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रोमांटिक नज़रिया ….

dhairya
dhairya
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विदेशी-वस्तुओं के प्यासे तुम ….
देशी नुस्खे भूल पाते हो क्या …
मौज से पढ़ते हो अंग्रेजी के नाॅवेल
पर चाचा चैधरी को भुला पाते हो क्या …
फेसबुक पर करते हो घंटों चैटिंग
पर फीलिंग शेयर कर पाते हो क्या …
प्यार से परे इस नेटवर्किंग को छोड़
लव लैटर लिखने पर आ जाते हो ना
गर्ल फ्रेण्ड को भेजते हो ’हाई’ तुरंत
झट से आॅनलाइन हो जाते हो ना
नेट में आ जाये समस्या अगर
तो तुरंत बाइक उठाते हो ना …
एक सिक्का मांग दे कोई भिखारी यदि ..
तो नजर तुरंत हटाते हो ना
सौ रू का रीचार्ज यदि डेढ़ सौ का हो
झट से जेब ढीली करवाते हो ना ।
लग जाये मिर्ची भेलपुरी में तो
कलकत्ता मीठा लगवाते हो ना
बार में सुनते हो पाॅप म्यूजिक भले
पर डीजे पार्टी में कजरारे बजबाते हो ना ।
विदेशी शौकों के प्यासे तुम
देशी शौक भूल पाते हो क्या
हजारों की हो चाहे हाथ में बियर
पर चार रू की सिगरेट सुलगाते हो ना
गर्लफ्रेण्ड हो घर में फैमिली के साथ ..
पर ऐक-दो मिनट को बुलवाते हो ना
हंस कर कहे वो कि प्यार है मुझे
पर ना कहकर उसे रूलाते हो ना …
घर से मिसकाॅल हो तो ध्यान नहीं
पर गर्लफ्रेण्ड को रिस्पांस देते हो ना
उससे नहीं बनाते कोई बहाना
पर मम्मी से कहते हो ट्यूशन में था ना।
चलना-फिरना जिसने सिखाया तुम्हें
गर पड़ जाये तुम्हारी जरूरत उन्हें …
बेटा ! ज़रा मेरे साथ बाज़ार तक तो चल
तो झल्ला के गुस्से से कहते हो ’ना’ ..
विदेशियों के कल्चर से करते हो नकल
आ गई है उन्हें भी अब इतनी अकल
तुमने दख कर उन्हें वस्त्र छोटे कर दिए ..
आज वे ’बालाएं’ साड़ी में आ गईं हैं ना …..
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