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अब कैशलेस नहीं लेस कैश अर्थव्यवस्था

NAV VICHAR

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नोट बंदी के बाद देश में लगातार बदलते हालात के बीच अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने की गरज से केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्वे बैंक नित नए कदम उठा रही है पर कहीं न कहीं तैयारियों में कमी का संकेत मिल ही रहा है . केंद्र सरकार के नोट बंदी के निर्णय से पुरे देश में आम जनता को हो रही परेशानियों और बैंको में अपर्याप्त धन मुहैया होने से उपजी परिस्थितियों का सामना करने के लिए अभी तक केंद्र सरकार कैश लेस लेनदेन पर अधिक जोर दे रही थी पर इसके लिए आधारभूत सुविधाओं और ढांचे की जरुरत को महसूस करते हुए अब सरकार की कोशिश है की शहरों और महानगरो के साथ साथ ग्रामीण इलाकों में भी आम जनता को लेस कैश लेनदेन यानि नकदी द्वारा कम से कम लेनदेन को प्रोत्साहित किया जाये . पिछले दिनों हुए सर्वे के अनुसार जबतक गांव और दूर दराज़ के इलाकों में इन्टरनेट , फोन की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पाती तबतक कॅश लेस की अवधारणा सफल नहीं हो सकती , इन्ही कारणों से अब सरकार नकदी के कम उपयोग को बढ़ावा देने की कोशिश में है . दूसरी तरफ पे टी एम् , स्टेट बैंक बडी ,और भुगतान के अन्य माध्यमो और स्रोतों के बारे में जानकारी दी जा रही है . आम जनता को इनके उपयोग करने के तरीके बताने के साथ ही साथ इससे होने वाले लाभ की जानकारी भी दी जाए . यद्यपि ग्रामीण क्षेत्रो में कम पढ़े लिखे लोगों के बीच इसे लोकप्रिय बनाना आसान नहीं है . बावजूद इसके प्रधान मंत्री कार्यालय कैशलेस लेनदेन को लोकप्रिय बनाने और इसके सुचारू सञ्चालन के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करने और अन्य महत्वपूर्ण अध्यन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है . सरकार की मंशा है की लोगों में नकदी में लेनदेन करने की आदत कम हो और वे मोबाइल के जरिये आसानी से लेनदेन कर सकें . इससे बाजार में कॅश का प्रवाह कम होगा जिससे भ्रष्टाचार , चोर बाज़ारी, कालेधन समेत कई समस्याओं का समाधान स्वयम ही हो जायेगा . इस दिशा में कुछ बैंक तेजी से प्रयास कर रहे जिसमे ऐ टी एम् पर अगूंठे द्वारा भुगतान की सुविधा भी शामिल है . इसके अतिरिक्त सरकार ऐसे लोगो के लिए भी एटीएम् की सुविधा मुहैया करने की योजना बना रही जिनके पास न तो कोई बैंक खाता है , न डेबिट कार्ड है और न मोबाइल बैंकिंग है , अब उनके लिए उनका आधार कार्ड ही डेबिट कार्ड की तरह काम करेगा . इसके जरिये किसी भी सामान की खरीदारी अपना आधार नंबर बताकर और ऊँगली की छाप देकर की जा सकती है इतना ही नहीं माइक्रो ऐटीम से पैसा भी निकाला जा sakta मंत्री द्वारा बनायीं गयी कमेटी को हिदायत दी गयी है की उन्हें युद्ध स्तर पर काम करके उन उपायों पर विचार करना है और रणनीति बनानी है जिसके माध्यम से कैशलेस तरीको को आम जनता के बीच तेजी से लोकप्रिय बनाया जा सके जिससे उन्हें वर्तमान में हो रही समस्या से निजात दिलाई जा सके .ये कमेटी इस पर भी काम करेगी की इसके लिए किस प्रकार के बुनियादी ढांचे की जरुरत है . केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद इस योजना पर काम कर रहे है . ये बात सच है की आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है . अभी तक इस दिशा में कोई सोचता भी नहीं था परंतु नोट बंदी से पैदा हुए संकट ने शहरो के साथ साथ गांव में भी लोगो को कैशलेस भुगतान की प्रक्रिया से जोड़ दिया है .
बिहार के पटना में ठेले पर गोलगप्पे बेचने वाले से लेकर चाय की छोटी दुकान लगाने वाले दुकानदार भी अब पे टी एम् से भुगतान ले रहे है . नोटों के विमुद्रीकरण के बाद ही सही लोगो की सोच में बदलाव आ रहा है , अभी तक जो लोग ऑनलाइन खरीदारी से डरते थे, नेटबैंकिंग के इस्तेमाल से डरते थे , इस संकट के बाद वे इन माध्यमो का प्रयोग कर रहे है और ऐसी सरल विधि को एन्जॉय भी कर रहे है . अभीतक केवल पढ़े लिखे लोग और युवा ही इनका इस्तेमाल करते थे . लेकिन लगातार विज्ञापनों के आने से और बैंको के बाहर लंबी लंबी कतारों को देखकर मजबूरी में ही सही वे कैशलेस माध्यमो का प्रयोग कर रहे है . पिछले दिनों टी वी पर आयी एक खबर ने एक सुखद एहसास दिलाया . गुजरात के एक छोटे से शहर के बाजार में लगी चाय , काफी , चाट की गुमटियों में भी कैशलेस भुगतान की सुविधा उपलब्ध है . ग्राहकों के लिए जहाँ इससे आसानी है वही दूसरी तरफ छोटे दुकानदार इससे बहुत खुश नज़र आये क्योंकि नोट बंदी के बाद एक दो दिन उनकी दुकानों पर ग्राहक नदारद थे पर कैशलेस सुविधा अपनाने के बाद उनकी बिक्री में अचानक बढ़ोत्तरी हो गयी. यद्यपि अपने देश में ये विकल्प पहले से मौजूद था पर हमारे में एक हिचक थी .पर नोट बंदी के बाद लोग खुले मन से इसे अपना रहे है ,ये देश की अर्थव्यस्था के लिए बेहतर है . केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में किये जा रहे प्रयास अगर सार्थक सिद्ध हुए तो जल्द ही सबकुछ सामान्य होने लगेगा और आम जनता की परेशानिया भी समाप्त हो जाएँगी . .

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