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दिल्ली पहुंचकर खत्म हो गई किसान क्रांति यात्रा, ये हैं किसानों की मांगे

Pratima Jaiswal

3 Oct, 2018

2 अक्टूबर के दिन सोशल मीडिया पर किसानों और पुलिस के बीच होती झड़प की तस्वीरें वायरल होने लगी। कई दिनों से चल रही किसान क्रांति यात्रा सुर्खियों में आने लगी। मंगलवार सुबह करीब सवा 11 बजे किसानों का यह आंदोलन तब हिंसक हुआ जब उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़कर दिल्ली में घुसने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक किसानों ने पत्थरबाजी की, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। पानी की बौछारें छोड़ीं। लाठियां चलाईं। रबड़ की गोलियां भी दागीं। ट्रैक्टरों के तार काट दिए। पहियों की हवा निकाल दी। करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी जैसे हालात में 100 से ज्यादा किसानों को चोंटें आईं, कुछ गंभीर भी हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस के एक ACP समेत 7 पुलिसकर्मी घायल हुए।

 

 

किसान क्रांति यात्रा को लेकर दिल्ली पहुंचे किसानों ने आखिरकार अपना आंदोलन वापस ले लिया। किसान नेता नरेश टिकैत ने इसका ऐलान किया। मार्च खत्म होने के बाद किसान अपने-अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। मंगलवार देर रात किसान मार्च को दिल्ली में एंट्री दी गई थी। एंट्री के बाद ये सभी सीधे किसान घाट पहुंचे और वहां जाकर हड़ताल खत्म कर दी।

 

 

ऐसे में आम लोगों के मन में किसानों की मांगों के मन में सवाल है कि आखिर क्या है किसानों की मांगें।

किसान 60 साल की आयु के बाद पेंशन देने की मांग कर रहे हैं।
पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव करने की मांग।
गन्ना की कीमतों का जल्द भुगतान की मांग।
किसान कर्जमाफी की भी मांग कर रहे हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज मुक्त लोन।
देश में आवारा पशुओं जैसे-नीलघोड़ा, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को पूर्णतः नष्ट कर दिया जाता है। इससे देश की खाद्य सुरक्षा व खेती दोनों खतरे में हैं। जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु क्षेत्रीय आधार पर वृहद कार्य योजना बनाई जाए। देश के कुछ राज्यों में प्रचलित अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए।

 

 

सभी फसलों की पूरी तरह खरीद की मांग भी की गई है।
इसके अलावा किसान स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग है।
गन्ने की कीमतों के भुगतान में देरी पर ब्याज देने की मांग कर रहे हैं।
देश में सभी मामलों में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 से ही किया जाए। भूमि अधिग्रहण को केन्द्रीय सूची में रखते हुए राज्यों को किसान विरोधी कानून बनाने से रोका जाए।
खेती में काम आने वाली सभी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए।
मनरेगा को खेती से लिंक किया जाए।
किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप की बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।

हालांकि, अभी इनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या पहल की गई है, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है…Next

 

 

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