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मां ने कहा, ‘बेटा मैं मरने लगी हूं’

Astro234

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मां अपने बच्चों पर हमेशा अपना हाथ रखती है। उन्हें वह हर खतरे से बचाती है। आप कम खाती है लेकिन अपने बच्चों के पेट में भोजन जाने से उसे जो तृप्ति मिलती है, वह वही जान सकती है। मां के जाने की पीड़ा वही बच्चा जान सकता है जिसने अपनी मां को खो दिया है। 

मेरी मां सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाती और देर रात तक घर के कामों में ही उलझी रहती। मेरी मां वैसे तो बीमार ही रहती थी लेकिन वह किसी तरह भोजन जरूर बना दिया करती थी। वह किसी भी हालत में अपने बच्चों को भूखा नहीं देख सकती थी। सायं को जब मैं खेल कर आया तो पाया कि मां बिस्तर पर लेटी कराह रही थी। वह बहुत ही तकलीफ में थी, उसके चेहरे पर दर्द  साफ दिखाई दे रहा था। मां ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा , बेटा अब मैं नहीं बचूंगी, मैं मरने लगी हूं। मेरे बाद तुम बच्चों का क्या होगा, कौन तुमको भोजन देगा कौन सहारा देगा

यह सुनकर मैं एकदम से रो पड़ा, मेरे को समझ नहीं आ रहा था कि मैं किसके पास जाऊं मदद के लिए। मैं रोता हुआ घर से बाहर भागा और कब तक भागता रहा कोई पता नहीं चला। जब थक गया तो बस रोने लगा। मेरा दर्द समझने वाला कोई नहीं था, मेरी मां हमेशा के लिए मुझे छोड़ रही है और मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं लाचार था।

जब मैं देर घर लौटा तो देखा कि मेरी मां मुझे छोड़कर जा चुकी थी। यह मेरे लिए जीवन का एक असहनीय कष्ट था। इस भरी दुनिया में मां के बिना अकेले रहना बहुत ही कष्टदायी था। सबु कुछ छिन चुका था, मां के जाने के बाद बच्चे को पता चलता है कि मां क्या होती है।

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं, जागरण डॉटकॉम किसी भी दावे, आंकड़े या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।

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