानसिक बीमारियों के प्रति सवेंदशील व जागरूक बनाये।  High School और universities में मानसिक स्वास्थय के प्रति उचित शिक्षा प्रदान कराई जाये।

 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी आंकड़े या दावे की पुष्टि नहीं करता है।

Tags:         

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *