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बिना सूचना के ही पारित कर दिया एक पक्षीय आदेश

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया

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साई के बाद अब साई का मंदिर विवादों में . . . 2
बिना सूचना के ही पारित कर दिया एक पक्षीय आदेश
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। नगझर स्थित शिरडी के साई बाबा मंदिर के जमीन का विवाद थमता नहीं दिख रहा है। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी न्यायालय द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि नायब तहसीलदार कोर्ट के द्वारा शरद अग्रवाल को सूचना दिए बिना एवं सुनवाई किए बिना ही जो आदेश पारित किया गया है, वह त्रुटिपूर्ण है। इसमें श्री शिरडी साई मंदिर सिवनी, सचिव प्रसन्न चंद मालू का नाम हटाकर अब पूर्व में श्री शिरडी साई संस्थान, सिवनी के नाम से संशोधन कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 अक्टूबर को पारित आदेश में यह कहा गया है कि निचले न्यायालय द्वारा अपीलार्थी (शरद अग्रवाल) को सूचना दिए बिना एवं सुनवाई किए बिना ही पांच जून 2012 को जो आदेश पारित किया गया था, वह त्रुटिपूर्ण है। ग्राम सिमरिया की भूमि खसरा नंबर 113/3 जिसका रकबा .40 हेक्टेयर है, उसे 11 जून 1992 के विक्रय पत्र के आधार पर श्री शिरडी साई संस्थान सिवनी के नाम पर नामांतरण पूर्व में किया गया था।
बताया जाता है कि इस आदेश में आवश्यक जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए बिना ही नामांतरण की कार्यवाही करवाई गई थी, साथ ही साथ नायब तहसीलदार कोर्ट के द्वारा समस्त और मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने के लिए आवेदकों को नहीं कहा गया था। इसके साथ ही साथ पटवारी से वर्तमान स्थिति का प्रतिवेदन भी नहीं लिया गया था।
बताया जाता है कि 1992 में इस भूखण्ड को जिस पर नगझर का साई मंदिर बना है उसके विक्रेता सुश्रुत आत्मज सुधीर बाभुलकर, निवासी रामदास पेठ, नागपुर थे, बाद में उसी दस्तावेज के संशोधन में बेचने वाले डॉ.के.एल.मोदी आत्मज स्व.हरिशचंद्र मोदी निवासी, नेहरू रोड, सिवनी हो गए हैं। इसके तहत दोनों ही दस्तावेजों में अंतर पाया गया है। निम्न न्यायालय के द्वारा 30 सितंबर 1993 को पारित आदेश के उपरांत दो जून 2012 को उसी भूमि का संशोधित आदेश पारित कर दिया गया है।
बताया जाता है कि अपने निर्णय में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सिवनी ने कहा है कि सिमरिया ग्राम की भूमि खसरा नंबर 113/3 जिसका रकबा .40 हेक्टेयर है का दूसरी बार जो नामांतरण आदेश पारित किया गया है वह अवैधानिक होकर त्रुटिपूर्ण होने के कारण स्थिर रहने के योग्य नहीं है। अतः इस नामांतरण को पुनः दुरूस्त करने के लिए निम्न न्यायालय को भेजा जाए।
बताया जाता है कि जिस भूमि पर नगझर का साई मंदिर बना है उस भूमि के खसरे में इस आदेश के उपरांत 13 नवंबर को एक बार फिर दुरूस्त कर उस भूमि पर कब्जेदार का नाम श्री शिरडी साई संस्थान सिवनी का नाम दर्ज कर दिया गया है। जबकि इसमें विक्रय पत्र के उपरांत दूसरी बार किए गए संशोधन में श्री शिरडी साई मंदिर सिवनी, सचिव प्रसन्न चंद मालू, आत्मज स्व.प्रेम चंद मालू निवासी सिवनी, ओम श्री शिरडी साई मंदिर सिवनी कर दिया गया था।
(क्रमशः जारी)

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