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“दर्द बांटने से कम होता है”

mam22

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हर रोज हम सभी अपनी जिंदगी में तमाम मुश्किलों का सामना करते हैं। कई बार ऐसे हालात आते हैं जिन्हें हम चाहकर भी संभाल नहीं पाते हैं। तो कई बार उनसे निपटते हुए हमें भारी टेंशन का सामना करना पड़ता है।

तनाव लंबे वक्त तक रहे तो ये हमारे इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा बाहरी बीमारियों से निपटने की हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमता भी प्रभावित होती है।

आजकल होने वाले तनाव के कुछ सामान्य कारण हैं। जैसे – काम, बेरोजगारी, पार्टनर से बनना या करीब न होना , नौकरी में बदलाव होना, बच्चों का घर छोड़ कर जाना ,हिंसा या बुरे व्यवहार का शिकार होना।

टेंशन से होने वाले सामान्य लक्षण हैं जैसे :- सामान्य से ज्यादा या कम भोजन करना, तेजी से मूड बदलना, आत्मसम्मान में कमी आना, हर वक्त टेंशन या बेचैनी महसूस करना। ज्यादा या कम सोना, भूलने की समस्या होना , जरुरत से ज्यादा थकान या ऊर्जा में कमी होना, परिवार और दोस्तों से दूर-दूर रहना, ध्यान केंद्रित न करना, उन चीजों में भी मन न लगना जो पहले आपको पसंद थीं।

ये कहावत काफी पुरानी है कि ‘दर्द बांटने से कम होता है’। लेकिन यकीन मानिए ये बात सच है। ये लोगों को बताने के लिए नहीं है, ना ही ये साबित करने के लिए है कि आप जरुरत में हैं और किस दौर से गुजर रहे हैं। बल्कि ये उनसे समझने के लिए है|

यकीन मानिए कई बार जब हम टेंशन में होते हैं तो आसान से उपाय भी हमारे दिमाग में नहीं आते हैं। लेकिन दूसरे वही बात सुनकर हमें ऐसे रास्ते सुझा देते हैं जो हमारी हर मुश्किल को आसान बना देते हैं। इसलिए खुलकर संवाद करना भी बहुत जरूरी है। वैसे भी किसी से बात करना कौन सी बड़ी बात है।

किसी से बात करना, कपड़े धोने, कार धोने या कंप्यूटर पर गेम खेलने जैसा ही छोटा सा काम है। इसलिए ईमानदारी से बात रखिए, दोस्तों व अपने नजदीकी को हर वो बात बता दीजिए जो आपको परेशान कर रही है।

दूरियाँ मिटाने से मिटती है , नजदीकियां मिलने से बढ़ती है !
दर्द बांटने से कम होता है , खुशियां बांटने से बढ़ जाती है !!

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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