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प्रतिभा पलायन को रोकने का सार्थक प्रयास

NAV VICHAR

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भारत सरकार ने देश के विकास में युवको की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से कई ऐसी योजनाएं घोषित की है और उन पर अमल भी कर रही है . ऐसे ही “मेक इन इंडिया ” , “स्टार्टअप ” जैसे प्रोग्राम में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है . सरकार देश की युवा प्रतिभा के विदेशी आकर्षण को कम करने के लिए अनेक कोशिशें कर रही है जिससे देश की युवा प्रतिभा का इस्तेमाल देश में ही हो इसके लिए सरकार ने पिछले कुछ महीनो से ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास के लिए युवको को आकर्षित करने का प्रयास किया है जिसके फलस्वरूप देश के युवाओं में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने और वहां रोजगार करने की एक ललक सी पैदा हुई है . अब इसे उनकी सोच में आये परिवर्तन का नाम दिया जाये या लीक से कुछ अलग करने की उनकी इच्छा , लेकिन अपने देश के विकास को गति प्रदान करने की दिशा में ये एक शुभ संकेत है . इससे हमारे गावों की दिशा और दशा दोनों ही बदलेगी .पिछले कुछ वर्षों में हैदराबाद , बंगलूर आदि बड़े शहरों में आई टी और सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम करने वाले युवकों ने अपनी अच्छी खासी नौकरियां छोड़ कर गावों की तरफ अपना रुख किया है . ऐसा शायद उन्होंने आत्म संतुष्टि के लिए भी किया है क्योंकि उनका मानना है की शहरों की भागमभाग जिंदगी से वे ऊब चुके है और अब उन्हें प्रदूषण से दूर सुकून की जिंदगी जीने का मन है .
वास्तव में गावों में करियर बनाने की असीम सम्भावनाये भी है . एग्रो फार्मिंग , डेरी , पशुपालन , फिश फार्मिंग , आदि अनेक ऐसे काम है जो उन्हें अपनी तरफ आकर्षित कर रहे है . सबसे बड़ी बात उन्हें ये सब अच्छा लगता है और सुकून देता है . खेतों में समय गुजारना , किसानो के बीच काम करना , उन्हें खेती के नए तरीके बताना , उपज बढ़ने के नए तरीके समझाना , इन सब में उन्हें मजा आता है . युवाओं की कुछ अलग हटकर करने के जूनून ने कृषि को एक आकर्षक करियर बना दिया है . अब तो कई बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनिया भी ग्रामीण क्षेत्रों में अपने प्रोजेक्ट्स लगा रही है जिससे वहां रोजगार की अनंत सम्भावनाये पैदा हो गयी है. इन्ही कारणों से इन क्षेत्रों में रूरल मैनेजर्स और प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ गयी है . इतना ही नहीं देश के ग्रामीण क्षेत्रों में नयी तकनीक लाने और ग्रामीणो के बीच उन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए केंद्र सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है तभी तो डी डी पर किसान चॅनेल ही शुरू कर दिया गया है . आधुनिक तकनीक की जानकारियों से लैस ये युवा ग्रामीण और आदिवासी में रोजगार के साथ साथ हेल्थ और न्यूट्रिशन का काम भी देख सकेंगे जिससे कुपोषण के शिकार ग्रामीणो को स्वस्थ रहने के गुण भी सीखने को मिलेंगे . वास्तव में हम टेक्नोलॉजी की दुनिया में जी रहे है और आने वाले समय में तकनीक का दायरा और बढ़ता ही जायेगा . हम गावों में जितना ज्यादा तकनीक पहुचाएंगे उतना ही वहां की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में परिवर्तन आएगा . दरअसल खेती अब सिर्फ किसानो या गावों के गरीब लोगों का ही पेश नहीं रह गया है वरन अब वो अनेक सरकारी योजनाओं के कारण नै पीढ़ी को तेजी से अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है जो भारत जैसे देश के समुचित विकास के लिए एक नए मील का पत्थर साबित होगा .

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