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आखिर क्यों इस इंस्पेक्टर की तारीफ करते नहीं थक रहे लोग, जानेंगे तो आप भी देंगे शाबासी

Rizwan Noor Khan

8 Sep, 2020

इस दुनिया में जरूरतमंद की मदद करने को इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है। ऐसा करने वाले को देश और दुनियाभर में तारीफ हासिल होती है। ऐसी ही तारीफ आजकल बेंगलुरु के एक सब इंस्पेक्टर को मिल रही है। उनके काम के लिए लोग सराहना करते नहीं थक रहे हैं।

Image courtesy : ANI

बेंगलुरू के गरीब बच्चों की रोजाना मदद
कर्नाटक में कोरोना महामारी ने कहर ढाया हुआ है। पूरे देश में कोरोना के कारण स्कूल कॉलेज बंद चल रहे हैं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए आनलाइन क्लासेस चलाई जा रही हैं। लेकिन, जिन बच्चों के पास स्मार्टफोन की व्यवस्था नहीं वह पढ़ नहीं पा रहे हैं। यह समस्या बेंगलुरु के अन्नपूर्णेश्वरी नगर इलाके के गरीब बच्चों के सामने भी आ रही थी।

आनलाइन शिक्षा से वंचित बच्चों का बना मसीहा
इन गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और वह अपने माता पिता की तरह अनपढ़ रहकर गरीबी में जीवन न बिताएं इसलिए अन्नपूर्णेश्वरी नगर इलाके के सब इंस्पेक्टर शांतापा जाडम्मानवर ने पढ़ाई का बीड़ा उठा लिया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक वह ड्यूटी पर जाने से पहले हर रोज उन बच्चों को पढ़ाते हैं जो आनलाइन क्लास से वंचित हैं।

ड्यूटी पर जाने से पहले बच्चों को पढ़ा रहे
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु के सब इंस्पेक्टर शांतापा जाडम्मानवर रोज सुबह अपने काम पर जाने से पहले प्रवासी मजदूरों के बच्चों को पढ़ाते हैं। ये बच्चे कोरोना महामारी में स्मार्ट फोन खरीद कर ऑनलाइन क्लासेज नहीं ले सकते हैं। ऐसे में शांतापा इन गरीब बच्चों की शिक्षा का जरिया बनकर सामने आए हैं।

खुद भी मजदूर थे शातांपा बाद में मिली नौकरी
शातांपा ने कहा कि मेरा प्रवासी मजदूरों से बहुत गहरा जुड़ाव रहा है। 2005 में जब मैं बेंगलुरु आया तब मैंने भी प्रवासी मज़दूर के तौर पर काम किया था। अगर हम इन बच्चों को शिक्षा नहीं देंगे तो इनका ​भविष्य भी इनके माता-पिता जैसा होगा। मैं नहीं चाहता कि इन बच्चों के साथ ऐसा हो।

Image courtesy : ANI

नेक काम के लिए मिल रहीं तारीफें और सैल्यूट
शातांपा के इस नेक काम को लेकर सोशल मीडिया में उनकी जमकर तारीफ हो रही है। अन्नपूर्णेश्वरी नगर इलाके के लोग शातांपा को दुआएं देते हैं और बच्चों की शिक्षा के प्रति उनके जुनून को सैल्यूट करते हैं। शातांपा के विभागीय साथी और स्थानीय प्रशासन उनके काम को एप्रिशिएट करते हैं। शातांपा इन बच्चों के जीवन को सही दिशा देने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।…Next

 

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