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संबंधों में भी मुनाफा चाहते हैं पुरुष !!

men and lady bossआमतौर पर हमारी फिल्मों में यह दिखाया जाता है कि पुरुष अकसर अपनी महिला बॉस में बहुत अधिक दिलचस्पी लेते हैं. इतना ही नहीं वह उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कुछ ना कुछ करते ही रहते हैं, जिसका असर उनके काम पर तो पड़ता ही है साथ ही साथ ऑफिस में भी उनकी छवि रोमियो की बन जाती है. ऐसा माना जाता है कि फिल्में वहीं दर्शाती हैं जो हमारे समाज की वास्तविकता होती हैं.


लेकिन क्या हकीकत में पुरुष इसी तरह लेडी बॉस को देखते ही दिल दे बैठते हैं या यह सिर्फ एक फिल्मी कहानी मात्र होती है?


अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोचते हैं कि पुरुष अपनी महिला बॉस के साथ इश्क फरमाने का एक भी मौका नहीं गंवाते, तो शायद हाल ही में हुआ एक सर्वे आपके इस भ्रम को दूर कर सकता है. एक ब्रिटिश वेबसाइट द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण के नतीजे यह स्पष्ट कर देते हैं कि पुरुष संबंध बनाते समय ओहदे का भी खास ध्यान रखते हैं. वह कभी ऐसे रिश्ते में नहीं बंधना चाहते जिसके कारण उन्हें अपनी जॉब या आत्मसम्मान को हानि पहुंचे.


आस्कमैन नामक इस वेबसाइट की मानें तो यह साफ प्रमाणित होता है कि पुरुषों में अहम की भावना महिलाओं से कहीं अधिक होती है इसीलिए वह कभी अपने से ऊंचे ओहदे वाली महिला को प्रेमिका या पत्नी के रूप में नहीं देखना चाहते.


इसके अलावा पुरुषों के बारे में यह भी माना जाता है कि वे अपने साथी के प्रति ईमानदार नहीं रहते, वह अपनी प्रतिबद्धता का निर्वाह भली प्रकार नहीं कर पाते. अपने इसी स्वभाव के कारण वह अपनी लेडी बॉस से दिल लगाने में घबराते हैं. उन्हें यही डर सताता रहता है कि कहीं अगर उनसे कोई गलती हो गई, संबंध में कोई उंच-नीच हो गई तो उनकी महिला बॉस अपनी ताकत और पहुंच का इस्तमाल करते हुए उनका कॅरियर खराब कर सकती है.


यह शोध अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के लगभग 70 हज़ार पुरुषों के विचारों पर आधारित है, जिसमें से अधिकांश लोगों ने यह स्वीकार किया है कि वह अपनी जूनियर के साथ इश्क फरमाने में बहुत सहज महसूस करते हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यहीं है कि जूनियर के साथ संबंध बनाना बहुत आसान होता है और वह हमेशा उनकी बात भी सुनती हैं. अगर कोई गड़बड़ हो भी गई तो भी परिस्थितियां उन्हीं के हित में रहेंगी.


पुरुषों की इस मानसिकता से तो यह स्पष्ट हो जाता है कि संबंध बनाते समय पुरुष, भावनाओं से कहीं ज्यादा महत्व अपने नफा-नुकसान को देते हैं. वह कभी भी ऐसे संबंध की पहल नहीं कर सकते जिसका कोई भी नकारात्मक प्रभाव उनके कॅरियर या नौकरी पर पड़े.


यह सर्वे विदेशी वेबसाइट द्वारा, विदेशी पुरुषों पर करवाया गया है इसीलिए इस सर्वेक्षण के नतीजों को भारतीय पुरुषों से संबंधित करना तर्कसंगत प्रतीत नहीं हो सकता. क्योंकि मनुष्य की मानसिकता बहुत हद तक उसके आस-पास के वातावरण और सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं. भारत के संदर्भ में अगर बात की जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यद्यपि भारतीय समाज संबंधों के प्रति गंभीर है लेकिन कहीं ना कहीं संबंधों को नफा-नुकसान के तराजू में तोलने वाली यह विदेशी मानसिकता भारत में भी अपने पांव पसारने लगी है. खासतौर पर पुरुषों की बात की जाए तो यह आमतौर पर देखा जा सकता है कि आजकल उनकी यह भौतिकवादी मानसिकता प्रबल रूप से उनके संबंधों पर हावी होनी शुरू हो गई है. पुरुष ही नहीं कई ऐसी महिलाएं भी हैं जो अपने हित साधने के लिए संबंधों का प्रयोग करती हैं.


ब्रेक-अप, पैच-अप जैसी अवधारणाएं आजकल के युवाओं में फैशन का हिस्सा बन गयी हैं. कॅरियर को प्राथमिकता कोई गलत बात नहीं है. किसी भी संबंध की पहल करने से पहले हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि संबंधों से खिलवाड़ करना भले ही हमारी आदत या शौक हों, लेकिन इससे दूसरे व्यक्ति पर बहुत गहरा असर पड़ता है.


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