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महज 21 दिन में साई मंदिर के रिकॉर्ड दिए गए

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया

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0 साई के बाद साई का मंदिर विवादों में . . . 6
महज 21 दिन में साई मंदिर के रिकॉर्ड दिए गए बदल!
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। नगझर स्थित भव्य साई मंदिर की जमीन के मालिकाना हक को लेकर रार एक साल से चल रही है। इस जमीन के दस्तावेजों में बिना किसी को सूचना दिए ही महज इक्कीस दिन में नायब तहसीलदार ने शानदार काम का परफार्मेंस जताते हुए दस्तावेजों में मालिकाना हक बदल दिया जो इस तरह का संभवतः आजाद भारत का पहला ही मामला होगा, जो इस रिकॉर्ड अवधि में निपटा हो।
पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस वर्ष फरवरी में साई मंदिर के कोषाध्यक्ष रहे शरद अग्रवाल द्वारा नगर निरीक्षक को दिए गए आवेदन में कहा गया था कि ओम श्री साई संस्थान के द्वारा साई मंदिर के लिए जो जमीन खरीदी गई, उस जमीन का मालिकाना हक दस्तावेजों में बदलकर ओम श्री शिरडी साई मंदिर, सचिव प्रसन्न चंद मालू के नाम पर कर दिया गया।
पुलिस सूत्रों ने आगे बताया कि अपने आवेदन में शरद अग्रवाल ने कहा है कि नायब तहसीलदार राजेश बौरासी के कार्यकाल में संशोधन प्रपत्र का पालन 18 वर्ष के उपरांत जब 15 फरवरी 2012 को प्रसन्न चंद मालू के द्वारा आवेदन प्रस्तुत किया गया तब उसके उपरांत बिना किसी सूचना एवं बिना किसी मूल दस्तावेज के मात्र फोटो कॉपी के आधार पर राजस्व अभिलेखों में परिवर्तन करा दिया गया।
सूत्रों की मानें तो शरद अग्रवाल का आरोप था कि इस प्रकार संशोधन कराने वाले सचिव प्रसन्न चंद मालू, डॉ.के.एल.मोदी, उप पंजीयक श्याम मेश्राम एवं नायब तहसीलदार राजेश बौरासी के द्वारा षणयंत्र कर फर्जी पावर ऑफ अटर्नी को आधार मानकर उप पंजीयक से साई संस्थान की वर्ष 1992 की असल रजिस्ट्री में संशोधन कर, नायब तहसीलदार राजेश बौरासी द्वारा महज 21 दिनों में ही नामांतरण कर दिया गया।
उधर, राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि अगर शरद अग्रवाल के आरोप सही हैं तो यह गंभीर अनियमितता की श्रेणी का मामला है। इसमें नायब तहसीलदार रहे राजेश बौरासी के कार्यकाल के अन्य नामांतरणों की जांच भी की जाना चाहिए। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि नामांतरण में असली दस्तावेज हर कीमत पर पेश करना होता है। अगर असली दस्तावेज खो जाएं तब शपथ पत्र एवं अन्य प्रक्रियाओं से नामांतरण हो सकता है, पर यह एक जटिल प्रक्रिया है।
बहरहाल, पुलिस सूत्रों का कहना है कि नगझर स्थित साई मंदिर के सचिव रहे शरद अग्रवाल का आरोप था कि इस तरह अनुचित लाभ उठाने की चेष्टा से बेईमानी पूर्वक प्रसन्न मालू और अन्य लोगों के द्वारा समिति के सदस्यों और साई भक्तों को अंधेरे में रखते हुए चोरी-चोरी फर्जी दस्तावेज के आधार पर धोखा धड़ी की गई है इसलिए इनके खिलाफ धारा 420, 421, 423, 467, 468 एवं 120 बी भा.द.वि. के तहत प्रकरण दर्ज होना चाहिए।
(क्रमशः जारी)

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