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मैच तो फिक्सड है

sach mano to
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रहमान साहब आपने यह क्या कर दिया। अपनों पर ही भरोसा नहीं किया और उन्हें युद्ध में भेज दिया वो भी भारत के खिलाफ। लेकिन यह नहीं सोचा कि आपके अतिरिक्त रन खर्च करने से आपकी टीम मुसीबत में है। आपके होनहार खिलाड़ी होटल में दीवारों से बातें कर रहे हैं। दीवारों से ही मिलकर वे रो रहे हैं। पागल हो रहे हैं। एकाकीपन उन्हें अंदर से खाये जा रहा है। परिजनों का फोन टीम प्रबंधन के लोग रिसीव कर रहे हैं। किसी खिलाड़ी की पत्नी फोन करती हैं। पति से बात करा दीजिये तो प्रबंधन कहता है पहले साबित करो आप अफरीदी की ही मिसेज हैं। पहले ये बताइये, पहले वो बताइये। तरह-तरह के सवाल। मैच फिक्सर से आपका क्या संबंध है? अब भला यह बात तो अफरीदी ही बता सकते हैं कि फोन करने वाली है कौन? खैर, रहमान साहब। आपकी सोच बिल्कुल सही लेंथ पर है। इससे कभी भी खिलाड़ी थर्ड मैन से बात कर ही नहीं सकता। देश का गृहमंत्री हो तो आपके जैसा कि जैसे भी हो खिलाडिय़ों को खेल के अलावा कुछ और सोचने ही मत दो। क्रिकेट सोचेंगे तो क्रिकेट ही खेलेंगे। वैसे भी आपके टीम के पास सोचने के लिये और कुछ बचा भी नहीं है। ना परिवार ना ही मनोरंजन का कोई साधन। अब मन भटकेगा भी कैसे। मोबाइल, लैपटाप, इंटरनेट, टीवी, अखबार सबसे आपने उन्हें दूर कर दिया है। कप्तान भी आपसे बात करने के बाद खिलाडिय़ों से साफ तौर पर सचिन, वीरू, धोनी के बारे में ही सोचने को कहा है। सावधान, कुछ और सोचे कि इंटरपोल आ जायेगा। इससे कैसे बचोगे यह भी सोच लो। खिलाडिय़ों तुम्हारे आगे-पीछे, ऊपर-नीचे, दायें-बायें इंटरपोल के तार लटक रहे हैं। गलती करो, फांसी पर लटको। एक भी कैच टपकाया समझो खुद टीम से टपक गये। रन आउट हुये तो गये। थर्ड अंपायर गिलानी भी तुम्हारा नहा-धोकर मोहाली में मौजूद रहेंगे। उन्होंने भी इंटरपोल से साफ कह दिया है। पाक की आतंकवादी निरोधी अदालत की बात बाद में मानना। मुशर्रफ तो बाद में भी पकड़ा जायेगा लेकिन ये कमबख्त हमारे खिलाड़ी मैच फिक्सिंग कर मैच हार जायेगा। अगर हम हार गये तो पूरी टीम को बदल दूंगा। ट्राफी में आग लगा दूंगा। मगर गिलानी साहब आप नाहक परेशान हो रहे हैं। आईसीसी ने आपका काम आसान कर दिया है। पत्रकारों के कैमरे पर प्रतिबंध है। अब ना कोई झाकेगा ना ही आपका कोई खिलाड़ी पकड़ा जायेगा। वैसे बिन मांगे एक टिप्स दे रहा हूं। आपके खिलाड़ी बाथरूम में कुछ ज्यादा ही दीवारों से बातें करने लगे हैं। बात-बात में सोचते-विचारते वहीं से कोई बात बन गयी तो अल्लाह आप जानें और आपकी टीम। वैसे टीम इंडिया चुटकुले सुनने-सुनाने, टीवी देखने,घर का काम-काज निबटाने में लगी है। गैरी ने भी कह दिया है, योग करो भोग करो। विश्व कप तो फिर चार साल बाद आ जायेगा। वैसे भी हम मैच तो अतिरिक्त रन से ही जीत लेंगे। सचिन भी मेंटर की भूमिका में आ ही गये हैं। अब सौ इंटरनेशनल शतक पूरा हो न हो क्या फरक पड़ता है।
दृश्य दो
मोहाली में जश्न मनाया जा रहा है। गिलानी फोन लगा रहे हैं। गृहमंत्री कार्यालय में रिंग हो रही है कोई उठा ही नहीं रहा है। रहमान मलिक साहब का फोन बार-बार इंगेज, कभी स्वीच आफ बता रहा है। गिलानी कहते हैं अफरीदी को फोन लगाओ। फोन लगाया जाता है। अफरीदी से बात कराइये। आप कौन? मैं गिलानी बोल रहा हूं। अरे गिलानी हम तो तुम्हें ही ढूढ़ रहे थे। बड़े मैच फिक्सर बन रहे हो। अब चढ़े हो इंटरपोल के हत्थे। पाकिस्तान को हरा कर अब अफरीदी को खोज रहे हो। बताओ तुम्हारे साथ और कौन-कौन मिले थे। पाकिस्तान को हराने में। अरे मैं गिलानी बोल रहा हूं गिलानी। हां समझे गिलानी बोल रहे हो लेकिन पहले बताओ तुम्हारे साथ और कौन-कौन शामिल था मैच फिक्स करने में। अरे रहमान मलिक से बात नहीं हो पा रही है अफरीदी से बात कराओ। ओ अब समझा तेरे साथ रहमान मल्लिक भी था मैच फिक्सिंग में। अब बताता हूं तुम्हें। लाता हूं तुम्हारे सामने अफरीदी को तब ही खुलेगा रहस्य से पर्दा कि मैच फिक्स करने में अफरीदी के साथ और कौन-कौन शामिल था।

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