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कोविड 19: इस पर किया जाना चाहिए ध्यान केंद्रित

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया

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कोरोना कोविड 19 वायरस के संक्रमण के कारण दुनिया भर में तहलका मचा हुआ है। सभी देश इसका संक्रमण कम से कम फैले इसके उपाय करने में जुटे दिख रहे हैं। कोरोना कोविड 19 से निपटने के लिए अभी तक कोई दवा विकसित नहीं हो पाई है।सावधानी रखते हुए सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रखना ही वर्तमान में मूल मंत्र माना जा रहा है।

 

 

क्या भारतीयों में कोविड 19 से बचने की बेहतर संभावना है! यह बात भी इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर चल रही है। इसी संभावनाओं को टटोलने के लिए समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा देश के अनेक ख्याति लब्ध चिकित्सकों से चर्चा की गई। उनके द्वारा जो बातें समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताई गईं उसे आज हम आपसे साझा करना चाह रहे हैं।

 

 

 

चिकित्सकों का मानना है कि कोविड 19 महामारी का संक्रमण तीन बातों पर निर्भर करता है। अव्वल तो कारण अर्थात इस वायरस की संक्रमणता और उसकी घातकता। दूसरी बात यह है कि संक्रमित होने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कितनी है और तीसरी प्रमुख बात यह है कि इस वायरस के लिए कितना अनुकूल वातावरण मिल रहा है।

 

 

 

हमारा उद्देश्य आपको डराना या भय पैदा करना कतई नहीं है, पर इस वायरस के संक्रमण से बचने के संभावित उपायों आदि पर चर्चा भी जरूरी है। आप अपने घरों में रहें, घरों से बाहर न निकलें, सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी को बरकरार रखें।
चिकित्सकों से चर्चा के उपरांत यह बात सामने आई है कि यदि इस वायरस की संक्रमकता ज्यादा है तो यह ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसकी मारकता अगर ज्यादा है तो यह ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी जद में लेकर गंभीर स्थिति तक पहुंचा सकता है।

 

 

 

दूसरी बात कि अगर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर है तो इस वायरस के असर से काफी हद तक बचा जा सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए तरह तरह की दवाओं का वितरण भी किया जा रहा है। आप चिकित्सकों की सलाह पर इस तरह की दवाओं का सेवन जरूर करें।

 

 

इस वायरस के फैलाव के लिए अगर अनुकूल वातावरण नहीं मिलता है तो देश में यह महामारी बहुत ज्यादा फैलने से रोका भी जा सकता है। इसीलिए प्रधानमंत्री सहित सभी लोगों के द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।
चिकित्सकों की मानें तो भारत देश के परिवेश में कारक अर्थात वायरस, आब्जेक्ट अर्थात व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं इस वायरस के फैलने के लिए अनुकूल माहौल कौन सा हो सकता है इस पर अगर ध्यान केंद्रित कर दिया जाए तो इस महामारी से काफी हद तक निपटा भी जा सकता है।

 

 

 

लिमटी की लालटेन के अगले अंक में हम आपको चिकित्सकों से चर्चा के आधार पर जो बातें प्रमुखता से निकलकर सामने आई हैं, उस बारे में आवगत कराएंगे। तब तक इंतजार कीजिए . . .

 

 

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी ​विचार हैं, इसके लिए स्वयं उत्तरदायी हैं।

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