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प्राइवेट कर्मचारी हूं

hindi kavita

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कर्मचारी हूँ प्राइवेट

करता हूँ जॉब कोई

कमाता हूँ खाता हूँ न बड़ा

पर छोटे छोटे काम अनेक

बॉस भले न कोई आये

लेट आये फिर जाये चले

बॉस को न डर कोई

आये या फिर चाहे जाये

पर हूँ मै प्राइवेट

डट कर करना है जॉब

करता हूँ काम अनेक

सही सही हो सब काम

तो कोई बात नहीं

चल रहा है चलने दो

सुबह शाम जूझने दो

गर गलत हुआ कोई काम

तो लो फिर लाले लग गए

नोट हो गया रिकॉर्ड पर

धर दिए गए किनारे

नौबत यहाँ तक की आयी

दो चार बात उसने कही सुनाई

तो मै प्राइवेट

सोचा छोड़ूँ की करूँ

जेब ने आवाज़ लगाई

ठन ठन, मै फटा

फिर जा बैठा किनारे

आने लगा काम पर

जहर सुनने को नया

आस कोई नयी लिए

हम यहां फिर पधारे

BY MITHUN PAL

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, आंकड़े या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।

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