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फिल्मी कहानी नहीं है पहली नजर का प्यार !!

datingआप ने पहली नजर का प्यार जैसी फिल्मी कहावतें तो जरूर सुनी होंगी. लेकिन वास्तविकता में ऐसा हो पाना थोड़ा मुश्किल प्रतीत होता है. लेकिन हाल ही में हुआ एक शोध यह स्पष्ट कर सकता है कि पहली नजर का प्यार भले ही महिलाओं के लिए एक हास्यास्पद बात हो लेकिन पुरुष तो ऐसी फिल्मी कहावतों का अनुसरण काफी लंबे समय से करते आ रहे हैं.


ब्रिटिश संस्थान द्वारा कराया गया यह सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि पुरुष खूबसूरती को देखकर जल्द ही फिसल जाते हैं. प्यार के मामलों में उनका स्वभाव थोड़ा अलग होता है. वह संबंधों की शुरुआत करने से पहले आपसी भावनाओं और साथी के स्वभाव से ज्यादा अहमियत उसके बाहरी व्यक्तित्व को देते हैं. जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पहली नजर में ही प्यार हो जाता है. वह एक ही मुलाकात में अपनी मिस राइट का चुनाव कर सकते हैं. जबकि महिलाएं अपने मिस्टर राइट का चुनाव करते समय एक लंबा समय लगा देती हैं. क्योंकि साथी को लेकर महिलाओं की प्राथमिकताएं थोड़ी जटिल होती हैं. वह ना सिर्फ पुरुष के बाहरी व्यक्तित्व पर ध्यान देती हैं बल्कि उसके स्वभाव के साथ व्यवहारिक संतुलन की संभावनाओं को भी बहुत अधिक महत्व देती हैं.


ब्रिटिश साइकोलॉजी सोसाइटी द्वारा कराए गए सर्वेक्षण ने कुछ हैरान कर देने वाले तथ्य भी सामने रखे हैं. नतीजों की मानें तो 10 में से 7 पुरुषों ने यह माना कि वह पहली नजर के प्यार में विश्वास रखते हैं. वहीं 10 में से केवल 1 महिला ने ही यह स्वीकार किया कि उन्होंने लव एट फर्स्ट साइट जैसी चीजें महसूस की हैं.


इस सर्वेक्षण के मुख्य शोधकर्ता एलेक्जेंडर गॉर्डन का कहना है कि सामाजिक परिस्थितियों और संबंधों की समझ पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में कहीं अधिक होती है. वह अपने जीवन, खासतौर पर विवाह से जुड़ा कोई भी निर्णय जल्दबाजी में ना लेकर काफी सोच-विचार करके लेना ही उपयुक्त समझती हैं. जहां पुरुष केवल सुंदरता पर ही अपना ध्यान केंद्रित किए रहते हैं वहीं महिलाएं अपने भविष्य को लेकर अपेक्षाकृत अधिक सजग और संजीदा होती हैं. सुरक्षित भविष्य की आशा लिए वह पहले से अपनी सभी शंकाओं का निवारण कर लेना ही बेहतर समझती हैं. इसीलिए उनके प्रश्नों की सूची भी बहुत लंबी होती है. अपनी खुशियों को लेकर वह काफी सचेत भी होती हैं.


यह सर्वे 16-86 वर्ष तक के व्यक्तियों, जिसमें लगभग 1500 पुरुष और इतनी ही महिलाएं शामिल है, को केन्द्र में रखकर किया गया है. स्थापनाओं के अनुसार, एक औसत ब्रिटिश पुरुष अपने जीवन में तीन बार प्यार करता है. वहीं एक औसत महिला केवल एक ही बार सच्चे प्यार का अनुभव करती है. एक तरफा प्यार के मामले भी महिलाओं की अपेक्षा पुरुष के जीवन में कहीं ज्यादा होते हैं.


प्रेम के क्षेत्र में काफी हद तक असमान भावनाओं और अपेक्षाओं के होने के बावजूद कुछ बातें हैं जो महिला और पुरुष को समानता की डोर से बांधे हुए हैं. महिला हो या पुरुष, दोनों का यह मानना है कि अपने असफल पहले प्यार के दर्द से उबर पाना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था और साथ ही वह कभी अपने साथी के विश्वासघात को नहीं भूल पाएंगे.


यद्यपि यह शोध ब्रिटिश लोगों की जीवनशैली को केंद्र में रखकर कराया गया है. लेकिन अगर इसे भारतीय परिदृश्य के साथ जोड़कर देखा जाए तो परिस्थितियां लगभग समान ही प्रतीत होती हैं. यहां भी ऐसा आम देखा जा सकता है कि पुरुष सूरत को महत्व देते हुए आपसी भावनाओं और प्रेम की अनदेखी कर देते हैं. उनके लिए प्यार और भावना जैसी चीजों का महत्व अपेक्षाकृत कम होता है. हां, यहां एक बात जिसे हम नकार नहीं सकते कि कई महिलाएं भी हैं जो भौतिक सुखों की तलाश में पैसे को अधिक महत्व देने लगती हैं और प्यार को नकार देती हैं. वैसे भी ऐसे शोध के नतीजे सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू नहीं होते. यह सिर्फ हमें आधुनिक समाज में विद्यमान प्रचलन का एक उदाहरण मात्र दिखाते हैं. ऐसे शोधों को आधार बना कर अगर हम महिलाओं और पुरुषों के स्वभाव और व्यवहार का अनुमान लगाएंगे तो यह किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं होगा. पहले प्यार और साथी द्वारा किए गए विश्वासघात की बात करें तो पहला प्यार सभी के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और अगर किसी कारणवश वह अधूरा रह जाए तो व्यक्ति चाहे किसी भी देश का हो सभी को समान रूप से आहत करता है. भावनाएं सभी में होती हैं बस उन्हें दर्शाने का तरीका और माध्यम अलग होता है.


आप ने पहली नजर का प्यार जैसी फिल्मी कहावतें तो जरूर सुनी होंगी. लेकिन वास्तविकता में ऐसा हो पाना थोड़ा मुश्किल प्रतीत होता है. लेकिन हाल ही में हुआ एक शोध यह स्पष्ट कर सकता है कि पहली नजर का प्यार भले ही महिलाओं के लिए एक हास्यास्पद बात हो लेकिन पुरुष तो ऐसी फिल्मी कहावतों का अनुसरण काफी लंबे समय से करते आ रहे हैं.

ब्रिटिश संस्थान द्वारा कराया गया यह सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि पुरुष खूबसूरती को देखकर जल्द ही फिसल जाते हैं. प्यार के मामलों में उनका स्वभाव थोड़ा अलग होता है. वह संबंधों की शुरुआत करने से पहले आपसी भावनाओं और साथी के स्वभाव से ज्यादा अहमियत उसके बाहरी व्यक्तित्व को देते हैं. जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पहली नजर में ही प्यार हो जाता है. वह एक ही मुलाकात में अपनी मिस राइट का चुनाव कर सकते हैं. जबकि महिलाएं अपने मिस्टर राइट का चुनाव करते समय एक लंबा समय लगा देती हैं. क्योंकि साथी को लेकर महिलाओं की प्राथमिकताएं थोड़ी जटिल होती हैं. वह ना सिर्फ पुरुष के बाहरी व्यक्तित्व पर ध्यान देती हैं बल्कि उसके स्वभाव के साथ व्यवहारिक संतुलन की संभावनाओं को भी बहुत अधिक महत्व देती हैं.

ब्रिटिश साइकोलॉजी सोसाइटी द्वारा कराए गए सर्वेक्षण ने कुछ हैरान कर देने वाले तथ्य भी सामने रखे हैं. नतीजों की मानें तो 10 में से 7 पुरुषों ने यह माना कि वह पहली नजर के प्यार में विश्वास रखते हैं. वहीं 10 में से केवल 1 महिला ने ही यह स्वीकार किया कि उन्होंने लव एट फर्स्ट साइट जैसी चीजें महसूस की हैं.

इस सर्वेक्षण के मुख्य शोधकर्ता एलेक्जेंडर गॉर्डन का कहना है कि सामाजिक परिस्थितियों और संबंधों की समझ पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में कहीं अधिक होती है. वह अपने जीवन, खासतौर पर विवाह से जुड़ा कोई भी निर्णय जल्दबाजी में ना लेकर काफी सोच-विचार करके लेना ही उपयुक्त समझती हैं. जहां पुरुष केवल सुंदरता पर ही अपना ध्यान केंद्रित किए रहते हैं वहीं महिलाएं अपने भविष्य को लेकर अपेक्षाकृत अधिक सजग और संजीदा होती हैं. सुरक्षित भविष्य की आशा लिए वह पहले से अपनी सभी शंकाओं का निवारण कर लेना ही बेहतर समझती हैं. इसीलिए उनके प्रश्नों की सूची भी बहुत लंबी होती है. अपनी खुशियों को लेकर वह काफी सचेत भी होती हैं.

यह सर्वे 16-86 वर्ष तक के व्यक्तियों, जिसमें लगभग 1500 पुरुष और इतनी ही महिलाएं शामिल है, को केन्द्र में रखकर किया गया है. स्थापनाओं के अनुसार, एक औसत ब्रिटिश पुरुष अपने जीवन में तीन बार प्यार करता है. वहीं एक औसत महिला केवल एक ही बार सच्चे प्यार का अनुभव करती है. एक तरफा प्यार के मामले भी महिलाओं की अपेक्षा पुरुष के जीवन में कहीं ज्यादा होते हैं.

प्रेम के क्षेत्र में काफी हद तक असमान भावनाओं और अपेक्षाओं के होने के बावजूद कुछ बातें हैं जो महिला और पुरुष को समानता की डोर से बांधे हुए हैं. महिला हो या पुरुष, दोनों का यह मानना है कि अपने असफल पहले प्यार के दर्द से उबर पाना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था और साथ ही वह कभी अपने साथी के विश्वासघात को नहीं भूल पाएंगे.

यद्यपि यह शोध ब्रिटिश लोगों की जीवनशैली को केंद्र में रखकर कराया गया है. लेकिन अगर इसे भारतीय परिदृश्य के साथ जोड़कर देखा जाए तो परिस्थितियां लगभग समान ही प्रतीत होती हैं. यहां भी ऐसा आम देखा जा सकता है कि पुरुष सूरत को महत्व देते हुए आपसी भावनाओं और प्रेम की अनदेखी कर देते हैं. उनके लिए प्यार और भावना जैसी चीजों का महत्व अपेक्षाकृत कम
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ब्रिटिश संस्थान द्वारा कराया गया यह सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि पुरुष खूबसूरती को देखकर जल्द ही फिसल जाते हैं. प्यार के मामलों में उनका स्वभाव थोड़ा अलग होता है. वह संबंधों की शुरुआत करने से पहले आपसी भावनाओं और साथी के स्वभाव से ज्यादा अहमियत उसके बाहरी व्यक्तित्व को देते हैं. जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पहली नजर में ही प्यार हो जाता है. वह एक ही मुलाकात में अपनी मिस राइट का चुनाव कर सकते हैं. जबकि महिलाएं अपने मिस्टर राइट का चुनाव करते समय एक लंबा समय लगा देती हैं. क्योंकि साथी को लेकर महिलाओं की प्राथमिकताएं थोड़ी जटिल होती हैं. वह ना सिर्फ पुरुष के बाहरी व्यक्तित्व पर ध्यान देती हैं बल्कि उसके स्वभाव के साथ व्यवहारिक संतुलन की संभावनाओं को भी बहुत अधिक महत्व देती हैं.

ब्रिटिश साइकोलॉजी सोसाइटी द्वारा कराए गए सर्वेक्षण ने कुछ हैरान कर देने वाले तथ्य भी सामने रखे हैं. नतीजों की मानें तो 10 में से 7 पुरुषों ने यह माना कि वह पहली नजर के प्यार में विश्वास रखते हैं. वहीं 10 में से केवल 1 महिला ने ही यह स्वीकार किया कि उन्होंने लव एट फर्स्ट साइट जैसी चीजें महसूस की हैं.

इस सर्वेक्षण के मुख्य शोधकर्ता एलेक्जेंडर गॉर्डन का कहना है कि सामाजिक परिस्थितियों और संबंधों की समझ पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में कहीं अधिक होती है. वह अपने जीवन, खासतौर पर विवाह से जुड़ा कोई भी निर्णय जल्दबाजी में ना लेकर काफी सोच-विचार करके लेना ही उपयुक्त समझती हैं. जहां पुरुष केवल सुंदरता पर ही अपना ध्यान केंद्रित किए रहते हैं वहीं महिलाएं अपने भविष्य को लेकर अपेक्षाकृत अधिक सजग और संजीदा होती हैं. सुरक्षित भविष्य की आशा लिए वह पहले से अपनी सभी शंकाओं का निवारण कर लेना ही बेहतर समझती हैं. इसीलिए उनके प्रश्नों की सूची भी बहुत लंबी होती है. अपनी खुशियों को लेकर वह काफी सचेत भी होती हैं.

यह सर्वे 16-86 वर्ष तक के व्यक्तियों, जिसमें लगभग 1500 पुरुष और इतनी ही महिलाएं शामिल है, को केन्द्र में रखकर किया गया है. स्थापनाओं के अनुसार, एक औसत ब्रिटिश पुरुष अपने जीवन में तीन बार प्यार करता है. वहीं एक औसत महिला केवल एक ही बार सच्चे प्यार का अनुभव करती है. एक तरफा प्यार के मामले भी महिलाओं की अपेक्षा पुरुष के जीवन में कहीं ज्यादा होते हैं.

प्रेम के क्षेत्र में काफी हद तक असमान भावनाओं और अपेक्षाओं के होने के बावजूद कुछ बातें हैं जो महिला और पुरुष को समानता की डोर से बांधे हुए हैं. महिला हो या पुरुष, दोनों का यह मानना है कि अपने असफल पहले प्यार के दर्द से उबर पाना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था और साथ ही वह कभी अपने साथी के विश्वासघात को नहीं भूल पाएंगे.

यद्यपि यह शोध ब्रिटिश लोगों की जीवनशैली को केंद्र में रखकर कराया गया है. लेकिन अगर इसे भारतीय परिदृश्य के साथ जोड़कर देखा जाए तो परिस्थितियां लगभग समान ही प्रतीत होती हैं. यहां भी ऐसा आम देखा जा सकता है कि पुरुष सूरत को महत्व देते हुए आपसी भावनाओं और प्रेम की अनदेखी कर देते हैं. उनके लिए प्यार और भावना जैसी चीजों का महत्व अपेक्षाकृत कम होता है. हां, यहां एक बात जिसे हम नकार नहीं सकते कि कई महिलाएं भी हैं जो भौतिक सुखों की तलाश में पैसे को अधिक महत्व देने लगती हैं और प्यार को नकार देती हैं. वैसे भी ऐसे शोध के नतीजे सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू नहीं होते. यह सिर्फ हमें आधुनिक समाज में विद्यमान प्रचलन का एक उदाहरण मात्र दिखाते हैं. ऐसे शोधों को आधार बना कर अगर हम महिलाओं और पुरुषों के स्वभाव और व्यवहार का अनुमान लगाएंगे तो यह किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं होगा. पहले प्यार और साथी द्वारा किए गए विश्वासघात की बात करें तो पहला प्यार सभी के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और अगर किसी कारणवश वह अधूरा रह जाए तो व्यक्ति चाहे किसी भी देश का हो सभी को समान रूप से आहत करता है. भावनाएं सभी में होती हैं बस उन्हें दर्शाने का तरीका और माध्यम अलग होता है.

होता है. हां, यहां एक बात जिसे हम नकार नहीं सकते कि कई महिलाएं भी हैं जो भौतिक सुखों की तलाश में पैसे को अधिक महत्व देने लगती हैं और प्यार को नकार देती हैं. वैसे भी ऐसे शोध के नतीजे सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू नहीं होते. यह सिर्फ हमें आधुनिक समाज में विद्यमान प्रचलन का एक उदाहरण मात्र दिखाते हैं. ऐसे शोधों को आधार बना कर अगर हम महिलाओं और पुरुषों के स्वभाव और व्यवहार का अनुमान लगाएंगे तो यह किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं होगा. पहले प्यार और साथी द्वारा किए गए विश्वासघात की बात करें तो पहला प्यार सभी के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और अगर किसी कारणवश वह अधूरा रह जाए तो व्यक्ति चाहे किसी भी देश का हो सभी को समान रूप से आहत करता है. भावनाएं सभी में होती हैं बस उन्हें दर्शाने का तरीका और माध्यम अलग होता है.

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