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प्रेम, पहचान, मानवता और विद्रोह को खूबसूरत अंदाज में बयां करती रवींद्रनाथ टैगोर की वो 7 कहानियां, जो आज का आईना है

Pratima Jaiswal

7 Aug, 2019

‘प्रेम में डूबा हुआ व्यक्ति जब अपने साथी द्वारा अपमानित होता है, तो अपने व्यक्तित्व को तलाशने निकल पड़ता है। एक समय बात उसे अनुभूति होती है कि वो किसी ओर को प्रेम करते-करते कभी स्वंय से प्रेम कर ही नहीं पाया। उसने भी तो खुद से कभी प्रेम नहीं किया बल्कि दूसरे के प्रेम की चाह मन में रखते हुए खुद को अपने प्रेमी को सौंप दिया, जब उसने खुद से प्रेम नहीं किया, तो दूसरे के ठुकराए जाने पर कैसी शिकायत!’
रवींद्रनाथ की टैगोर की कहानी ‘मानभंजन’ कहानी का कुछ ऐसा ही सार है, जिसमें खुद को ठुकराए जाने के बाद गिरीबाला अपना अस्तित्व तलाशकर अपनी नई पहचान बनाती है। इसी तरह रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियां जिंदगी के हर पहलू को खुद में समेटे हुए है। आप अगर पढ़ने के शौकीन हैं, तो आपको उनकी ये 7 कहानियां जरूर पढ़नी चाहिए-

 

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी ‘चोखेर बाली’ पर आधारित टीवी सीरीज के एक दृश्य में राधिका आप्टे

 

काबुलीवाला
एक बच्ची से प्रेम और किसी बाहरी देश से आए एक व्यक्ति के ऊपर शंका पर आधारित इस कहानी में हम उन मानवीय भावनाओं को समझ सकते हैं, जिसमें अपने रोजगार के लिए लोग अपने परिवार को छोड़कर किसी दूसरे देश चले जाते हैं। वहां हमें ऐसे किरदार मिलते हैं, जिनमें हमें अपनी कोई याद दिखाई देती है।

 

चोखेर बाली
चोखेर बाली कहानी पर कई भाषाओं में फिल्में और टीवी सीरिज भी बन चुकी है। उनके इस उपन्यास को मनोवैज्ञानिक कहानी कहा जाता है, जिसमें एक पढ़ी-लिखी लड़की को अपने अह्म में आकर रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसके बाद आनन-फानन में किसी बीमार व्यक्ति से उसकी शादी करा दी जाती है लेकिन कुछ ही महीनों में वो विधवा हो जाती है। इसके बाद वो खुद को अपमानित करने का बदला उस व्यक्ति से लेती है, जिसने उसे रिजेक्ट किया होता है।

 

 

 

मानभंजन
मानभंजन कहानी है दो बचपन के दोस्तों की, जो एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और बड़े होने के बाद उनकी शादी करा दी जाती है लेकिन लड़का अपनी पत्नी का अपमान करके थियेटर आर्टिस्ट के पास चला जाता है। इसके बाद एक पत्नी से अलग गिरीबाला अपना अस्तित्व तलाशने निकल पड़ती है।

 

वारिस
कभी-कभी हम अपने अह्म में आकर अपने जिंदगी का सबसे कठोर फैसला ले लेते हैं लेकिन आगे चलकर हमें इसका अपराधबोध होता है लेकिन क्या यह अपराधबोध हमारी मानसिक बीमारी भी बन सकता है? कुछ ऐसी ही कहानी है वारिस की।

 

 

 

अतिथि
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके लिए सफर करते हुए जिंदगी जीना ही किसी लक्ष्य जैसा है। वो खुद को बांधे हुए नहीं रखना चाहते, वो बड़े से बड़े प्रलोभन को छोड़कर खुद को एक अतिथि समझते हैं। 16-17 साल के लड़के की ऐसी ही कहानी है अतिथि।

 

एक मुस्लिम लड़की की कहानी
इस कहानी में जहां एक तरफ धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर मानवीय पहलू को दिखाया गया है, वहीं दूसरी तरफ धर्म की जंजीरों में फंसकर कैसे हम अपनी खुशियों का त्याग कर देते हैं, इसे भी कहानी के माध्यम से दिखाया गया है।

 

टूटा हुआ घोंसला (the broken nest)
यह कहानी उस समय की है, जब मर्द ही घर में कमाई करके लाते थे जबकि महिलाओं को घर में समेटकर रखा जाता था. इस कहानी में नायिका जब पहली बार घर से दूर जाती है, तो उसे क्या-क्या चुनौतियां देखनी पड़ती है, इस कहानी में दिखाया गया है।

 

 

इन कहानियों को पढ़कर आप जिंदगी के कई पहलुओं को समझ सकते हैं।…Next

 

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