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पैसे के प्रति अति आकर्षण मतलब वैवाहिक जीवन में दरार

money versus family timeअगर आप अपनी पारिवारिक खुशियों से ज्यादा पैसे को अहमियत देते हैं तो आपका ऐसा व्यवहार किसी भी रूप में हितकर साबित नहीं हो सकता. हालांकि गृहस्थी को सुचारू रूप से चलाने के लिए पैसा बहुत उपयोगी है, लेकिन परिवारजनों का आपसी प्रेम और एक-दूसरे के साथ बिताए गए भावपूर्ण लम्हें इससे कहीं ज्यादा जरूरी हैं. लेकिन आजकल के प्रतिस्पर्धा भरे माहौल में, जब व्यक्तियों की जीवनशैली भी नकारात्मक ढंग से प्रभावित हुई है, किसी के भी पास इतना समय नहीं बचा है कि वह अपने परिवार और मित्रों को अपेक्षित और पर्याप्त समय समर्पित कर पाए.

वैसे तो आपने कई बार लोगों को यह कहते सुना होगा कि पैसा ही सारी मुसीबतों की जड़ है. लेकिन चीन में हुआ एक अध्ययन इस बात को प्रमाणित करता है कि पैसा और समस्याओं का अटूट नाता है. विशेषकर जब मनुष्य पैसे के पीछे भागता हुआ अपनी और अपने परिवार की सुधबुध ही ना रखे, तो नि:संदेह उसका वैवाहिक जीवन खतरे में पड़ सकता है.


चीन जनसंख्या संचार केन्द्र और शंघाई सामाजिक विज्ञान अकादमी द्वारा कराए गए इस शोध में भाग लेने वाले करीब 34 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे अपने वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं  हैं,  जबकि 6.5 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे बहुत ज्यादा असंतुष्ट हैं. इसके अलावा करीब 32 प्रतिशत लोगों ने अपने वैवाहिक जीवन को महज ठीक-ठाक बताया है. इस शोध से संबंधित रिपोर्ट चीन के सरकारी समाचार पत्र चाइना डेली में प्रकाशित की गई थी.


इस सर्वे में 15 से 55 साल के बीच के तीन हजार से ज्यादा लोगों से सवाल पूछे गए जिसमें से पुरूष 74 प्रतिशत थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन से ज्यादा संतुष्ट हैं क्योंकि केवल 26 प्रतिशत महिलाओं ने ही यह माना है कि वे अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं हैं.


इस सर्वेक्षण के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि विश्व में सबसे शक्तिशाली बनने की दौड़ में चीनी लोग अपना व्यक्तिगत जीवन और वैवाहिक संबंध दोनों को ताक पर रख कर चल रहे हैं. अधिकाधिक पैसा कमाने के लिए वे लोग दिन-रात मेहनत करते हैं, जिसकी वजह से उनके वैवाहिक संबंधों में दरार पड़ रही है. वह ना तो एक-दूसरे के साथ समय बिता पाते हैं और ना ही मतभेदों को समाप्त कर पाते हैं, जिसकी वजह से चीनी लोगों की प्रति व्यक्ति आय तो बढ़ रही है लेकिन उनके पारिवारिक जीवन की गुणवत्ता गिरती जा रही है.


भारत में भी हालात कुछ ज्यादा भिन्न नहीं हैं. यहां भी परिस्थितियां कुछ ऐसी ही बन पड़ी हैं कि लोग अपने परिवार की खुशियों और उनके साथ से ज्यादा तरजीह पैसे को देने लगे हैं. व्यक्ति चाहे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही पैसे के पीछे भागने को सही ठहराए लेकिन वास्तविकता यह है कि पैसा केवल आपकी भौतिक जरूरतों को ही पूरा कर सकता है, आपकी और आपके परिवार की खुशियों को नहीं खरीद सकता. जीवन के लिए पैसा जरूरी है, लेकिन इतना नहीं कि आप अपना ध्यान इसी पर केंद्रित कर अपने परिवार की भावनाओं, उनकी अपेक्षाओं को नजरअंदाज कर जाएं क्योंकि जीवन की सफलता और आपकी खुशियां पैसों की अधिकता में नहीं अपनों के साथ में है.


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