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आंसू का मोल

nehaahuja

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आउच!!

क्या हुआ सुमन??

सचिन भागता हुआ किचन में आया।

कुछ नहीं वो चाकू से थोड़ा हाथ कट गया।

थोड़ा…..देखो कितना खून बह रहा है।

चलो तुम यहां से

पापा सुमन को बहुत ज्यादा गहरा कट लगा है डॉक्टर से पट्टी करानी पड़ेगी।

“सुमन की सासू मां बोल पड़ी” तू भी ना सचिन ज्यादा ही सोचता है ऐसे छोटे-मोटे कट तो किचन में लगते ही रहते हैं। हमें नहीं लगती थी क्या हमने तो ना बहाए ऐसे आंसू।

मां कट काफी गहरा है ज्यादा कुछ ना बोलते हुए सचिन सुमन को गाड़ी में बिठा डॉक्टर के पास ले गया।

सचिन और सुमन की शादी को एक साल हो गया था। सुमन एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी है पर बहुत ही सुलझी हुई लड़की है। सचिन सुमन के मान सम्मान का बहुत ख्याल रखता है पर सुमन की सास यह सब देख ज्यादा खुश नहीं होती बात बात पर कुछ ना कुछ बोल ही देती है।

डॉक्टर से पट्टी करवा वह वापस घर के लिए निकल पड़े डॉक्टर ने दो दिन हाथ पानी में डालने से मना किया है।

सचिन ने आकर यह बात घर पर बताई

अरे तुझे नहीं पता सचिन यह डॉक्टर लोग तो ऐसे ही कहते हैं औरत का कभी बिना पानी में हाथ डाले काम चल सकता है क्या? कुछ नहीं होता अपने आप ठीक हो जाएगा।

इतने में सुमन के ससुर का फोन बजा देखा तो उनकी बड़ी बेटी पायल का फोन था।

हेलो बेटा

नमस्ते पापा कैसे हो आप लोग?

हम सब ठीक हैं बेटा तुम कैसी हो ?

पापा क्या आप हमें लेने आ जाएंगे कल। मैं और बच्चे कुछ दिन के लिए वहां आना चाहते हैं।

हां हां बेटा क्यों नहीं पर सब ठीक तो है ना ?

बस पापा मुझे आप लोगों की याद आ रही है।

ठीक है बेटा मैं आ जाऊंगा।

यह बात सुनते ही सुमन की सास की आंखों से आंसू निकल पड़े जरूर उन लोगों ने फिर मेरी बच्ची को कोई दुख पहुंचाया होगा बिचारी मेरी बच्ची इतना बड़ा परिवार है उसके दो छोटे बच्चे हैं और फिर भी उसे घर का सारा काम अकेला करना पड़ता है। उसकी सास भी टोका टाकी से बाज नहीं आती और एक हम लोग हैं जिन्होंने अपनी बहू को इतनी छूट दे रखी है।

सुन लो तुम सब पायल को यहां किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।सुनिए जी आप फ्रिज को फलों से भर दो बच्चे आए तो उन्हें अपने मनपसंद फल मिलने चाहिए, सचिन तुम बाजार से कुछ मिठाई ले आओ और बहु तुम उसका कमरा तैयार कर दो।

अगले दिन सुमन के ससुर उसकी ननंद पायल को घर ले आए।पायल वैसे तो अपनी भाभी सुमन से स्नेह रखती थी पर कभी-कभी मां की बातों में आ दूरियां भी बना लेती थी। सुमन ने पायल और बच्चों की पसंद का खाना बनाया उसकी उंगली के कट के बारे में बाकी सब तो क्या वह खुद भी भूल गई थी और उनके आदर सत्कार में व्यस्त हो गई थी। बच्चे भी काफी खुश थे क्योंकि मामी ने उनके मनपसंद ब्रेड रोल जो बनाए थे।

अरे….सुमन भाभी यह आपके हाथ पर क्या हुआ पट्टी क्यों बंधी है?

कुछ नहीं दीदी….

तभी सासू मां बीच में बोल पड़ी कुछ नही हलका सा कट लग गया है पर आजकल की लड़कियां तो बहुत नाजुक है ना।कहां सहन करती हैं। सुन सुमन रात को पायल और बच्चों के लिए छोले और आलू गोभी बना देना बच्चों को आलू गोभी बहुत पसंद है।

भाभी कुछ देर आराम कर लीजिए फिर मैं भी आपके साथ चलूंगी मदद करने।

तू रहने दे पायल कुछ दिन के लिए तो आई है वहां भी तो सारा दिन किचन में घुसी रहती है कम से कम यहां तो थोड़ा आराम कर कितनी सहनशील है मेरी बच्ची मायके में आकर भी इसे काम करने की लगी है।

हां दीदी मा ठीक कह रही हैं आप थोड़ा आराम कर लीजिए। काम का क्या है वह तो होता ही रहेगा।

ठीक कह रही है सुमन हमारे घर में वैसे भी ज्यादा काम नहीं होता यह तो सुबह 9:00 बजे ही खाना बना किचन बंद कर देती है तू ही है एक जो अपने ससुराल में सारा दिन लगी रहती है चल तू यहां से हम दोनों कमरे में बैठते हैं मुझे तुझसे कुछ बात करनी है सुमन की सासू मां पायल का हाथ पकड़ उसे कमरे में ले गई। शाम को जब सब लोग खाने की टेबल पर बैठे पायल ने कहा भाभी आप बैठो मैं खाना डालती हू और वह सब की प्लेट में खाना डालने लगी।

“तभी सुमन की सासू मां ने बोला” अरे पायल तेरे हाथ पर निशान कैसा।

कुछ नहीं मां वह हल्का सा जल गया था खाना बनाते वक्त। अब तो ठीक है

अरे इसमें तो निशान पड़ गया है।

कुछ नहीं मां छोटा सा तो निशान है चला जाएगा मैं नारियल तेल लगा रही हूं रोज।

ना ना तू चल यहां से मेरे पास एक ट्यूब है मैं वह लगा देती हूं और कुछ दिन रोज वह ट्यूब लगाएगी तो निशान जल्दी से चला जाएगा।

जब सुमन ये सब देख रही थी तो उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। सचिन यह सब देख रहा था और खाना खत्म होते ही वह सुमन की मदद के लिए रसोई में चला गया और उसके साथ सारी रसोई समेटवा दी फिर कमरे में जा उसे प्यार से समझाया। मैं जानता हूं सुमन तुम्हारी आंखों से आंसू क्यों निकले थे। तुमसे बस इतना कहना चाहता हूं कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं चाहे किसी और को हो ना हो लेकिन मुझे तुम्हारे दर्द से तकलीफ होती है और बात करते-करते दोनों को नींद आ गई।

कुछ दिन बीत गए बेटी के साथ रात भर बातें करते करते सुमन की सास की नींद पूरी ना हो पाती इस वजह से उन्हें एक दिन बुखार हो गया और उधर पायल के घर से फोन आया उसके पति किशोर उसे लेने आ रहे थे क्योंकि पायल की सास ने घर में एक कीर्तन रखा है। पायल जानती थी कि अगर उसने वापस ससुराल जाने से मना किया तो उसके पति किशोर को यही लगेगा कि वह बहाना बना रही है अपनी मां की बीमारी का। पायल वापस आना ही नहीं चाहती इसलिए वह चुपचाप जाने की तैयारी करने लगी और अपना सामान पैक करने लगी।

सुमन अपनी सास के सर पर ठंडे पानी की पट्टी रख रही थी “पायल वहां आई और अपनी मां से कहने लगी” मां मुझे माफ कर देना लेकिन मुझे वापस जाना होगा मैं यहां रुक कर तुम्हारी सेवा करना चाहती हूं पर मैं मजबूर हूं।

दीदी आप निश्चिंत होकर जाओ मैं हूं ना यहां मां के पास उनकी सेवा के लिए।

हां बेटा तू जा अपनी तैयारी कर बेटियां तो वैसे भी मेहमान ही होती है।

“सही कहा तुमने सरला जी सुमन के ससुर बोले”हमारी असली सेवा तो बेटा और बहू ही कर पाते हैं बेटियां तो किसी और के घर की रोशनी है और उन्हे जाकर वही घर रोशन करना है।

“हां जी आप ठीक कह रहे हैं सुमन की सास बोली”।।

अकसर यह देखा गया है की बेटियों के आंसू के आगे बहू के आंसू का उतना मोल नहीं रहता। यह बात अगर हर कोई समझ ले तो शायद घर में लड़ाई झगड़ा ही ना हो।

धन्यवाद दोस्तों आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताइएगा आपको मेरी कहानी पसंद आए तो आप मुझे फॉलो कर सकते हैं।

 

 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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