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रंगीन मिजाज वाले हो जाएं सावधान

“क्या फायदा उस रंगीन जीवन से जो कर दे आपकी जीवन रेखा कम.”

Lifestyle Blogलड़कियों को डेट पर ले जाना, सप्ताहांत में रंगीन पार्टियां और अलग-अलग महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाना पुरुषों की रंगीन जीवन शैली का परिचायक है. ऐसे लोगों को हम रसिया कहते हैं. परन्तु अब ऐसे रंगीन मिजाज वाले व्यक्ति हो जाएं होशियार क्योंकि शोधकर्ताओं का दावा है कि कई महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने वाले रंगीन मिजाज वाले पुरुष कम उम्र में ही काल के गाल में समा सकते हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के वैज्ञानिकों के द्वारा कराए गए इस शोध से पता चलता है कि अधिकतर ऐसे पुरुष महिलाओं के चक्कर में अपने खाने-पीने जैसी प्राथमिकताओं पर ध्यान नहीं दे पाते. इस वजह से उनका शारीरिक विकास थम जाता है जिसके कारण उनकी रोगों से ग्रस्त होने की संभवना अधिक हो जाती है. हालांकि ‘जर्नल ऑफ एवोल्यूशनरी बायोलॉजी’ में प्रकाशित इस शोध में यह भी कहा गया है कि आम तौर पर इस प्रकृति के पुरुष बहुत कम होते हैं.

Lifestyle Hindi Blogशोध के प्रमुख वैज्ञानिक एलेक्स जॉर्डन का कहना है कि, “प्राकृतिक तौर पर ऐसा संभवत: इसलिए भी है कि इससे पुरुष अपने साथी के प्रति वफादार रहें. हमें आश्चर्य होता है कि क्यों प्रकृति एक से ज्यादा पार्टनरों के साथ संबंध बनाने की इजाजत नहीं देती.”

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पल के सुख के लिए पुरुष कई महिलाओं के साथ संबंध बनाते हैं परन्तु अब शोध ने सिद्ध कर दिया है कि पुरुषों की इस फितरत के कारण उनको भारी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है.

मछलियों पर किया शोध

Hindi Blogsवैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह अध्ययन मछलियों पर आधारित है. शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने बताया की पहली बार किसी बड़े शोध में मछलियों पर प्रयोग किया गया है. वैज्ञानिकों ने अपने इस प्रयोग में नर मछलियों के साथ लगातार नई-नई मादा मछलियों को रखा और इस दौरान उन्हें तरह-तरह का भोजन भी दिया. इस दौरान उनकी गतिविधियों की निगरानी भी की गई.

कुछ दिनों के अध्ययन के बाद पता चला कि ‘जिन नर मछलियों ने भोजन खाने से ज्यादा मादा मछलियों को निहारने में समय व्यतीत किया उन नर मछलियों में सामान्य मछलियों की तुलना में धीमी वृद्धि देखी गई. जबकि उसके विपरीत केवल एक मादा मछली के साथ रहने वाली नर मछलियों का शारीरिक विकास बेहतर पाया गया. चूंकि मनुष्य भी मछलियों की तरह कशेरुकी जीव (हड्डी वाला) होता हैं अतः वैज्ञानिकों का मानना था कि यह परिणाम पुरुषों पर भी लागू होते हैं.

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