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नेवले की अवैध तस्करी के मामले चिंता का विषय

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भारत में वन्यजीव सप्ताह अक्टूबर के महीने में 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है। सप्ताह का उद्देश्य लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण के बारे में जागरूक बनाना व वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व पर लोगों का ध्यान केंद्रित करना है। प्राचीन काल से, हमारे महाकाव्यों और हमारे इतिहास के साथ; हमारी पौराणिक मान्यताओं और हमारे folklores के साथ हमारे वन्य जीवों का निकट संबद्ध रहा है. विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों से ही प्रकृति के संतुलन का निर्माण होता है इन के बिना हमारा जीना दूभर हो जायेगा.

हर वर्ष अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में केंद्र व राज्य सरकारों, पर्यावरणविदों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों आदि द्वारा लोगों में वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता में तेजी लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है इस वर्ष वन्य जीव सप्ताह को “Sustaining all life on earth” थीम के अंतर्गत मनाया जा रहा है आज इस क्रम में माटी संस्था ने इस कार्यक्रम की शुरुवात करते हुए सप्ताह के पहले दिन एक छोटी, नुकसान ना पहुंचाने वाली व पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली प्रजाति नेवले पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है.

नेवला हमारे आसपास सबसे आम देखी जाने वाली प्रजातियों में से एक है जो एक नुकीले चेहरे और एक झाड़ीदार पूंछ वाला जीव हैं। नेवला कृंतक नहीं हैं। वे हर्पेस्टीडे परिवार के सदस्य हैं।अफ्रीका में नेवल की 34 प्रजातियां पाई जाती हैं, और बाकि कुछ दक्षिणी एशिया में भी रहती हैं। भारत में छह प्रजातियां पाई जाती है जो है इंडियन ग्रे मंगूज, रूडी मंगूज, स्मॉल इंडियन मंगूज, क्रैब-ईटिंग मंगूज, स्ट्राइप-नेक्ड मंगूज, ब्राउन मंगूज। पूरे भारत में आम तौर में दो प्रजातियाँ, स्मॉल इंडियन मंगूज और इंडियन ग्रे मंगूज देखी जाती हैं जो अलग अलग जल वायु में मिलती है। नेवला मिट्टी में बिल या सुरंग बनाकर रहते हैं।

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार, ज्यादातर नेवले की प्रजातियों को Least concern श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है । नेवला, भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II (भाग II) के तहत संरक्षित है । जैसा कि हम में से कई लोग यह नहीं जानते हैं कि हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले पेंट ब्रश आम तौर पर नेवले के बालों से बनाए जाते हैं। कच्चे बाल देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं लेकिन एक अध्ययन के अनुसार ज्यादातर मामले उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में में पाए गए हैं।

नेवले के बालों से बने ब्रशों की तस्करी की जाती है और नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते भारत से बाहर निर्यात किया जाता है। इन हेयरब्रशों का व्यापार राइनो हॉर्न्स और टाइगर पेल्ट्स से काफी अलग है। उनके अंतिम उपयोगकर्ता व्यापक हैं और, ज्यादातर मामलों में, उन्हें पता नहीं है कि हेयरब्रश अवैध हैं। वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, नेवले के बालों के पेंटब्रश के एक निर्माता पर गैरकानूनी रूप से बालों को रखने और ब्रश बनाने के लिए जुर्माना लगाया जा सकता है। कलाकारों और आम जनता को यह जानने की जरूरत है और नेवले के बालों से बने ब्रश का उपयोग करना बंद करें।

नेवले की संख्या में आने वाली गिरावट व इसकी अवैध तस्करी के मामलों की बढ़ती सँख्या के कारण इस प्रजाति के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है माटी संस्था इस प्रजाति की वर्तमान स्थिति, इसकी तस्करी और इसके डी एन ए (DNA) के विषय में भी शोध कर रही है व् इसके संरक्षण हेतु प्रयासरत है। इस प्रजाति के संरक्षण हेतु हम सबको मिलकर काम करने की आवश्यकता है इस क्षेत्र में जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य व् लोगो को इस प्रजाति के विषय में अवगत कराने के लिए माटी संस्था ने वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के पहले दिन विभिन्न डिजिटल माध्यमों के द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया ।

Ms Shefali Rana (Research Fellow) and Dr Ankita Rajpoot (Scientist)
Maaty Organization, Dehradun
contact@maaty.org

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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