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जरूरत है रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया

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कोरोना कोविड 19 आज दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कोविड 19 का संक्रमण भारत में भी फैल रहा है। इसके संक्रमित मरीज देश में कम ही मिल रहे हैं यह राहत की बात है। सोमवार 30 मार्च को शाम लगभग 06 बजे तक देश भर में कुल 1269 मरीज मिले हैं, इनमें से 1133 का ईलाज जारी है, 104 स्वस्थ्य हो चुके हैं और 32 का निधन हो चुका है। सबसे ज्यादा मरीज केरल में 234, महाराष्ट्र में 216, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में 88, 88 मरीज मिले हैं। देश के हृदय प्रदेश की बात की जाए तो मध्य प्रदेश में शाम छः बजे तक कुल 47 मरीज मिले, जिनमें सबसे ज्यादा मरीज इंदौर में मिले हैं जिनकी तादाद 27 है।

 

 

हम आपको बताते हैं कि मनुष्यों में किस आयु वर्ग पर इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा है। चिकित्सकों के अनुसार इस वायरस या विषाणु की संक्रामकता एवं मारक क्षमता का निर्धारण मानव की आयु के हिसाब से किया जा रहा है। इस बारे में अब तक जो बातें सामने आईं हैं उसके अनुसार इसकी संक्रमणता और मारकता बुजुर्गों और बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकती हैं। एक अनुमान के अनुसार विदेशों में अब तक पाए गए कोविड 19 के मरीजों में से 80 फीसदी मरीजों के अंदर इसके लक्षण बहुत ही सौम्य पाए गए हैं। अर्थात यह ज्यादा घातक नहीं है। 15 फीसदी लोगों में इसके लक्षण कुछ ज्यादा तीव्र पाए गए और महज पांच फीसदी लोगों में एआरडीएस अर्थात श्वसन तंत्र संकट सिंड्रोम भी मिलते हैं।

 

हमारा उद्देश्य आपको डराना या भय पैदा करना कतई नहीं है, पर इस वायरस के संक्रमण से बचने के संभावित उपायों आदि पर चर्चा भी जरूरी है। आप अपने घरों में रहें, घरों से बाहर न निकलें, सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी को बरकरार रखें। इसमें एक बात और उभरकर सामने आ रही है कि इसकी घातकता बहुत ज्यादा नहीं है। इस वायरस के संक्रमण की जद में आने वाले महज ढाई फसदी मरीज ही काल कलवित हुए हैं। इसमें यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि इटली और चीन में अगर देखा जाए तो इसमें से भी ज्यादा लोग साठ साल से अधिक आयु वाले हैं। अस्सी साल से ज्यादा आयु वाले लोगों की मृत्युदर इटली में 14 फीसदी तो चीन में 10 फीसदी सामने आई है। बीस साल से कम आयु वालों की मृत्युदर 0.3 फीसदी एवं 09 साल तक की आयु वालों की मृत्युदर 07 फीसदी है।

 

 

चिकित्सकों का कहना है कि इस पूरे मामले में वायरस की घातकता की अगर बात की जाए तो इस वायरस की दज में आने वाले लोगों की मृत्युदर में आयु बहुत बड़ा फेक्टर उभरकर सामने आ रहा है। इटली की ही बात की जाए तो इटली में 65 साल से अधिक वाले लोगों की तादाद कुल जनसंख्या का 22 फीसदी होने से वहां मृत्युदर बहुत ज्यादा है। इससे उलट भारत में कुल जनसंख्या का महज 6.4 फीसदी हिस्सा ही 65 साल से अधिक आयुवर्ग का है। इसलिए इस लिहाज से भारत में खतरा बहुत ज्यादा नहीं माना जा सकता है।

 

 

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा देश के बहुत सारे चिकित्सकों से चर्चा और इंटरनेट पर जो जानकारियां हैं, उनके अनुसार यह निश्कर्ष निकाला है कि बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल की ज्यादा जरूरत है। वैसे तो देखभाल और सावधानी बरतने की आवश्यकता सभी को है, पर बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें। वैसे भी मौसम बार बार करवट बदल रहा है। इस मौसम में सर्दी खांसी और बुखार होना सामान्य बात है, पर सभी को कोविड 19 के लिए बार बार दी जाने वाली समझाईशों, सावधानियों, प्रोटोकॉल आदि का पालन कड़ाई से करने की जरूरत है।

 

 

द्वारा लगातार आपसे अपील की जा रही है कि घरों से न निकलें, घर पर ही रहें, सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी को बरकरार रखें। तीन सप्ताह के टोटल लॉक डाऊन में से एक सप्ताह बीतने को है, जैसे यह बीता वैसे ही दो सप्ताह कैसे बीत जाएंगे आपको पता भी नहीं चल पाएगा।
लिमटी की लालटेन के अगले अंक में हम आपको चिकित्सकों से चर्चा के आधार पर जो बातें प्रमुखता से निकलकर सामने आई हैं, उस बारे में आवगत कराएंगे। तब तक इंतजार कीजिए . . .

 

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं और इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार हैं।

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