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पांच राज्यों के चुनाव और कोरोना का कैरेक्टर

navsiyal

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– नव सियाल

आज हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जब आंकड़ों या बातों को घुमाकर किसी भी तरह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। नेता सरेआम ऐसा करते हुए दिख रहे हैं। कोरोना काल में पांच राज्यों में चुनाव हुए। पश्चिम बंगाल में चार चरणों के चुनाव अभी बाकी हैं। आपने देखा होगा कि नेताओं ने कैसे कोरोना को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया। सीधे शब्दों में कहें तो लोगों को एक किस्म से बेवकूफ ही बनाया। लोग भी खुशी से मूर्ख बनते रहे।

जिन राज्यों में चुनाव हुए या हो रहे हैं, उनमें कोरोना के लिए बनाई गई गाइडलाइंस की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। जबकि दूसरे राज्यों खासकर गैर भाजपा राज्यों- पंजाब, महाराष्ट्र में कोरोना खतरनाक तरीके से फैलने की खबरें आती रही। भोंपू बने मीडिया को भी फिर इन्हीं राज्यों में ही कोरोना दिखाई देने लगा। जिन राज्यों में रैलियां, रोड शो हुए, नेता बिना मास्क के इनमें शामिल हुए मीडिया को कुछ दिखाई नहीं दिया।

ज्यादाकर राज्यों में रात का कर्फ्यू लगाया गया है। यह भी समझ में नहीं आ रहा कि क्या कोरोना केवल रात को ही हमला कर रहा है? सारा दिन बाजार लोगों की भीड़ से भरे रहता हैं। लोग बाहर से खा-पी रहे हैं। क्या उस समय कोरोना का कोई खतरा नहीं है। ये तो कॉमन सैंस की बात है। क्या सरकार के पास इस बात का कोई तर्क है?

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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