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क्या पूरब में सूरज निकलना भूल गया है ?


उत्तर भारत समेत इस समय पूरे भारत में शीतलहर का प्रकोप जारी है. शिमला, धर्मशाला, दिल्ली, हरियाणा, जयपुर, माउंट आबू आदि जगहों पर तो सर्दी जैसे पिछले तमाम रिकॉर्ड तोड़ने के मूड में है. रविवार 09 जनवरी का दिन दिल्लीवासियों के लिए तो जैसे ठंड की दोहरी मार लेकर आया. दिल्ली में जहां 09 जनवरी की सुबह का तापमान 05 डिग्री सेल्सियस था तो वहीं दिन का अधिकतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहा.

दिल्ली के साथ पंजाब, शिमला, देहरादून, हरियाणा आदि जगहों पर भी शीतलहर का प्रकोप जारी है. जयपुर में तो जैसे ठंड ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. जयपुर और उसके आसपास जैसे माउंट आबू में तो पारा ‘0’ डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला गया है.


आंकड़ों की बात करें, तो जनवरी महीने में दिल्ली का अधिकतम तापमान 29 जनवरी 1991 को 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. न्यूनतम तापमान 8 जनवरी 2006 को 0.2 डिग्री सेल्सियस था. वैसे, पिछले 100 वर्षो में जनवरी में सबसे कम तापमान 16 जनवरी 1935 को -0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.


अब तक ठंड की वजह से दर्जनों जानें जा चुकी हैं. इस बार की ठंड देखकर तो फिलहाल यही लगता है कि इस बार सूरज पूरब में निकलना भूल गया है. और इस ठंड की सबसे खतरनाक मार पड़ी है उन लोगों पर जिनके सिर के ऊपर छत नहीं है. सड़कों, रेल की पटरियों और अन्य जगहों पर रहने वाले गरीबों की हालत सबसे खराब है. रैन-बसेरों पर सरकार की बेरुखी से ऐसा लगता है कि ठंड की वजह से मरने वालों की संख्या में अभी और वृद्धि होने की आशंका है.

इस बार इस कदर ठंड बढ़ने की कई अहम वजहें मानी जा रही हैं जैसे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (डब्ल्यूडी) यानी पश्चिमी विक्षोभ,विंड चिल फैक्टर , पाला आदि. इसके साथ शिमला और विदेशों में हो रही भारी बर्फबारी को भी इसका जिम्मेदार माना जा रहा है.


बदलते परिदृश्य और बदलते वातावरण से भी इस तरह के बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है. देखना है आखिर कब तक यह ठंड भारतवासियों को तंग करती हैं और रैन-बसेरों को लेकर सरकार की नींद कब खुलती है?

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