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बदल दिया गया साई मंदिर का मालिकाना हक!

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया

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साई के बाद साई का मंदिर विवादों में . . .4
बदल दिया गया साई मंदिर का मालिकाना हक!
0 संस्थान के बजाए साई मंदिर, सचिव प्रसन्न मालू के नाम पर दर्ज हो गई जमीन
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। नगझर स्थित भव्य साई मंदिर विवादों में घिर जाने से साई भक्तों में निराशा पनप रही है। साई मंदिर के निर्माण से लेकर अब तक अनेक तरह की विवादित बातें सामने आती जा रही हैं। आश्चर्यजनक रूप से साई मंदिर के लिए खरीदी गई जमीन का मालिकाना हक ही बदलने की बात भी प्रकाश में आई है।
कोतवाली पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि साई मंदिर के निर्माण के लिए नागपुर के डॉ.बाबुलकर से खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री, खसरा और भूऋण पुस्तिका में भी ओम श्री शिरडी साई संस्थान का नाम दर्ज था। फरवरी में इस संस्थान के कोषाध्यक्ष रहे शरद अग्रवाल ने कोतवाली में दिए आवेदन में कहा था कि 16 मई 2012 तक इस संस्थान के अध्यक्ष के द्वारा जब रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया तब उन्होंने पाया कि इसमें ओम श्री शिरडी साई संस्थान का नाम दर्ज था।
सूत्रों ने आगे बताया कि मई 2013 में उन्हें किसी के माध्यम से यह ज्ञात हुआ कि खसरा नंबर 113/3 की भूमि पर साई मंदिर का नाम बदलकर राजस्व रिकॉर्ड में ओम श्री शिरडी साई मंदिर सिवनी, सचिव प्रसन्न चंद मालू पिता स्व.प्रेम चंद मालू को भूस्वामी बना दिया गया।
सूत्रों के अनुसार शरद अग्रवाल के द्वारा जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाही गई तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं। 21 मई 2013 को उन्हें आरटीआई के तहत जानकारी मिली कि नायब तहसीलदार सिवनी भाग दो के द्वारा 5 जून 2012 को प्रकरण क्रमांक 70/ अ-6/ 2011-12 में आदेश पारित कर मंदिर का पुराना नाम बदलकर ओम श्री शिरडी साई मंदिर, सचिव प्रसन्न चंद मालू आत्मज स्व.प्रेम चंद मालू अंकित कर दिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद शरद अग्रवाल के द्वारा ट्रस्ट के अपरिवर्तनीय संस्थापक सदस्यों के रूप में अपने पारिवारिक सदस्यों का समावेश कर शेष परिवर्तनीय सदस्यों में कुछ अन्य लोगों को शामिल कर न्यास बनाने के प्रकरण में चुनौति देते हुए कहा कि जब यह भूमि ही नवीन नाम से गठित किए जाने वाले न्यास के नाम पर नहीं है अतः इसका गठन न किया जाए।
(क्रमशः जारी)

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