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आप लव मैरेज करेंगे या अरेंज !!

marriagesलव मैरेज या अरेंज, प्राय: यह सवाल हर युवा के लिए जितना जटिल होता है उतना ही उनके खुशहाल जीवन के लिए जरूरी भी. आमतौर पर देखा जाता है जहां अरेंज मैरेज करने से बच्चों के अभिभावक खुशी और गर्व महसूस करते हैं वहीं लव मैरेज कर बच्चे अपने दांपत्य जीवन को लेकर संतुष्टि महसूस करते हैं. लेकिन क्या हर बार वही होता है जैसा हमने सोचा होता है? शायद नहीं क्योंकि कई बार सब कुछ सही तरीके और सूझबूझ से करने के बाद भी परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप हम यह सोचने लगते हैं कि काश हमने अपनी या परिवार की रजामंदी से विवाह किया होता.


लेकिन अगर आप विवाह करने की सोच रहे हैं और भविष्य में होने वाले जीवनसाथी को लेकर किसी उधेड़बुन में हैं तो ब्रिटेन की पत्रिका साइंस एंड इंवेंशन में प्रकाशित एक लेख आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है.


युवाओं के लिए कारगर सिद्ध होने वाला यह लेख दरअसल वर्ष 1924 में प्रकाशित हुआ था लेकिन अब प्रकाश में आया है. लेख के अनुसार व्यक्ति के जीवन में विवाह किसी लॉटरी से कम नहीं होता क्योंकि विवाह के बाद आपका साथी आपके साथ कैसा व्यवहार करेगा यह पहले से जान पाना असंभव है. परंतु अगर विवाह करने से पूर्व कोई व्यक्ति निम्नलिखित सुझावों पर अमल करता है तो वह यह जान सकता है कि उसका दांपत्य जीवन सुखद होगा या नहीं?

1. नर्वस डिसऑर्डर टेस्ट – इस टेस्ट के अंतर्गत यह प्रशिक्षण होता है कि विवाह बंधन में बंधने वाले जोड़ा तनाव के समय धैर्य और सहनशक्ति बरत सकता भी है या नहीं. लेखक द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार प्रेमी जोड़े के सामने हवा में बंदूक चलाई जानी चाहिए. अगर महिला और पुरुष दोनों ही उस आवाज से डरते या फिर गोली से भय रखते हैं तो ऐसे लोगों को विवाह नहीं करना चाहिए.

2. सिम्पैथी टेस्ट – भावी पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कितने संवेदनशील हैं यह देखने के लिए उन पर ब्लड डोनेशन टेस्ट किया जाना चाहिए. यह देखने के लिए कि जब दोनों में से एक व्यक्ति रक्त दान कर रहा होता है या किसी परेशानी में होता है तो दूसरा व्यक्ति उसके प्रति कितनी सांत्वना और संवेदनशीलता रखता है. यह सब उनकी हार्ट-बीट और शारीरिक तापमान को माप कर किया जा सकता है.

3. फिजिकल अट्रैक्शन टेस्ट – अंत में विवाह करने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण एक-दूसरे के प्रति शारीरिक आकर्षण का होना है. अगर जोड़े में से एक व्यक्ति भी अपने साथी के लिए भावनाएं या फिर आकर्षण नहीं रखता तो उनका संबंध ज्यादा समय तक नहीं चल सकता. जब भावी दंपत्ति आपस में गले मिलते या करीब आते हैं तो उनके व्यवहार को देखकर यह समझा जा सकता है कि वह एक-दूसरे के प्रति कितने आकर्षित हैं.


लेखक की नजर में यह तरीके 1920 के दशक के सबसे अचूक सुझाव हैं जिन्हें अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने लिए एक योग्य जीवनसाथी चुन सकता है. वैसे देखा जाए तो जीवनसाथी चुनने का यह ढंग थोड़ा हास्यास्पद ही है लेकिन अगर इनके द्वारा आपको एक सफल और सुखद वैवाहिक जीवन मिल सकता है तो इन पर अमल करने में कोई हर्ज भी नहीं है.


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