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भारत में दूध की नदी बहाने वाले डॉक्टर कुरियन, श्वेत क्रांति के जनक ने कैसे शुरू किया अमूल का सफर जानिए

Rizwan Noor Khan

9 Sep, 2020

भारत को दूध का बड़ा उत्पादक बनाने वाले वर्गीज कुरियन को लोग मिल्कमैन के नाम से पुकारते हैं। वर्गीज कुरियन को सम्मान में लोग भारत में दूध की नदी बहाने वाला शख्स भी कहते हैं। कुरियन को भारत में दूध उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति करने के लिए जाना जाता है। उनके एक छोटे से आईडिया ने अमूल नाम की अरबों रुपये की कंपनी खड़ी हो गई। वर्गीज कुरियन की पुण्यतिथि के मौके पर जानते हैं कुछ रोचक तथ्य।

पिता चाहते थे डॉक्टर बने पर बने डेयरी इंजीनियर
केरल के कोझीकोड इलाके में 26 नवंबर 1921 को डॉक्टर वर्गीस कुरियन का जन्म हुआ था। कुरियन बचपन से ही पढ़ने में बेहद तेज थे। उनके पिता सिविल अस्पताल में सर्जन थे तो वह बेटे को भी डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन, कुरियन को इंजीनियरिंग में दिलचस्पी थी। शुरुआती पढ़ाई के बाद वह डेयरी इंजीनियरिंग के लिए 1948 में मिशिगन यूनिवर्सिटी अमेरिका चले गए। भारत सरकार की स्पांसरशिप में वह न्यूजीलैंड में 1952 में डेयरी तकनीक समझने के लिए गए।

भारत को सबसे बड़ा दूध उप्तादक बनाने का सपना
डॉक्टर कुरियन जब देश वापस लौटे तो उन्होंने भारत को दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ठान ली और अपने मिशन के लिए गुजरात के आनन्द को चुना। आनंद से उन्होंने श्वेत क्रांति की शुरुआत की और लोगों को दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया। डॉक्टर कुरियन ने आनंद में ही एक समिति बनाई जिससे अमूल नाम से दूध उत्पादन शुरू किया गया। धीरे धीरे यह मिल्क प्रोडक्ट आनंद और फिर पूरे गुजरात में छा गया।

अमूल ब्रांड की शुरुआत और फेडरेशन की स्थापना
डॉक्टर कुरियन ने दूध को पूरे देश में पहुंचाने के इरादे से 1946 में अमूल ब्रांड की स्थापना की और उसे बाजार में उतार दिया। उन्होंने दूध उत्पादन को बढ़ाने और उसके संरक्षण के लिए 1973 में गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) की स्थापना की। वह इस फेडरेशन के 34 साल तक अध्यक्ष रहे। अमूल ब्रांड नाम से शुरुआत में दूध, दही और घी बाजार में उतारे गए।

कुरियन ने देश में बहा दी दूध की नदियां
डॉक्टर कुरियन ने लोगों को दूध से होने वाले फायदों के बारे में जागरूक किया। इसके बाद 20 लाख से ज्यादा किसान उनकी फेडरेशन से जुड़कर दूध उत्पादन शुरू किया। धीरे धीरे अमूल दूध को इतनी सफलता हासिल हुई कि वह घर घर में पहुंच गया। उस दौर को श्वेत क्रांति के नाम से जाना गया। दूध के उत्पादन को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए डॉक्टर कुरियन को मिल्कमैन कहा जाने लगा। लोग उन्हें भारत में दूध की नदियां बहाने वाल व्यक्ति भी कहते हैं।

विश्वस्तर पर दर्जनों सम्मान हासिल किए
डॉक्टर कुरियन को श्वेत क्रांति लाने और समाज को सुदृण बनाने की दिशा में किए गए योगदान के लिए भारत सरकार ने तीन सर्वोच्व नागरिक सम्मान पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण अवॉर्ड से नवाजा। डॉक्टर कुरियन को 1965 में रैमन मैगसायसाय (Ramon Magsaysay Award) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 1989 में विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize) से भी सम्मानित किया गया। 9 सितंबर 2012 को गंभीर बीमारी के चलते आनंद के अस्पताल में 90 साल की उम्र में डॉक्टर कुरियन ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।…NEXT

 

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