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World Rabies Day: हर 9वें मिनट में रेबीज से एक मौत, जान लें इलाज और बचाव का तरीका

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुत्ते के काटने से फैलने वाले वायरस रेबीज को लेकर चिंता जताई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार हर 9 मिनट में एक शख्स इस वायरस की वजह से अपनी जान गंवा देता है। इस वायरस से बचने के लिए 100 पहले डॉक्टर्स ने वैक्सीन बना ली थी। लेकिन, अब भी रेबीज की वजह से लोगों की जान जा रही है। आइये जानते हैं कुत्ते के काटने पर क्या करें, रेबीज को फैलने से रोकने और बचाव और इलाज के तरीके क्या हैं।

Rizwan Noor Khan
Rizwan Noor Khan 28 Sep, 2021

 

 

रेबीज के 96 फीसदी मामले कुत्तों से- 
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुत्तों से फैलने वाले वायरस रेबीज को लेकर चिंता जताई है। 28 सितंबर को विश्व रेबीज डे पर WHO ने रिपोर्ट में बताया कि यह वायरस मनुष्य में कुत्ते के काटने से फैलता है। 96 फीसदी मामलों में इसकी वजह कुत्ते का काटना ही होता है। जबकि, 4 फीसदी मामलों में यह बिल्ली, बंदर, चूहा या सियार के काटने, नाखून की खरोंच लगने से भी फैल सकता है।

15 साल से छोटे बच्चे ज्यादा पीड़ित- 
रेबीज वायरस के संपर्क में आने वालों में 40 फीसदी मामलों में छोटे बच्चे होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर 15 साल से छोटे बच्चे कुत्तों के काटने से रेबीज का शिकार बनते हैं। WHO के मुताबिक यह वायरस प्रिवेंटिव है। एक शताब्दी से भी पहले डॉक्टर्स ने रेबीज से बचाने के लिए वैक्सीन बना ली थी। इलाज होने के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में लोग रेबीज से जान गंवा देते हैं।

हर 9वें मिनट में मरता है एक शख्स- 
रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के 150 देश रेबीज वायरस की समस्या से जूझ रहे हैं। सर्वाधिक मामले एशिया और अफ्रीकी देशों में सामने आते हैं। दुनियाभर में रेबीज वायरस की चपेट में आकर हर 9वें मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस वायरस से हर साल 10 हजार से ज्यादा मौतें केवल एशिया और अफ्रीकी देशों में होती हैं। जबकि, बाकी दुनिया में भी वह वायरस हजारों लोगों की जिंदगी खत्म कर देता है।

 

 

एक सप्ताह में होने लगता है असर- 
रेबीज वायरस से ग्रसित व्यक्ति को एक सप्ताह से लेकर 1 महीने के अंदर असर दिखना शुरू हो जाता है। कई केस में वायरस का उभार एक साल बाद भी हो सकता है। वायरस के संपर्क में आने वाले शख्स को सबसे पहले बुखार की समस्या शुरू होती है। कुछ मामलों में पीड़ित को हवा और पानी से डर लगने लगता है। जबकि, ज्यादातर केस में संक्रमित व्यक्ति का व्यवहार लगभग पूरी तरह बदल जाता है।

 

 

बचाव और इलाज का तरीका- 
किसी भी कुत्ते के काटने या संपर्क में आने के बाद तुरंत उस स्थान को साफ पानी और साबुन के इस्तेमाल से धुल लेना चाहिए। जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए वैक्सीनेशन शुरू कर देना चाहिए। वहीं, विशेषज्ञों के कोई भी डॉग जब भोजन कर रहा हो, गुस्से में या डरा हो तो उसे छेड़ने की कोशिश ना करें। जबकि, किसी गली के कुत्ते के दौड़ा लेने पर भागें नहीं, बल्कि उसी जगह पर स्थिर हो जाएं तो उसके काटने का खतरा कम हो जाता है।

 

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