Menu
blogid : 27131 postid : 12

अंतर मन

Vinayd

  • 4 Posts
  • 1 Comment

अंतर मन में द्वंद छिड़ा है
कठिन परीक्षा मेरी है
अकुलाता मन संकुच सा
कुछ कहने को आतुर है
कहूं अभी पल भर में सब कुछ
या शायद कहने में देरी है

 

अंतर मन में द्वंद छिड़ा है
कठिन परीक्षा मेरी है
व्याकुल मन से कूके पपिहा
मेघों का भी क्रंदन है
बरसेंगी स्वाति की बूंदें
या प्रभात की फेरी है
अंतर मन में द्वंद छिड़ा है
कठिन परीक्षा मेरी है

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *