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कब तक होगी आतंकी हमलों की पुनरावृत्ति?

terrorist attacks26/11 मुंबई हमले के एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब और संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु की फांसी का श्रेय अभी पूरी तरह से केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ले भी नहीं पाए थे कि हैदराबाद के दिलसुख नगर इलाके में हुए बम विस्फोट ने उनकी नाकामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया. इस हमले ने सरकार खासकर गृह मंत्रालय के उन दावों की पोल खोल दी जिनमें मुंबई हमले के बाद जनता को कड़ी सुरक्षा दिए जाने के लिए सुरक्षा नीति में बदलाव की बात कही जा रही थी.


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गुरुवार को देर शाम साथ हैदराबाद के दिलसुख नगर इलाक़े में दो जगहों पर बम विस्फोट हुआ जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई जबकि 119 लोग घायल हुए. विस्फोट के लिए आतंकवादियों ने भीड़-भाड़ वाले इलाके को चुना. विस्फोट बस स्टैंड और एक थियेटर के बाहर हुए हैं. आतंकवादियों ने विस्फोट के लिए काफी तीव्रता वाले बम का इस्तेमाल किया. घायलों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया है जहां पर उनकी हालत गंभीर है.


दिल को दहला देने वाले इस बम धमाके के बाद जब गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे मीडिया से मुखातिब हुए तो उनके बयान ने भारतीय सुरक्षा एजेंसी और सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार कितनी गंभीर है, को सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया. शिंदे ने कहा कि सरकार के पास पिछले दो दिन से ऐसी जानकारी थी कि आतंकवादी भारत के उन इलाकों को टारगेट कर सकते हैं जो आतंकी हमले के नजरिए से काफी संवेदनशील हैं.


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अब सवाल यह उठता है कि अगर हमले की जानकारी गृह मंत्रालय को थी तो उन्होंने राज्यों के साथ जानकारी साझा करने का ऐसा कौन सा तरीका अपनाया जिसके बावजूद आतंवादियों ने इस तरह की घटना को अंजाम दिया. सवाल राज्यों के प्रशासन पर भी उठता है. अगर हैदराबाद को आतंकी हमले के नजरिए से काफी संवेदनशील घोषित किया गया था तो वहां की सरकार इतनी गहरी नींद में सोई क्यों थी?


वैसे ऐसे कई मौके आए हैं जब सुरक्षा के मामले में भारत की सरकार और एजेंसियां आतंकवाद से निपटने में नाकाम रही हैं. अब भी हम देश को ऐसे सुरक्षा कवच में नहीं डाल पाए हैं जो जरूरी है. अमेरिका पर एक आतंकी हमला हुआ और उसके बाद उसने खुद को ऐसे सुरक्षा कवच में डाला कि उसके बाद आतंकवादी कभी अपने मंसूबों को पूरा करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं लेकिन भारत की स्थिति इससे काफी विपरीत है. यहां एक के बाद एक लगातार आतंकी हमले होने के बावजूद अब तक कोई चाक-चौबंद व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है. आगे सरकार की तरफ से यह कोई नहीं कह सकता कि देश में हमले नहीं होंगे.


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